आरा। वुशू खेल के क्षेत्र में नूतन कुमारी अब किसी परिचय की मोहताज नहीं। अंतरराष्ट्रीय वुशू खिलाड़ी नूतन ने अपने बुलंद हौसले, दृढ़ इच्छा शक्ति और बचपन से पिता के प्रोत्साहन की बदौलत देश-विदेश में दर्जनों सोना-चांदी-कांसा के मेडल जीत कर अलग पहचान बना ली है। वह अन्य खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। नूतन का अब एक ही सपना है कि वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में देश के लिए सोना जीते। करनी पड़ी काफी मशक्कत :

आरा के पूर्वी नवादा निवासी ट्रैक्टर मैकेनिक जितेन्द्र प्रसाद व कुंती देवी की तीन पुत्रियों व एक पुत्र में नूतन दूसरे नंबर पर है। आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार में पली-बढ़ी नूतन को प्रारंभ से ही परेशानियों का सामना करना पड़ा। वीर कुंवर सिंह स्टेडियम में प्रैक्टिस के दौरान असामाजिक तत्वों का सामना भी करना पड़ा। बावजूद मैकेनिक पिता के सहयोग व प्रोत्साहन से नूतन निरंतर प्रैक्टिस जारी रखते हुए आगे बढ़ती गई।

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बचपन से आज तक पिता का मिला प्रोत्साहन

आज मैं जो भी हूं उसमें सबसे अधिक भूमिका पापा की है। छोटी उम्र में ही पापा ने बाइक चलाना व स्केटिग सिखाया। मैं छोटी थी तो बहुत सीधी-साधी थी। बार-बार बच्चों से मार खाकर रोते हुए घर आती थी, तो पापा डांटते कि तुम मार खाकर क्यों आई? तुमने क्यों नहीं मारा? पापा का ये कहना मुझे बिगाड़ना नहीं बल्कि साहसी बनाना था। जब पड़ोसी व सगे-संबंधी लड़की के बिगड़ने की बात कहते थे, तब उनकी बातों की परवाह पापा नहीं करते थे और हमें हमेशा प्रोत्साहित करते थे। अपना काम छोड़कर हमें प्रैक्टिस के लिए और प्रतियोगिताओं में ले जाते थे।

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मध्य प्रदेश सरकार ने नूतन की प्रतिभा का कर चुका है सम्मान :

नूतन वुशू, कबड्डी, हॉकी, कराटे व ताइक्वांडों की कई प्रतियोगिता में बिहार का प्रतिनिधित्व करते हुए लगभग एक दर्जन से अधिक पुरस्कार प्राप्त की है। इसकी प्रतिभा का कद्र करते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने अपने खर्च पर भोपाल में इंटर कराने के साथ वर्ष 2008-2010 तक वुशू का विशेष प्रशिक्षण दिलवाया। वर्ष 2008 से लेकर अब तक कई राष्ट्रीय कैंपों में वह प्रशिक्षण ली है।

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कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में निभाई निर्णायक की भूमिका : नूतन ने जहां राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। वहीं वह कई प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका भी निभाई है। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में निर्णायक के रूप में बिहार का प्रतिनिधित्व की है। -------------------

बहुत अच्छा लगता है : जब नए खिलाड़ी मुझसे कहते हैं कि दीदी हम भी आपकी तरह आगे बढ़ना चाहते हैं और मेडल जीतना चाहते हैं तो बहुत अच्छा लगता है। वीर कुंवर सिंह स्टेडियम, आरा में प्रैक्टिस के दौरान एक बार एक अभिभावक अपनी बच्चियों के साथ मेरे पास आएं और बच्चियों से कहा, देखो ये नूतन दीदी हैं। इनसे तुम सीखो और इन्हीं की तरह बनो। अभिभावक की ये बात सुनकर काफी गर्व हुआ था।

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नूतन के नाम है कई उपलब्धियां : वर्ष 2008 में 7-14 जून तक बाली (इंडोनेशिया) में आयोजित सेकंड व‌र्ल्ड जूनियर वुशू चैंपियनशिप और वर्ष 2009 में 5-9 जून तक पांचवीं एशियन वुशू चैंपियनशिप, मकाउ(चाइना) में कांस्य पदक प्राप्त कर भारत का गौरव बढ़ाया। वह झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, केरल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश समेत अन्य प्रदेशों में आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ली है। अब तक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में दो कांस्य के अलावा राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में कुल 13 पदक प्राप्त की है, जिसमें में दस स्वर्ण, दो रजत और एक कांस्य पदक है। कराटे में ब्लैक बेल्ट और ताइक्वांडो में ग्रीन बेल्ट प्राप्त नूतन को अहसास हुआ कि वुशू खेल के माध्यम से देश का नाम रौशन किया जा सकता है, तब से वह अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भारत के लिए स्वर्ण पदक प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है। अब तक खेल दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री खेल सम्मान समारोह में चार बार पुरस्कृत हो चुकी है।

Posted By: Jagran

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