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रिटायर्ड सूबेदार के बेटे ने बढ़ाया मान; NDA में टॉप रैंक के साथ भोजपुर के सक्षम बने सेना अधिकारी

Published: Sun, 31 May 2026 03:57 PM (IST)

भोजपुर जिले के जमालपुर गांव के सक्षम राज ने एनडीए में 23वीं रैंक हासिल कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का ...और पढ़ें

प‍िता और चाचा के साथ सक्षम। सौ-स्‍वजन

प‍िता और चाचा के साथ सक्षम। सौ-स्‍वजन

HighLights

  1. सक्षम राज ने एनडीए में 23वीं रैंक हासिल की।

  2. भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट का पद प्राप्त किया।

  3. भोजपुर जिले के जमालपुर गांव का नाम रोशन किया।

पंचायत सूत्र, जमालपुर (कोईलवर)। कहते हैं कि सपने वही सच होते हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए दिन-रात मेहनत की जाए।

भोजपुर जिले के कोईलवर प्रखंड के छोटे से गांव जमालपुर के बेटे सक्षम राज ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है।

अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (एनडीए) में 23वीं रैंक हासिल कर भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट बनने का गौरव प्राप्त किया है।

महाराष्ट्र के पुणे में आयोजित 150वें कोर्स की पासिंग आउट परेड के साथ सक्षम का सैन्य प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा हुआ।

बचपन से अनुशासि‍त और लक्ष्‍य के प्रत‍ि समर्पित

जैसे ही उनके चयन की खबर गांव पहुंची, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों ने मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी जाहिर की और सक्षम की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया।

सक्षम राज रिटायर्ड सूबेदार विकास कुमार सिंह और बबिता सिंह के पुत्र हैं। सैन्य पृष्ठभूमि वाले परिवार में पले-बढ़े सक्षम ने बचपन से ही अनुशासन और देशसेवा के संस्कार सीखे।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा आर्मी पब्लिक स्कूल, दानापुर में हुई। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने अपने लक्ष्य पर लगातार फोकस बनाए रखा और कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचे।

एनडीए जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में देशभर के लाखों युवाओं के बीच 23वीं रैंक हासिल करना उनकी असाधारण प्रतिभा और मेहनत का प्रमाण है। यह उपलब्धि केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भोजपुर जिले के लिए गर्व का विषय है।

बेटे की सफलता पर गर्व

पासिंग आउट परेड के दौरान उनके माता-पिता और बड़े पापा भी मौजूद रहे। बेटे को सैन्य वर्दी में देशसेवा की शपथ लेते देख परिवार की आंखें गर्व से नम हो गईं। यह पल उनके वर्षों के संघर्ष, त्याग और सपनों के साकार होने का प्रतीक बन गया।

सक्षम की सफलता आज के युवाओं के लिए एक मजबूत संदेश है कि सीमित संसाधन कभी भी बड़े सपनों की राह में बाधा नहीं बनते।

यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत ईमानदार हो और आत्मविश्वास मजबूत हो, तो गांव की गलियों से निकलकर भी देश के सर्वोच्च संस्थानों तक पहुंचा जा सकता है।

जमालपुर का यह युवा अब भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करेगा। उसकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी कि मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर हर सपना हासिल किया जा सकता है।

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