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VKSU की 5 हजार पीजी डिग्री में फिर गड़बड़ी, पहले CGPA गायब अब वर्ष में गलती; TRE-4 अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता

Published: Tue, 13 Oct 2026 06:01 PM (IST)

वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में पीजी सत्र 2018-20 की 5000 से अधिक डिग्रियों में पहले सीजीपीए और अब संशोधित प्रमाणपत्रों में उत्तीर्ण वर्ष गलत होने से छात्र परेशान हैं।

वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में पीजी की ड‍िग्री में गड़बड़ी। सांकेत‍िक तस्‍वीर

वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय में पीजी की ड‍िग्री में गड़बड़ी। सांकेत‍िक तस्‍वीर

HighLights

  1. वीकेएसयू की 5000 से अधिक पीजी डिग्रियों में त्रुटि।

  2. संशोधित प्रमाणपत्रों में भी उत्तीर्ण वर्ष गलत पाया गया।

  3. बीपीएससी टीआरई-4 आवेदन में छात्रों को परेशानी।

जागरण संवाददाता, आरा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय (VKSU) में स्नातकोत्तर (PG)की डिग्रियां जारी करने में लापरवाही का मामला सामने आया है।

पीजी सत्र 2018-20 के पांच हजार से अधिक छात्र-छात्राओं की मूल डिग्रियों में गड़बड़ी के बाद अब संशोधित प्रमाणपत्रों में भी त्रुटि सामने आ रही है।

पहले डिग्रियों में सीजीपीए अंकित नहीं था। अब परीक्षा उत्तीर्ण करने के वर्ष में ही अंतर मिला है। इससे डिग्री में सुधार कराने के लिए परीक्षा विभाग का चक्कर लगा रहे विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ गई है।

अब प्रमाणपत्र पर एक वर्ष आगे दर्ज है परीक्षा का वर्ष

पीजी सत्र 2018-20 के विद्यार्थियों की मूल डिग्रियों में सीजीपीए दर्ज नहीं होने पर छह माह पूर्व दो सौ से अधिक छात्र-छात्राओं ने परीक्षा नियंत्रक प्रो. लाल बाबू सिंह को आवेदन दिया था।

इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने त्रुटि दूर कर दोबारा प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया। विश्वविद्यालय प्रशासन आवेदन के आधार पर नई डिग्रियां छपवाकर विद्यार्थियों को उपलब्ध करा रहा है। लेकिन, संशोधित प्रमाणपत्रों में एक नई गड़बड़ी सामने आने से पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।

उत्तीर्ण वर्ष में त्रुटि से बढ़ी परेशानी

पीजी सत्र 2018-20 की परीक्षा वर्ष 2020 में आयोजित हुई थी और इसी वर्ष परिणाम भी जारी किया गया था। इसके बावजूद मूल प्रमाणपत्र पर परीक्षा उत्तीर्ण करने का वर्ष 2021 अंकित है।

छात्रा सुमन कुमारी ने बताया कि इस त्रुटि की शिकायत परीक्षा नियंत्रक प्रो. लाल बाबू सिंह से की गई है। विद्यार्थियों ने एजेंसी से डाटा में सुधार कर सही वर्ष के साथ मूल प्रमाणपत्र दोबारा जारी कराने की मांग की है।

परीक्षा विभाग की ओर से संबंधित एजेंसी से संपर्क किया गया तो एजेंसी ने बताया कि विश्वविद्यालय की ओर से भेजे गए डाटा के आधार पर ही मूल प्रमाणपत्र तैयार किए गए हैं।

इस पर एक छात्र ने अपने अंकपत्र की प्रति उपलब्ध कराई, जिसमें परीक्षा उत्तीर्ण करने का वर्ष 2020 दर्ज है। इसके बावजूद डिग्री में वर्ष 2021 अंकित होने से विश्वविद्यालय और एजेंसी के बीच डाटा की शुद्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

टीआरई-4 के आवेदन को लेकर बढ़ी चिंता

दूसरी ओर, विद्यार्थियों को बीपीएससी टीआरई-4 शिक्षक नियुक्ति परीक्षा के लिए आवेदन करना है। आवेदन की अंतिम तिथि 26 अक्टूबर है। ऐसे में प्रमाणपत्रों में त्रुटि के कारण अभ्यर्थियों को परेशानी होने की आशंका है।

विद्यार्थियों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन मामले में शीघ्र हस्तक्षेप करे और एजेंसी से समन्वय कर सही प्रमाणपत्र जारी कराए, ताकि आवेदन प्रक्रिया में उन्हें किसी तरह की बाधा का सामना नहीं करना पड़े।

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