बक्सर । सरकारी स्कूलों को सहूलियतों के लिहाज से निजी स्कूलों के समकक्ष खड़ा करने के लिए उच्च विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की योजना है। जिले में यह योजना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए है या जनता के पैसे की बर्बादी के लिए, यह तय करना है तो ब्रह्मपुर प्रोजेक्ट बालिका प्लस टू हाई स्कूल का नजारा ले लीजिए। यहां स्मार्ट क्लास चलाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर आए फर्नीचर और मशीन पानी में भींग कर बर्बाद हो रहे हैं।

यहां बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए स्मार्ट क्लास की योजना शुरू की जा रही है। लेकिन, विद्यालय भवन जर्जर हो गया है और सभी कमरों में बारिश का पानी छत से टपक रहा है। छात्रों को बैठने के लिए भी जगह नहीं है। विद्यालय में 11 सौ छात्राओं को पढ़ने के लिए कुल 11 कमरे हैं, लेकिन सभी कमरे जर्जर हैं। आलम यह है कि तेज बारिश होने पर छुट्टी कर दी जाती है। वहीं, विद्यालय के कागजातों को प्लास्टिक से ढककर बचाया जाता है। स्मार्ट क्लास में खर्च होने हैं 11 लाख रुपये

विद्यालय में स्मार्ट क्लास चलाने के लिए 11 लाख रुपये तक का खर्च है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान द्वारा शुरू की गई इस योजना के लिए लगभग 2 माह पहले ही कुर्सी और फर्नीचर आदि की खरीदारी स्कूल में कर ली गई। इसमें ढाई से तीन लाख रुपये खर्च हुए। सभी समान विद्यालय के एक कमरे में रखे गए हैं। लेकिन, पानी में भींगने से फर्नीचर सड़ रहे हैं। शिक्षक बताते हैं कि एक भी कमरा सुरक्षित नहीं है, जिसमें समान रखा जा सके या स्मार्ट क्लास चलाया जा सके। असमंजस में स्कूल प्रबंधन

खस्ताहाल स्कूल भवन में स्मार्ट क्लास शुरू होने से विद्यालय प्रबंधन भी असमंजस में है। विद्यालय की प्रभारी प्रधानाध्यापक रेखा कुमारी ने बताया कि सभी कमरों में बारिश का पानी रिसता है। विद्यालय के कागजात और अन्य सामानों को प्लास्टिक से ढककर बचाया जाता है। लेकिन, विभाग के आदेश पर शीघ्र ही स्मार्ट क्लास शुरू किया जाएगा। इसके लिए प्रोजेक्टर और टीवी भी दो दिन में यहां आ जाएगा। हालांकि, सामानों की सुरक्षा करना मुश्किल काम है। पूरी स्थिति से विभाग को अवगत करा दिया गया है।

Posted By: Jagran

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस