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कोईलवर में बनेगा VKSU का नया परिसर, 2020 में हुआ था फैसला; अब मिलेगी 25 एकड़ जमीन

Published: Fri, 09 Oct 2026 03:30 PM (IST)

वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय (VKSU) के कोईलवर में नए परिसर के लिए 25 एकड़ जमीन आवंटित करने की प्रक्रिया तेज ...और पढ़ें

इसी स्‍थान पर बनेगा वीकेएसयू का नया कैंपस। जागरण

इसी स्‍थान पर बनेगा वीकेएसयू का नया कैंपस। जागरण

HighLights

  1. कोईलवर में वीकेएसयू के नए परिसर के लिए 25 एकड़ जमीन।

  2. नए परिसर में नर्सिंग और इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना।

  3. भोजपुर के छात्रों को रोजगारपरक शिक्षा के नए अवसर मिलेंगे।

जागरण संवाददाता, आरा। वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय (VKSU) के विस्तार की योजना आगे बढ़ने लगी है। कोईलवर में विश्वविद्यालय का नया परिसर विकसित करने के लिए 25 एकड़ जमीन आवंटित करने की पहल की गई है।

यहां नर्सिंग और इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी पाठ्यक्रम शुरू करने की योजना है। लोक भवन के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने भोजपुर के जिलाधिकारी को पत्र लिखा है।

उन्‍हें जमीन आवंटन की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है। जमीन मिलने से विश्वविद्यालय में नए शैक्षणिक संस्थान खोलने का रास्ता साफ हो सकता है।

मेडिकल काॅलेज की जमीन के बदले मिलनी है जमीन

दरअसल, विश्वविद्यालय के नूतन परिसर में मेडिकल काॅलेज की स्थापना के लिए 25 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया गया था।

इसके बदले में विश्वविद्यालय को कोईलवर मानसिक आरोग्यशाला के पास जमीन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, यह मामला लंबे समय से लंबित है।

लोक भवन के अपर मुख्य सचिव ने पत्र में कहा है कि मंत्रिमंडल के आठ फरवरी 2020 के निर्णय के अनुसार कोईलवर मानसिक आरोग्यशाला की 25 एकड़ जमीन वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय को सौंपी जानी थी।

विश्वविद्यालय के कुलसचिव की ओर से 12 अगस्त को भेजे गए अनुरोध पत्र पर संज्ञान लेते हुए राज्यपाल सचिवालय ने जिलाधिकारी से इस मामले में तेजी से कार्रवाई करने को कहा है।

कुलपति ने अगस्त में की थी पहल

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शैलेन्द्र कुमार चतुर्वेदी ने भी अगस्त में लोक भवन से जमीन आवंटित करने की मांग की थी। उनका उद्देश्य उपलब्ध जमीन पर नए शैक्षणिक संस्थान विकसित करना है।

प्रस्तावित परिसर में नर्सिंग और इंजीनियरिंग की पढ़ाई शुरू होने से भोजपुर सहित आसपास के जिलों के विद्यार्थियों को लाभ मिल सकता है। उन्हें इन पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों में जाने की मजबूरी कम होगी। 

रोजगारपरक शिक्षा के नए विकल्प मिल सकेंगे। हालांकि, जमीन आवंटित होने के बाद भी तकनीकी संस्थानों की स्थापना, भवन व अन्य सुविधाओं का विकास, शिक्षकों की नियुक्ति और संबंधित नियामक संस्थाओं से मान्यता लेने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।