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बक्सर । चार दिवसीय महापर्व अनुष्ठान के मौके पर महिलाएं घरों में छठ भजन और लोकगीत अमूमन गुनगुनाते रहती हैं। जो आज गुरुवार को गंगातट पर सुनाई पड़ रहा था। सूर्य की ताप से दोपहर तीखी धूप से ओट ली महिलाएं सामूहिक रूप से कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए. जैसे मधुर गीत गा रही थीं। जिससे पूरा माहौल भक्तिमय बना हुआ था। मौका था चैती षष्ठी के दिन महापर्व छठ पर डूबते सूर्य को अ‌र्घ्य देने का।

परन्तु, छठव्रतियों के आस्था और विश्वास के आगे सूर्य का ताप भी गुरुवार को कमजोर पड़ते दिखा। सूर्य का तेवर पुरजोर था। न्यूनतम 21 एवं अधिकतम तापमान तकरीबन 37 डिग्री सेल्सियस था। बावजूद,, व्रतियों का उत्साह एवं उमंग सिर चढ़ बोल रहा था। 

इधर, पौराणिक स्थल रामरेखाघाट पर व्रती महिलाओं का पहुंचना सुबह से ही जारी हो गया था। गंगा तट पर पहुंची महिलाओं एवं परिजनों ने सबसे पहले माकूल स्थल का चयन किया फिर साफ-सफाई कर बिछात लगाई। इसके उपरांत, पवित्र गंगाजल में स्नान किया और पूजन सामग्रियों को बनाने में जुट गईं। दूसरी तरफ, व्रतियों के परिजन बाजार से आवश्यक सामग्री की खरीदारी में जुट गए। इस दौरान चिलचिलाती धूप भी उन्हें नागवार नहीं गुजर रही थी। परन्तु, घाट पर मिली व्रती महिला सुलोचना देवी, अनुराधा देवी, शकुंतला देवी आदि को इस बात का मलाल था कि प्रशासन या जनसेवकों की ओर से छाजन के रूप में टेंट आदि की व्यवस्था नहीं की गई। व्रतियों ने कहा कि शुक्रवार को उदीयमान भगवान भाष्कर को अ‌र्घ्य दिए जाने के बाद शनिवार को रामनवमी का त्योहार मनाएंगी। - स्नानार्थियों की सुरक्षा को लगा था बैरिकेटिग

 

चैती छठ पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ काफी उमड़ने लगी है। केवल रामरेखाघाट पर ही व्रती महिलाओं की तादाद लगभग दस हजार से ऊपर थी। इनमें अधिकतर श्रद्धालु दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्र से पहुंचे हुए थे। जिनका घाट पर पहुंचना दोपहर पूर्व से ही शुरू हो गया था। हालांकि, इस मौके पर प्रशासन ने स्नानार्थियों के सुरक्षा के लिहाज से गंगा नदी में बैरिकेटिग भी लगवा रखे थे। जिससे स्नानार्थी पानी में अधिक नीचे न उतर सकें। वहीं, घाट की ओर जाने वाले रास्ते पर महिला पुलिस चुस्त-दुरुस्त खड़ी थीं। जो हर आने-जाने वाले पर निगहबानी करते हुए दुपहिया वाहन तक को प्रवेश करने पर पाबंद लगा रही थीं।  इन्सर्ट.., - कल रामनवमी और रविवार को सतुआन जासं, बक्सर : चैती छठ सम्पन्न होने के बाद शनिवार को रामनवमी है। उसके अगले दिन सतुआन पर्व है। लिहाजा, गंगा तट पर स्नानार्थियों की भीड़ इन दोनों अवसरों पर भी रहेगी। उसमें भी सतुआन के मेल में यहां विशेष भीड़ उमड़ती है। जिसके तहत महिलाएं गंगा स्नान कर जल भरा पात्र (घड़ा), पंखा, सत्तू, द्रव्य आदि का पुरोहितों को दान करती हैं। पतालेश्वरनाथ महादेव मंदिर के पुजारी रामेश्वरनाथ पंडित ने बताया कि चैत्र मास में सतुआन मनाने की परंपरा है, जो इस रविवार को है। आचार्य ने कहा कि यह मेष संक्रांति का पर्व है और मेष राशि पर सूर्य रविवार को प्रभावी हो रहे हैं। सो रविवार को ही सतुआन मनाया जाएगा। इधर, होमियोपैथ के वयोवृद्ध चिकित्सक डॉ. विजय चौधरी इसे वैज्ञानिक ²ष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण मानते हैं। उनका कहना है कि अधिक गर्मी की वजह से सूर्य की तपिश से शरीर का पित्त कुपित हो जाता है। जिसमें सत्तू और कच्चे आम का पन्ना या चटनी के सेवन किए जाने से इसका दुष्प्रभाव कम पड़ जाता है। हालांकि, कई लोग इसे रबी फसल की कटाई के बाद उमंग एवं खुशियों के त्योहार की परंपरा से जोड़कर देखते हैं।

Posted By: Jagran

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