अनंत चतुर्दशी आज, कल से शुरू होगा पितृपक्ष; 10 अक्टूबर तक चलेंगे श्राद्ध कर्म, नोट करें शुभ मुहूर्त
भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर अनंत चतुर्दशी व्रत शुक्रवार को मनाया जाएगा, जिसके अगले दिन शनिवार से पितृपक्ष का आरंभ होगा और यह 10 अक्टूबर तक चलेगा।

अनंत चतुर्दशी के बाद शुरू होगा पितृपक्ष (AI Generated Image)
HighLights
अनंत चतुर्दशी के बाद 10 अक्टूबर तक पितृपक्ष चलेगा।
पितृपक्ष पूर्वजों के स्मरण और पारिवारिक एकजुटता का पर्व है।
श्राद्ध कर्म के लिए कुतप काल 11:31 से 12:36 शुभ।
जागरण संवाददाता, बक्सर। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर अनंत चतुर्दशी व्रत एवं भगवान विष्णु के पूजन की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस वर्ष अनंत चतुर्दशी का पर्व शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस अवसर पर घर-घर भगवान विष्णु की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके अगले दिन शनिवार से पितृपक्ष का आरंभ होगा।
27 सितंबर को प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। पितृपक्ष 10 अक्टूबर तक चलेगा। पितृपक्ष ऐसा अवसर है, जब नई पीढ़ी अपने पूर्वजों को याद करने के साथ उनके व्यक्तित्व और कृतित्व से परिचित होती है। यह परंपरा परिवार की जड़ों और पूर्वजों के योगदान को स्मरण करने का अवसर भी देती है।
श्राद्ध कर्म से जुड़े पुरोहितों ने वाराणसी से प्रकाशित महावीर पंचांग के हवाले से बताया कि श्राद्ध कर्म के लिए दिन में 11:31 बजे से 12:36 बजे तक का समय विशेष शुभ माना गया है। दिन के इस आठवें मुहूर्त को कुतप काल कहा जाता है।
आस्थावानों ने कहा, श्रद्धा और स्मरण का पर्व
कर्मकांडी अमरेंद्र कुमार शास्त्री के अनुसार, श्राद्ध कर्म श्रद्धा और स्मरण का पर्व है। समय या आर्थिक संसाधनों के अभाव में भी व्यक्ति आकाश की ओर मुख कर दोनों हाथों से पितरों का आवाहन कर उन्हें नमन कर सकता है।
उनके अनुसार, पितृपक्ष का एक उद्देश्य पारिवारिक एकजुटता और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता की भावना को बनाए रखना भी है।
शिक्षाविद् श्रीभगवान पांडेय का कहना है कि आधुनिक दौर में कई बच्चे श्राद्ध की परंपरा को अंधविश्वास से जोड़कर देखते हैं और इससे जुड़े सवाल करते हैं। ऐसे में पितृपक्ष पूर्वजों के बारे में नई पीढ़ी को जानकारी देने का अवसर भी है।
उन्होंने कहा कि कई बच्चों को अपने दादा-दादी और नाना-नानी तक के नाम की जानकारी नहीं होती। श्राद्ध की विभिन्न तिथियों पर पूर्वजों को याद कर उनके जीवन, व्यक्तित्व और योगदान से बच्चों को परिचित कराया जा सकता है।
सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी सह अधिवक्ता ईश्वर चंद्र शर्मा ने कहा कि श्राद्ध कर्म का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य दिवंगत पूर्वजों के आदर्शों और उनके कार्यों को परिवार के बीच जीवित रखना है। जिन पूर्वजों के योगदान से परिवार की नींव मजबूत हुई, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना इस परंपरा का महत्वपूर्ण पक्ष है।
प्रोफेसर राजेश कुमार के अनुसार, भारतीय समाज में अनेक सामाजिक और पारिवारिक परंपराओं को धार्मिक स्वरूप दिया गया, जिससे उनका निरंतर पालन होता रहे। श्राद्ध कर्म भी इसी परंपरा का एक हिस्सा है, जिसके माध्यम से पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों के प्रति जागरूकता बनी रहती है।
श्री रामेश्वरनाथ मंदिर के पुजारी विक्की बाबा अनुसार ज्योतिष परंपरा में पितृ दोष को कुंडली से जुड़े दोषों में एक माना जाता है। हालांकि, पितृपक्ष का व्यापक सामाजिक और पारिवारिक महत्व पूर्वजों के स्मरण, उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता और पारिवारिक परंपराओं के संरक्षण से भी जुड़ा है।
पितृपक्ष की तिथियां
- 27 सितंबर - प्रतिपदा श्राद्ध
- 28 सितंबर - द्वितीया श्राद्ध
- 29 सितंबर - तृतीया श्राद्ध
- 30 सितंबर - चतुर्थी श्राद्ध
- 1 अक्टूबर - पंचमी श्राद्ध
- 2 अक्टूबर - षष्ठी एवं सप्तमी श्राद्ध
- 3 अक्टूबर - अष्टमी श्राद्ध
- 4 अक्टूबर - नवमी श्राद्ध
- 5 अक्टूबर - दशमी श्राद्ध
- 6 अक्टूबर - एकादशी श्राद्ध
- 7 अक्टूबर - द्वादशी श्राद्ध
- 8 अक्टूबर - त्रयोदशी श्राद्ध
- 9 अक्टूबर - चतुर्दशी श्राद्ध
- 10 अक्टूबर - अमावस्या (पितृ विसर्जन)
साभार : महावीर पंचांग
