बक्सर-बलिया सड़क चौड़ीकरण की राह मुश्किल; तकनीकी पेंच में फंसी एनएच-120 विस्तार योजना
बिहार के शाहाबाद क्षेत्र को पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी एनएच-120 विस्तार परियोजना तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों के कारण रुक गई है।

एनएच 120 के विस्तारीकरण की योजना ठंडे बस्ते में। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
एनएच-120 विस्तार परियोजना तकनीकी-प्रशासनिक अड़चनों के कारण रुकी।
पुराना भोजपुर-नियाजीपुर में अतिक्रमण बड़ी बाधा बना।
राष्ट्रीय राजमार्ग अधिसूचना न मिलने से केंद्रीय निधि नहीं।
संवाद सहयोगी, डुमरांव (बक्सर)। बिहार के शाहाबाद क्षेत्र को पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना फिलहाल तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों में उलझ गई है।
पुराना भोजपुर से आशा पड़री, नियाजीपुर होते हुए उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में गंगा पर बने जनेश्वर मिश्र सेतु (बयासी) तक करीब 15 से 20 किलोमीटर सड़क के चौड़ीकरण की केंद्रीय योजना फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है।
इस बीच राज्य सरकार वैकल्पिक संपर्क मार्ग विकसित कर रही है, जबकि जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी इस मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) का दर्जा दिलाने और डुमरांव बाईपास के तहत रोड ओवरब्रिज निर्माण के प्रयासों में हैं।
एनएच-120 को बलिया तक बढ़ाने की थी योजना
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने बिहारशरीफ-राजगीर-गया-दाउदनगर-नासरीगंज-बिक्रमगंज-नावानगर होते हुए डुमरांव तक आने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-120 का विस्तार कर उसे जनेश्वर मिश्र सेतु के जरिए उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग-31 से जोड़ने की योजना बनाई थी।
इस परियोजना का उद्देश्य आरा-बक्सर फोरलेन और बलिया के बीच निर्बाध सड़क संपर्क स्थापित करना था, जिससे बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच माल परिवहन तेज हो तथा कृषि उत्पादों, विशेषकर सब्जी और डेयरी कारोबार को नई गति मिले।
डीपीआर तक पहुंची थी परियोजना
करीब दो वर्ष पहले एनएच-120 पथ प्रमंडल, गया ने पुराना भोजपुर के समीप एनएच-120 और एनएच-922 (पटना-बक्सर फोरलेन) को जोड़ना था।
इसके लिए आधुनिक जंक्शन बनाने और सड़क को लगभग 10 मीटर (33 फीट) चौड़ा करने की योजना तैयार की थी। मुंबई की एक कंसल्टेंट एजेंसी को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।
एजेंसी की टीम ने विभागीय अधिकारियों के साथ प्रस्तावित मार्ग का सर्वेक्षण भी किया था।
अतिक्रमण बना बड़ी बाधा
सर्वेक्षण के दौरान यह सामने आया कि सरकारी अभिलेखों में पर्याप्त भूमि उपलब्ध होने के बावजूद पुराना भोजपुर और नियाजीपुर जैसे बाजार क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो चुका है।
ऐसे में व्यापक अतिक्रमण हटाओ अभियान के बिना चौड़ीकरण का कार्य शुरू करना संभव नहीं है। फिलहाल सबसे बड़ी बाधा यह है कि पुराना भोजपुर-नियाजीपुर-बलिया मार्ग को राष्ट्रीय राजमार्ग-120 के विस्तारित हिस्से के रूप में केंद्र सरकार की अंतिम अधिसूचना नहीं मिल सकी है।
एनएच-120 पथ प्रमंडल, गया के कार्यपालक अभियंता इंद्रजीत आर्य ने बताया कि केंद्र सरकार का स्पष्ट नियम है कि केंद्रीय निधि केवल अधिसूचित राष्ट्रीय राजमार्गों पर ही खर्च की जा सकती है।
इसलिए औपचारिक मान्यता मिलने तक चौड़ीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती। उन्होंने कहा कि इस मार्ग को एनएच घोषित कराने के लिए विभागीय स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
सांसद ने फिर मामला उठाने का दिया भरोसा
बक्सर के सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि उन्होंने पहले भी केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के समक्ष इस मार्ग को एनएच-120 से जोड़ने और शीघ्र चौड़ीकरण की मांग उठाई थी, जिसके बाद मंत्रालय ने प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू की थी।
उन्होंने कहा कि अब तकनीकी बाधा दूर कराने के लिए एनएच-120 के अधीक्षण अभियंता और कार्यपालक अभियंता के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे।
जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को फिर से केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के समक्ष उठाया जाएगा।
क्षेत्र को होगा बड़ा लाभ
यदि यह परियोजना मंजूरी पाकर धरातल पर उतरती है तो बक्सर, भोजपुर, रोहतास और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क काफी बेहतर होगा।
इससे माल परिवहन की लागत घटेगी, यात्रा समय कम होगा और सीमावर्ती इलाकों में व्यापार तथा औद्योगिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।
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