आरा। शाहपुर प्रखंड के 20 पंचायतों की मतगणना मंगलवार को हुई, जिसमें भारी उलट-फेर देखने को मिला। 20 पंचायतों में से 18 में जनता ने नए चेहरे पर भरोसा जताया और उन्हें मुखिया का ताज पहनाया। केवल दो निवर्तमान मुखिया ही अपनी साख बचाने में कामयाब रहे। निवर्तमान प्रतिनिधियों में ईश्वरपूरा पंचायत की मुखिया मानकी देवी तथा हरिहरपुर पंचायत के मुखिया उर्मिला देवी जनता का विश्वास हासिल करने में सफल रहीं।

कोई भी पुरुष मुखिया का जनता की अदालत में नही जीत सके। शाहपुर में पंचायत चुनाव में डाले गए वोटों के मतगणना के बाद कई पंचायतों के निजाम बदल गई। बदले निजाम में नई सरकार बनेगी। जीत कर जो नए चेहरे सामने आये है। कुछ नवनिर्वाचित मुखियों ने पूर्व में असफल होने के बाद इसबार चुनाव जीतने के सफल हुए। कुछ निवर्तमान मुखियो ने चुनाव नही लड़ा। लेकिन अपनी विरासत को घरवालों के हवाले कर दिया। जिसमें भरौली पंचायत की नवनिर्वाचित मुखिया दिव्या मिश्रा की जेठानी मालती मिश्रा और प्रसौन्डा की निवर्तमान मुखिया सहोदरी देवी भी चुनावी समर से बाहर रही। लेकिन उनकी पुत्रबधू गिरजा देवी ने मुखिया पद पर कब्जा किया। पंचायत चुनाव: शाहपुर में सास और बहू एक साथ हुई निर्वाचित

आरा: शाहपुर प्रखंड के प्रसौंडा पंचायत से दो अलग-अलग सीटों पर सास एवंहू दोनों निर्वाचित हो गई। जेल से जमानत पर छूटे शिवाजीत मिश्रा की पत्नी गिरजा देवी मुखिया एवं बहू संगीता देवी पति ब्रजेश मिश्रा पंचायत समिति सदस्य पद से इस बार चुनाव लड़ी थी। मंगलवार को चुनाव परिणाम आते ही शिवाजीत समर्थक झूम उठे। सास व बहू का एक साथ विजय जुलूस निकला। दोनों ने एक ही दिन नामांकन भी किया था। पूर्व में शिवाजीत मिश्रा की मां सहोदरी देवी 15 साल मुखिया रही थी। जबकि, पत्नी पंचायत समिति सदस्य रही थी। इस बार पत्नी गिरजा देवी मुखिया उम्मीदवार थी और जीत भी दर्ज की। ब्रजेश मिश्रा जेल में बंद है।

------ प्रखंड उपप्रमुख चुनाव जीते, प्रमुख की बहू हारी शाहपुर: शाहपुर के प्रखंड उप प्रमुख रहे पंचायत समिति सदस्य संतोष पासवान ने चुनाव जीत दर्ज करने में सफल रहे। उन्होंने हरिहरपुर पंचायत के पंचायत समिति सदस्य पद पर अपने प्रतिद्वंदी शंभू प्रसाद को 78 वोटों हराकर अपना अपना सीट बरकरार रखा। हांलाकि, प्रखंड उर्मिला देवी इसबार चुनावी मैदान से बाहर थी। लेकिन, उनकी पुत्रबधू उनकी विरासत को नही संभाल सकी। उन्हें गौरा पंचायत के पंचायत समिति सदस्य पद पर पराजय का मुंह देखना पड़ा।

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