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नवरात्र के 9 दिन मां को लगाएं 9 अलग-अलग भोग, हर दिन के शुभ रंग और पूजा की खास बातें

Published: Sat, 10 Oct 2026 01:34 PM (IST)

शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा, भोग और शुभ रंगों का महत्व बताया गया है। यह ...और पढ़ें

नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा

नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा

HighLights

  1. नवरात्र के नौ दिनों के लिए विशेष भोग और रंग।

  2. मां दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप को अर्पित करें विशिष्ट प्रसाद।

  3. पूजा में स्वच्छता और सात्विकता का विशेष ध्यान रखें।

जागरण संवाददाता, बक्सर। शारदीय नवरात्र केवल मां दुर्गा की आराधना का पर्व नहीं, बल्कि श्रद्धा, भक्ति और सात्विक जीवनशैली अपनाने का अवसर भी है। नौ दिनों तक मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान हर दिन देवी को अलग-अलग भोग अर्पित करने और दिन के अनुसार विशेष रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा भी प्रचलित है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार मां को प्रसाद चढ़ाते हैं। कर्मकांडी उपेंद्र मिश्र और पंडित रवीन्द्रनाथ तिवारी के अनुसार, भोग तैयार करते समय स्वच्छता और सात्विकता का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानें, नौ दिनों में किस देवी को क्या भोग लगाएं और किस रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा है।

पहला दिन: मां शैलपुत्री को घी का भोग, पहनें पीले वस्त्र

नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। इस दिन मां को गाय के घी का भोग अर्पित करने की परंपरा है। श्रद्धालु पीले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा कर सकते हैं। पीला रंग उमंग, सकारात्मकता और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर-मिश्री, पहनें हरा रंग

दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना होती है। उन्हें शक्कर, मिश्री या मीठा प्रसाद अर्पित किया जाता है। इस दिन हरे रंग के कपड़े पहनने की परंपरा भी प्रचलित है। हरा रंग प्रकृति, हरियाली और नई ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा को दूध का भोग, पहनें ग्रे रंग

तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन देवी को दूध या दूध से बनी मिठाई का भोग लगाया जा सकता है। ग्रे यानी धूसर रंग के वस्त्र पहनना शुभ रंगों की प्रचलित सूची में शामिल है। मां चंद्रघंटा की पूजा साहस और शांति की कामना के साथ की जाती है।

चौथा दिन: मां कूष्मांडा को मालपुआ, पहनें नारंगी वस्त्र

चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा होती है। उन्हें मालपुआ का भोग अर्पित करने की परंपरा है। इस दिन नारंगी रंग के कपड़े पहन सकते हैं। यह रंग उत्साह, ऊर्जा और उल्लास का प्रतीक माना जाता है। घर में प्रसाद बनाते समय शुद्ध सामग्री और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

पांचवां दिन: मां स्कंदमाता को केले का भोग, पहनें सफेद रंग

पांचवें दिन मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है। मां को केला या केले से बना प्रसाद अर्पित किया जा सकता है। इस दिन सफेद रंग के वस्त्र पहनने की परंपरा है। सफेद रंग शांति, पवित्रता और सरलता का प्रतीक माना जाता है।

छठा दिन: मां कात्यायनी को शहद, पहनें लाल वस्त्र

छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इस दिन मां को शहद का भोग अर्पित करने की मान्यता है। लाल रंग के वस्त्र पहनना भी शुभ माना जाता है। लाल रंग शक्ति, साहस और उत्साह का प्रतीक है। पूजा के दौरान भक्त परिवार की सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना करते हैं।

सातवां दिन: मां कालरात्रि को गुड़ का भोग, पहनें नीला रंग

सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है। मां को गुड़ या गुड़ से बनी मिठाई अर्पित करने की परंपरा है। इस दिन नीले रंग के वस्त्र पहन सकते हैं।

मां कालरात्रि को संकटों से रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। भक्त उनसे भय दूर करने और जीवन में शक्ति देने की प्रार्थना करते हैं।

आठवां दिन: मां महागौरी को नारियल, पहनें गुलाबी वस्त्र

आठवें दिन महाअष्टमी पर मां महागौरी की पूजा की जाती है। उन्हें नारियल का भोग अर्पित करने की परंपरा है। इस दिन गुलाबी रंग के वस्त्र पहनना शुभ रंगों की प्रचलित सूची में शामिल है। कई घरों और पूजा पंडालों में महाअष्टमी पर कन्या पूजन भी किया जाता है।

नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री को तिल का भोग, पहनें बैंगनी रंग

नवरात्र के नौवें दिन मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। इस दिन तिल या तिल से बने प्रसाद का भोग लगाने की परंपरा बताई जाती है।

बैंगनी रंग के वस्त्र पहनना भी शुभ माना जाता है। नवमी पर कई परिवार कन्या पूजन कर हलवा, पूरी और चने का प्रसाद बनाते हैं तथा कन्याओं को भोजन कराकर आशीर्वाद लेते हैं।

भोग में रखें शुद्धता, रंगों को मानें परंपरा का हिस्सा

नवरात्र में भोग का महत्व केवल पकवानों तक सीमित नहीं है। यह भक्तों की श्रद्धा, समर्पण और सेवा भाव से जुड़ा है। पूजा के लिए प्रसाद साफ-सुथरे तरीके से तैयार करें और पूजा के बाद उसे परिवार तथा श्रद्धालुओं के बीच बांटें।

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