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बक्‍सर में थानेदार और मंदिर का ये रिश्ता है बेहद खास, 1920-21 से चली आ रही परंपरा आज भी कायम

Published: Tue, 25 Aug 2026 09:17 AM (IST)

नावानगर के ऐतिहासिक थानेश्वर मंदिर में सावन की अंतिम सोमवारी पर पुलिसकर्मी आस्था और सेवा का अनूठा रूप दिखाते हैं। ...और पढ़ें

श‍िव आराधना करते थानेदार प्रफुल्‍ल कुमार और उनकी पत्‍नी नंदनी कुमारी।

श‍िव आराधना करते थानेदार प्रफुल्‍ल कुमार और उनकी पत्‍नी नंदनी कुमारी।

HighLights

  1. नावानगर थानेश्वर मंदिर में पुलिस की अनूठी परंपरा।

  2. थानाध्यक्ष सपत्नीक निभाते हैं मुख्य यजमान की भूमिका।

  3. यह परंपरा 1920-21 से चली आ रही है।

संवाद सहयोगी, नावानगर (बक्सर)। आमतौर पर कानून-व्यवस्था संभालने वाली पुलिस नावानगर के ऐतिहासिक थानेश्वर मंदिर में सावन की अंतिम सोमवारी पर आस्था और सेवा के अलग रूप में नजर आती है।

यहां वर्षों पुरानी परंपरा के तहत थानाध्यक्ष सपत्नीक मुख्य यजमान बनकर भगवान शिव समेत अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना करते हैं। पुलिस की यह पहल धार्मिक सौहार्द और कौमी एकता की मिसाल भी पेश करती है।

आजादी से पहले वर्ष 1920-21 से चली आ रही इस परंपरा का निर्वहन करते हुए इस बार थानाध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार और उनकी पत्नी नंदनी कुमारी ने मुख्य यजमान की भूमिका निभाई।

पंडित रंगवासी पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां काली, भगवान शिव और हनुमान जी की विधिवत पूजा-अर्चना कराई।

मुस्लिम थानेदार भी निभाते रहे परंपरा

थानेश्वर मंदिर की यह परंपरा सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों के अनुसार, लंबे समय में यहां कई मुस्लिम थाना प्रभारियों की भी पदस्थापना हुई, जिन्होंने इस पूजा में श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया।

इससे मंदिर की परंपरा धार्मिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का संदेश देती रही है। पुलिसकर्मियों में मान्यता है कि सावन की अंतिम सोमवारी पर बाबा भोलेनाथ की विशेष पूजा करने से पूरे वर्ष उनकी कृपा बनी रहती है।

इसी आस्था के कारण मंदिर की साफ-सफाई, रंग-रोगन और पूजा की तैयारियों से लेकर अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी भी पुलिसकर्मी स्वयं संभालते हैं।

पूजा के बाद हुआ भंडारा

पूजा-अर्चना के बाद शाम को मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण किया।

इस अवसर पर पूर्व मुखिया पंकज सिंह, छोटन चौबे समेत भटौली, रूपसागर, बुढैला, जीतवाडीह और अतिमी गांवों के दर्जनों ग्रामीण मौजूद रहे। पुलिस की ओर से निभाई जा रही इस परंपरा को लेकर स्थानीय लोगों में भी खासा उत्साह दिखा।