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दो नए रेल बाईपास और 4 लाइन के कॉरिडोर से बदलेगी बक्सर की तस्वीर, लेक‍िन 100 एकड़ जमीन के बाद भी अड़चन

Published: Tue, 27 Oct 2026 03:48 PM (IST)

बक्सर रेलवे स्टेशन पर 100 एकड़ खाली जमीन होने के बावजूद नई ट्रेनों के लिए तकनीकी ढांचे की कमी है, ...और पढ़ें

बक्‍सर स्‍टेशन पर तकनीकी ढांचों की कमी। फाइल

बक्‍सर स्‍टेशन पर तकनीकी ढांचों की कमी। फाइल

जागरण संवाददाता, बक्सर। हावड़ा-नई दिल्ली मुख्य रेलमार्ग और बिहार-उत्तर प्रदेश सीमा पर स्थित पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल का बक्सर स्टेशन लंबी दूरी की नई ट्रेनें शुरू करने के लिए तकनीकी ढांचे की कमी से जूझ रहा है।

स्टेशन के पास रेलवे की लगभग 100 एकड़ खाली भूमि उपलब्ध होने के बावजूद वाशिंग पिट, कोचिंग मेंटेनेंस डिपो और स्टेबलिंग लाइन का निर्माण अब तक नहीं हो सका है।

प्राथमिक व द्वितीयक रखरखाव की यह सुविधा नहीं होने और सीमित प्लेटफार्मों के कारण यहां से दिल्ली, मुंबई, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के लिए ट्रेनों का मूल आरंभ (ओरिजिनेशन) संभव नहीं हो पा रहा है।

चार-लाइन काॅरिडोर व अमृत भारत योजना से बंधी है उम्मीद

16 मार्च 2017 को 16वें लोकसभा सत्र के दौरान तत्कालीन सांसद अश्विनी कुमार चौबे ने नियम 377 के तहत 100 एकड़ भूमि पर वाशिंग पिट, आधुनिक कोचिंग काम्प्लेक्स और स्टेबलिंग लाइन के निर्माण की मांग उठाई थी।

इसके पक्ष में तर्क दिया गया था कि बक्सर में यह ढांचा तैयार होने से पटना और दानापुर टर्मिनलों पर परिचालन का दबाव घटेगा।

उन्होंने बक्सर से गुजरने वाले सड़क, रेल और जल मार्ग के महत्व को देखते हुए इसे परिवहन हब के रूप में विकसित करने की मांग की थी।

100 एकड़ खाली जमीन के लिए सांसद ने उठाई थी मांग

इसके बाद वर्ष 2024 से वर्तमान सांसद सुधाकर सिंह द्वारा भी लगातार स्टेशन विस्तार, यात्री सुविधा और संरक्षा को लेकर संसद में लगातार सवाल उठाए गए हैं।

सदर विधायक आनंद मिश्रा ने भी इसके लिए रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड को पत्र लिखा है। लेकिन सरकार की ओर से कोई स्पष्ट सकारात्मक आश्वासन इस बारे में नहीं मिला है।

रेलवे नियमावली के तहत किसी स्टेशन से नियमित ट्रेनें शुरू करने से पहले पहियों, ब्रेक, एसी व वायरिंग जांच के लिए कैरिज एंड वैगन डिपो, वाशिंग पिट और स्टेबलिंग लाइन अनिवार्य तकनीकी आवश्यकताएं हैं।

बक्सर रेलवे स्टेशन के आसपास रेलवे की काफी खाली जमीन है। रेलवे कालोनी से सटे मित्रलोक कालोनी में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण करते हुए ताबड़तोड़ तरीके से नए मकान बनते जा रहे हैं।

इसके अलावा भी कमरपुर से नदांव हाल्ट तक रेलवे लाइन के दोनों किनारों पर पर्याप्त जमीन उपलब्ध है, जहां वाशिंग पिट और कोचिंग कांप्लेक्स बनाया जा सकता है।

दो नई लाइन से बढ़ जाएगा बक्‍सर का महत्‍व 

गाजीपुर-कर्मा-भदौरा रेल बाईपास और नेउरा-दनियावां रेल बाईपास का निर्माण पूरा होने पर बक्सर रेलवे स्टेशन का महत्व और अधिक बढ़ जाएगा।

फिलहाल रेलवे बलिया, गाजीपुर, आरा जैसे समीपवर्ती समकक्ष स्टेशनों के साथ ही कारीसाथ और जगजीवन हाल्ट जैसे छोटे स्टेशन और हाल्ट के विकास के लिए भी तत्पर है। 

लेकिन बक्सर के बारे में बात अभी आश्वासनों से आगे नहीं बढ़ पा रही है। रेलवे की ओर से स्वीकृत बक्सर-लखीसराय 4-लाइन कारिडोर (तीसरी और चौथी लाइन) परियोजना से भविष्य में परिदृश्य और बदलेगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बीते 29 जुलाई को संसद में बताया कि बक्सर के लिए एक दीर्घकालिक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इसके तहत तकनीकी व्यवहार्यता, फंड और परिचालन आवश्यकताओं के आधार पर चरणबद्ध विकास होना है।

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