बक्सर : कोरोना में आर्थिक संकट से जूझ रहे ग्रामीणों को मनरेगा से रोजगार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिससे वे अपने गांव में ही रोजगार हासिल कर आर्थिक संकट दूर कर सकें। अच्छी बात यह है कि बक्सर सरकार की इस योजना पर खरा उतरा है। प्रति वर्ष मई माह में ग्रामीण विकास विभाग कार्यों व सृजित मानव दिवस के लक्ष्य और उस पर हुए कार्यों का आकलन करता है। इसमें बक्सर को लक्ष्य की प्राप्ति, ससमय भुगतान व कार्य के मूल्यांकन की जारी राज्यस्तरीय रैंकिग में दूसरा स्थान हसिल हुआ है।

ओवरऑल प्रदर्शन के आधार पर मामूली अंकों की बढ़त के साथ पूर्वी चंपारण को राज्य में पहला स्थान हासिल हुआ है। बक्सर को अव्वल जिले की सूची में लाने के लिए सभी 11 प्रखंडों के कुछ मनरेगा पदाधिकारीयो का विशेष सक्रियता रहा है। जिसमें खासतौर पर इटाढ़ी प्रखंड, मिले लक्ष्य से ऊपर लक्ष्य प्राप्ति कर जिले में अव्वल रहा। वही बक्सर व सिमरी प्रखण्ड जिले में सबसे निचले पायदान पर रहे। हालांकि, राज्य स्तरीय मूल्यांकन में पूर्वी चंपारण को कुल प्रतिशतता 67.45 प्राप्त है। वही अपने जिला की प्रतिशतता 67.15 है। कार्य सृजन में लक्ष्य से एक प्रतिशत ज्यादा की उपलब्धि

ग्रामीण कार्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार बक्सर जिले का मानव दिवस सृजन करने का लक्ष्य छह लाख 68 हजार कार्यदिवस था। मिले टारगेट से ऊपर 101 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की है। वही वर्कर टारगेट भी लक्ष्य से ऊपर रहा, जबकि मजदूरों का भुगतान भी सौ फीसद ससमय पूरा किया गया। कुछ कार्य में कम प्रतिशतता आने से जिले को दूसरा स्थान पर संतोष करना पड़ा। सृजित मानव दिवस के लक्ष्य में जिले में अव्वल रहा इटाढ़ी, बक्सर व सिमरी सबसे फिसड्डी

राज्य में मनरेगा के तहत मिले लक्ष्य की प्राप्ति पर दूसरे रैंकिग मिलने में ग्यारह प्रखण्डों में कुछ प्रखण्डों के मनरेगा पदाधिकारियों का विशेष सक्रियता से ही इस लक्ष्य की प्राप्ति हो सकी। जिले की बात की जाए तो इटाढ़ी प्रखंड इस मामले में अव्वल रहा। जिसने मिले लक्ष्य से दोगुना लक्ष्य की प्राप्ति की। इटाढ़ी को एक लाख चालीस हजार का लक्ष्य था लेकिन यहा पौने तीन लाख का लक्ष्य प्राप्ति की जिसको 205 प्रतिशतता प्राप्त हुए। वही दूसरे नम्बर पर चौगाई जिसने 134 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त किया। तीसरे पर चक्की जिसने 116 प्रतिशत, राजपुर चौथे पर 107 प्रतिशत, ब्रह्मपुर प्रखंड पांचवे पर 98 प्रतिशत, छठे पर चौसा, नवानगर सातवें, डुमरांव आठवा, केसठ नौवे पर मगर बक्सर व सिमरी सबसे निचले पायदान पर रहे। बक्सर ने 53 प्रतिशत व सिमरी ने 37 प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति की।

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लक्ष्य हसिल करना कोई बड़ी बात नहीं होती। कर्मी व अधिकारी लगन से काम करें तो लक्ष्य बखूबी पूरा हो जाता है। अब वे लोग चाहेंगे कि प्रदर्शन का यह आंकड़ा सतत बना रहे।

सज्जाद जहीर, कार्यक्रम पदाधिकारी, इटाढ़ी/राजपुर।

Edited By: Jagran