बिहार में करवा चौथ पर मौसम की मार, बादलों में छिप सकता है चांद; रात 7:57 बजे चंद्रोदय का समय
बिहार के बक्सर में करवा चौथ पर मौसम खराब होने से चांद के दर्शन में बाधा आ सकती है, जिससे व्रती महिलाओं को व्रत तोड़ने में परेशानी हो सकती है।

बिहार में करवा चौथ पर मौसम की मार, बादलों में छिप सकता है चांद (AI Generated Image)
HighLights
29 अक्टूबर को भारी बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान।
बादलों के कारण चंद्र दर्शन में आ सकती है बाधा।
चंद्र दर्शन न होने पर पंचांग अनुसार पूजा विधान।
जागरण संवाददाता, बक्सर। सुहाग की लंबी उम्र की कामना के साथ करवा चौथ का निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं की राह इस बार मौसम मुश्किल बना सकता है। गुरुवार, 29 अक्टूबर को करवा चौथ के दिन आसमान में बादलों का डेरा रहने और चांद के दर्शन में बाधा आने की आशंका है।
मौसम विज्ञान केंद्र, पटना की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार, 29 और 30 अक्टूबर को जिले में मेघगर्जन के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवा चलने और भारी वर्षा होने की संभावना है।
ऐसे में दिनभर निर्जला उपवास रखने वाली व्रती महिलाओं को रात में चंद्र दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान ने करवा चौथ की तैयारियों के बीच मौसम को लेकर चिंता बढ़ा दी है। आसमान में घने बादल छाए रहने या बारिश होने की स्थिति में चांद नजर आने में परेशानी हो सकती है।
करवा चौथ पर चंद्र दर्शन के बाद ही व्रती महिलाएं अर्घ्य देकर व्रत का पारण करती हैं। ऐसे में मौसम की अनिश्चितता के बीच चंद्रोदय के समय और पूजा की परंपरा को लेकर महिलाओं की उत्सुकता बढ़ गई है।
चन्द्र दर्शन न हो तो क्या करें:
आचार्य अमरेंद्र कुमार शास्त्री के अनुसार, यदि बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई नहीं देता है, तो पंचांग में बताए गए समय के बाद चंद्रमा का ध्यान कर अर्घ्य देने की रस्म पूरी की जा सकती है।
इसके बाद व्रत पारण की परंपरा निभाई जा सकती है। ऐसे में बादलों के कारण चंद्र दर्शन नहीं होने पर महिलाओं को अनावश्यक रूप से परेशान होने के बजाय पंचांग और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा-विधान पूरा करना चाहिए।
रात 7:57 बजे चंद्रोदय का समय:
वाराणसी पंचांग के अनुसार, करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय रात 7:57 बजे बताया गया है। हालांकि, स्थानीय स्तर पर मौसम और बादलों की स्थिति के कारण चंद्रमा के प्रत्यक्ष दर्शन में देरी हो सकती है। इसलिए व्रती महिलाओं को निर्धारित समय के साथ आसमान की स्थिति पर भी नजर रखनी होगी।
