आरा। दृष्टिहीन पत्नी मुन्नी देवी के बुढ़ापे का सहारा बनकर उनकी सेवा सुश्रुसा में रात दिन लगे किशुन साह को जब हर्निया की बीमारी का असह्य दर्द सताने लगा तो वयोवृद्ध दंपती को अपना जीवन भी बोझ लगने लगा था। ऐसे में निर्धन और लाचार मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आयुष्मान भारत के तहत हुए सफल ऑपरेशन से न केवल किशुन साह को जीवन दान मिला, बल्कि उनकी दृष्टिहीन पत्नी मुन्नी देवी को बाकी की जिदगी पति के सानिध्य में बीताने की उम्मीद भी फिर से जागृत हो गई। इस योजना के तहत निबंधित परिवार के सदस्यों के इलाज पर प्रति वर्ष पांच लाख रुपये खर्च का प्रावधान है। जिसके तहत अब मुन्नी देवी की आंखों का इलाज भी संभव हो सकेगा।

जानकारी के मुताबिक पटना जिले के पालीगंज थाना अंतर्गत बाली पाकड़ गांव निवासी किशुन साह शरीर थकने से पहले मेहनत मजदूरी कर अपनी तीन बेटियों की शादी पहले ही कर चुके थे। पर आमदनी कम होने के कारण दो बेटों को पढ़ाई पूरी नहीं करा सके थे। यही कारण था कि बुढ़ापा के करीब आने पर शरीर थकने के बाद दोनों बेटों राजेश और महेश को भी मजदूरी के काम में लगना पड़ा। पर, महंगाई की मार और जरूरत के मुताबिक बेटों को काम नहीं मिलने से किशुन साह के लिए परिवार चलाना मुश्किल साबित हो रहा था। कभी कभार काम मिलने के कारण मजदूरी के पैसे दोनों बेटों के खर्च के लिए ही काफी कम पड़ रहे थे। ऊपर से दृष्टिहीन हो चुकी मुन्नी देवी की सेवा सुश्रुसा की जिम्मेवारी भी अकेले किशुन साह को ही उठानी पड़ रही थी। इसी बीच तीन माह पहले मार्च 2019 में किशुन साह को पहले से हुई हर्निया की बीमारी अचानक तेज हो गई, जिसका असह्य दर्द भी जिदगी की अन्य मुश्किलों में शुमार हो गया। ऐसे में जिदगी से जूझ रहे माता-पिता का सहारा बनी उनकी मंझली बेटी रीना। जो अपने मजदूर पति अनिल कुमार के साथ आरा शहर के पावरगंज मुहल्ले में रहती है। पिता की बीमारी की जानकारी मिलते ही वह उन्हे अपने साथ आरा ले आई और सदर अस्पताल में उनका इलाज कराना शुरू किया। डॉक्टरों ने बताया कि ऑपरेशन के बिना इस बीमारी का इलाज संभव नहीं है। ऑपरेशन और उसपर आने वाले खर्च की जानकारी मिलने के बाद यह गरीब परिवार फिर सकते में आ गया।

सदर अस्पताल के प्रबंधक मनोज कुमार ने उन्हें आयुष्मान भारत योजना की जानकारी देने के साथ उनका निबंधन कराने में भी भरपूर सहयोग किया। जिसके बाद बीते सोमवार को शहर के नामचीन सर्जन डॉ. विकास सिंह ने उनका सफल ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के बाद किशुन साह की सेहत में हो रहे सुधार से उनके चेहरे पर आई चमक देखते बन रही थी। अस्पताल से विमुक्त होने के दौरान उन्होंने दैनिक जागरण को बताया कि ऑपरेशन तो दूर, दवा का खर्च उठाना तक मेरे बुते की बात नहीं थी। जबकि अस्पताल में इलाज के दौरान न तो डॉक्टर की फीस देनी पड़ी, न ही दवा के पैसे देने पड़े। अस्पताल में खाना-पीना भी मुफ्त में मिल रहा था। यही नहीं अस्पताल से विमुक्त होने के बाद पर्याप्त मात्रा में दवाएं भी मिली हैं और दृष्टिहीन पत्नी के इलाज का आश्वासन भी।

बता दें कि सदर अस्पताल में इस योजना के तहत सप्ताह भर में चार लाचार मरीजों का जटिल ऑपरेशन कराया जा चुका है। तीन दिन पहले मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बेलघाट गांव निवासी रामेश्वर प्रसाद की पुत्री खुशी कुमारी के अपेंडिक्स का ऑपरेशन भी डॉ. विकास सिंह ने किया था। जबकि दो अन्य ऑपरेशन डॉ. अरुण कुमार एवं डॉ. अमृता राय ने किया था। खुशी के पिता प्राइवेट गाड़ी चलाकर पत्नी समेत पांच बच्चों का भरण पोषण करते हैं। दो माह पहले जब उन्हें पता चला कि सबसे छोटी बेटी खुशी का अपेंडिक्स कराना है, तो उनके होश उड़ गए थे। कितु सदर अस्पताल के प्रबंधक की पहल पर आयुष्मान भारत योजना के तहत हुए सफल ऑपरेशन के बाद खुशी की जिदगी की खुशियां वापस लौट चुकी है।

Posted By: Jagran

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