Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा पर चांदनी रात में सजेगी अमृत खीर वाली थाली, पीपल की छाल मिलाने का है विधान
शाहपुर में शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की पुरानी परंपरा है, जिसे अमृत तुल्य माना जाता ...और पढ़ें

शरद पूर्णिमा (एआई जेनरेटेड तस्वीर)
HighLights
शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा।
माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं, सुख-समृद्धि देती हैं।
पीपल की छाल मिलाकर खीर को अमृत तुल्य मानते हैं लोग।
संवाद सूत्र, शाहपुर (आरा)। हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृतमयी किरणें बिखेरता है। इसी विश्वास के साथ लोग दूध और चावल से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे चंद्रमा की रोशनी में रखते हैं।
देर रात तक चांदनी में रखने के बाद खीर को प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है। क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को लेकर लोगों में विशेष उत्साह रहता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। इस दिन विधि-विधान से माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करने से सुख-समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि कई घरों में शाम से ही पूजा की तैयारी शुरू हो जाती है। दूध और चावल से खीर बनाई जाती है और उसे चंद्रमा की रोशनी में रखकर सुबह या देर रात प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।
चांदनी में रखी खीर खाते हैं लोग
शाहपुर के उमेश चंद्र पांडे और रतनपुरा के राजकिशोर सिंह बताते हैं कि वे पिछले कई वर्षों से शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की रोशनी में खीर रखकर उसका सेवन करते हैं। उनके अनुसार, खीर बनाने व खाने की विधि पर भी विशेष ध्यान दिया जाता हैं।
उमेश चंद्र पांडे के अनुसार खीर में पीपल के छाल को सुखा कर उसका पाउडर बना लिया जाता है और उसे आवश्यकता अनुसार खीर में मिला कर सेवन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं में इस खीर को अमृत तुल्य माना जाता है।
वहीं, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से दूध और चावल से बनी खीर पौष्टिक आहार है, लेकिन चंद्रमा की रोशनी में रखने से इसके औषधीय गुण बढ़ने या असाध्य रोगों के ठीक होने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। इसके बावजूद शरद पूर्णिमा की रात चांदनी में खीर रखने की परंपरा आज भी लोगों की आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।
