भोजपुर के शाहपुर में मटर छेमी की जबरदस्त बुआई, किसानों को दिसंबर में बंपर मुनाफे की उम्मीद
शाहपुर प्रखंड में मटर छेमी की खेती ने रफ्तार पकड़ी है, अनुमानित तीन हजार एकड़ में बुआई हुई है। अनुकूल ...और पढ़ें

भोजपुर के शाहपुर में मटर छेमी की जबरदस्त बुआई, किसानों को दिसंबर में बंपर मुनाफे की उम्मीद
HighLights
शाहपुर में तीन हजार एकड़ में मटर छेमी की बुआई।
दिसंबर में अच्छी कीमत मिलने की उम्मीद से किसान खुश।
उन्नत बीज और कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर जोर।
संवाद सूत्र, शाहपुर (आरा)। प्रखंड क्षेत्र में मटर छेमी की खेती ने रफ्तार पकड़ ली है। बुआई का अनुकूल समय देखते हुए किसान खेतों में जुट गए हैं। पिछले दो सप्ताह के दौरान करीब तीन हजार एकड़ में मटर छेमी की बुआई किए जाने का अनुमान है। कुछ खेतों में तो मटर के बीज अब अंकुरित भी हो चले हैं।
इस बार बाढ़ का पानी समय से निकल जाने और हस्त नक्षत्र में वर्षा नहीं होने से किसानों को निर्धारित समय पर खेती शुरू करने का मौका मिला है। ऐसे में छेमी की अगात फसल तैयार होने और बाजार में बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद से किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।
किसानों के अनुसार, जिस समय छेमी की फसल तैयार होकर बाजार में पहुंचेगी, उस समय इसकी कीमत 60 से 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक रहने की संभावना है। बताया जा रहा है कि दिसंबर के पहले सप्ताह में मटर छेमी तैयार हो जाएगी। उसी समय लगन भी रहेगा।
यही वजह है कि किसान समय से बुआई पूरी करने के साथ उन्नत किस्मों के बीज की खरीदारी पर भी जोर दे रहे हैं। स्थानीय बाजारों के अलावा दूसरे जिलों की मंडियों से भी बीज मंगाए जा रहे हैं। मटर छेमी की बेहतर पैदावार के लिए किसान प्रमाणित और उन्नत बीजों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
क्षेत्र के कुछ किसान उत्तर प्रदेश के बनारस, इटावा, कानपुर और आगरा तक से बीज मंगाते हैं। हालांकि, कभी-कभी बीज की गुणवत्ता उम्मीद के अनुरूप नहीं मिलने से किसानों को नुकसान भी उठाना पड़ता है।
इसके बावजूद करीब 90 प्रतिशत किसान आसपास के बीज विक्रेताओं से ही विभिन्न प्रजातियों के बीज खरीदते हैं। बीज बाजार में हरिभजन, काशी उदय, एम-7, मरचइया और पीसीएम प्रजातियों की मांग अधिक है। किसानों के मुताबिक हरिभजन प्रजाति की छेमी करीब 45 दिनों में तैयार हो जाती है।
इन पंचायतों में बड़े पैमाने पर होती है खेती
शाहपुर प्रखंड के सहजौली, सुहिया, बरिसवन, बहोरनपुर, हरिहरपुर, प्रसौंडा, देवमलपुर, खुटहा, भरौली, डुमरिया और झौवां-बेलवनिया पंचायतों में मटर छेमी की खेती बड़े पैमाने पर होती है। खासकर धर्मावती नदी के आसपास, सुहिया भागड़ और दियारा क्षेत्र में इसकी व्यापक खेती की जाती है।
इन इलाकों में करीब दो से तीन हजार एकड़ में मटर छेमी की विभिन्न प्रजातियां उगाई जाती हैं। खेती के बड़े दायरे के कारण शाहपुर क्षेत्र को मटर छेमी के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में गिना जाता है।
बीज के साथ उर्वरकों की मांग भी बढ़ी
कृषि वैज्ञानिक डा. प्रवीण कुमार द्विवेदी ने बताया कि मटर छेमी की बुवाई से पहले किसानों को 18 घंटे पहले बीजोपचार कर लेना चाहिए।
साथ ही प्रति कट्ठा डेढ़ किलोग्राम डीएपी, आधा किलोग्राम पोटाश व आधा किलोग्राम दानेदार सल्फर अवश्य देना चाहिए। अच्छे उत्पादन के लिए बुवाई के दो दिनों के बाद खेतों में खरपतवार नाशी दवाओं का छिड़काव जरूर करना चाहिए।
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