बिहार का 400 साल पुराना तांत्रिक मंदिर, यहां नवरात्र में नहीं होती कलश स्थापना; जानिए रहस्य
बक्सर के डुमरांव में स्थित 400 साल पुराना राज-राजेश्वरी बगलामुखी देवी मंदिर तंत्र साधना और आध्यात्मिक आस्था का एक विशिष्ट केंद्र है।

डुमरांव का राज-राजेश्वरी मंदिर: तंत्र साधना और प्राचीन परंपरा का अद्भुत संगम
HighLights
400 साल पुराना तंत्र साधना का केंद्र।
राज-राजेश्वरी, बगलामुखी देवी का विशिष्ट मंदिर।
नवरात्र में विशेष तांत्रिक अनुष्ठान होते हैं।
जागरण संवाददाता, बक्सर। डुमरांव के लाला टोली रोड में स्थित राज-राजेश्वरी, बगलामुखी देवी का मंदिर आस्था, विश्वास और तंत्र साधना की प्राचीन परंपरा का विशिष्ट केंद्र है। करीब चार सौ वर्ष पुराने इस मंदिर की धार्मिक मान्यताएं और पूजा पद्धति इसे अन्य देवी मंदिरों से अलग पहचान देती हैं।
यहां शारदीय, बासंतिक और गुप्त नवरात्र के दौरान विशेष तांत्रिक अनुष्ठान किए जाते हैं। मंदिर की मान्यता है कि यहां पूजा-अर्चना और आराधना करने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति की अनुभूति होती है। तंत्र साधना में रुचि रखने वाले साधकों के लिए भी यह मंदिर विशेष महत्व रखता है।
मंदिर की एक खास विशेषता यह है कि यहां पारंपरिक तरीके से कलश स्थापना नहीं की जाती। मंदिर की पूजा पद्धति तांत्रिक परंपराओं के अनुरूप संचालित होती है। सुबह और शाम की आरती के साथ विशेष अवसरों पर साधना और अनुष्ठान का क्रम चलता है।
स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच मंदिर को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से माता के दरबार में प्रार्थना करने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। नवरात्र के दिनों में यहां दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है।
मंदिर का इतिहास:
मंदिर की स्थापना करीब चार सौ वर्ष पूर्व प्रसिद्ध तांत्रिक पं. भवानी मिश्र ने कराई थी। स्थापना के बाद से उनके परिवार के सदस्य हीं मुख्य पुजारी की जिम्मेदारी निभाते आ रहे हैं। वर्तमान पुजारी पं. किरण मिश्रा के अनुसार मंदिर में देवी-देवताओं की प्रतिष्ठा तांत्रिक विधि से की गई है।
यहां प्रधान देवी राज-राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी के साथ मां बगलामुखी, तारा माता और दस महाविद्याओं की उपासना का विशेष महत्व है। पांच भैरवों की उपस्थिति भी मंदिर की विशिष्ट धार्मिक पहचान मानी जाती है।
मां बगलामुखी को विशेष रूप से सूखे मेवे का प्रसाद अर्पित किया जाता है। नवरात्र के दौरान पूजा-अर्चना के साथ मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहता है। वर्षों से चली आ रही परंपराओं के कारण यह मंदिर डुमरांव ही नहीं, आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।
राज-राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी मंदिर तंत्र साधना और आध्यात्मिक आस्था की प्राचीन परंपरा का केंद्र है। यहां प्रधान देवी के साथ मां बगलामुखी और दस महाविद्याओं की प्रतिष्ठा मंदिर को विशिष्ट बनाती है। शारदीय, बासंतिक और गुप्त नवरात्र में विशेष पूजा और साधना की जाती है। श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ माता के दरबार में पहुंचते हैं। - पं. किरण मिश्रा, पुजारी
यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। नवरात्र में श्रद्धालुओं को सुगमता पूर्वक दर्शन कराने और भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की जाती हैं। मंदिर विकास समिति का प्रयास रहता है कि भक्तों को पूजा-अर्चना में किसी तरह की परेशानी न हो और वे शांतिपूर्ण वातावरण में माता का दर्शन कर सकें। - टीपू कुमार, सदस्य मंदिर विकास समिति
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