विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

अधूरी रह गई ताड़ी पीने की इच्छा, नाना पाटेकर ने बिहार के आरा में बताई थी अपने मन की बात

Published: Thu, 08 Oct 2026 05:37 PM (IST)

अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया, जिससे पूरा देश स्तब्ध है।

कोरोना काल में कोईलवर पहुंचे थे नाना पाटेकर। (जागरण)

कोरोना काल में कोईलवर पहुंचे थे नाना पाटेकर। (जागरण)

HighLights

  1. नाना पाटेकर का 75 वर्ष की आयु में निधन, देश स्तब्ध।

  2. कोईलवर में लगाए थे आम और आंवले के पौधे, पर्यावरण संदेश।

  3. जवानों का हौसला बढ़ाया और सुशांत सिंह राजपूत को याद किया।

नीरज कुमार, कोईलवर(आरा)। सिनेमा के पर्दे पर अपने दमदार संवाद और अभिनय से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले अभिनेता नाना पाटेकर अब हमारे बीच नहीं रहे।

गुरुवार की सुबह 75 वर्ष की उम्र में उनके निधन की खबर ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया। आरा से उनकी यादें गहराई से जुड़ी हैं।

कोरोना के समय में कोईलवर आए थे और पर्यवरण एवं हरियाली का महत्व समझा गए थे। कोईलवर के तत्कालीन केंद्रीय रिजर्व सुरक्षा बल के कमांड मुख्यालय परिसर में उनके हाथों लगाए गए आम और आंवले के पौधे आज पेड़ बन चुके हैं। ये पेड़ नाना की उस सोच और संवेदना की गवाही दे रहे हैं, जिसमें प्रकृति और इंसान दोनों के लिए प्रेम था।

28 जून 2020 को नाना पाटेकर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 47वीं वाहिनी के कोईलवर स्थित मुख्यालय पहुंचे थे। कोरोना संक्रमण के दौर में जवानों और किसानों के बीच पहुंचे नाना ने लोगों का हौसला बढ़ाया था।

उन्होंने आम और आंवले के पौधे लगाए और पौधारोपण की उपयोगिता बताते हुए कहा था कि पेड़-पौधे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। उनका संदेश था कि प्रकृति बचेगी, तभी मानव जीवन भी सुरक्षित रहेगा। उस समय नाना ने किसानों और जवानों को देश का बड़ा हितैषी बताते हुए उनके योगदान की सराहना की थी।

कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर लोगों से शारीरिक दूरी बनाए रखने और मास्क का इस्तेमाल करने की अपील भी की थी।

जवानों से मिल बढ़ाया था उत्साह

सीआरपीएफ कैंप में जवानों से मिलकर उन्होंने उनका उत्साह बढ़ाया था। नाना पाटेकर के कोईलवर आगमन के दौरान बिहार सेक्टर के तत्कालीन आईजी, डीआईजी, 47वीं वाहिनी के तत्कालीन कमांडेंट भूपेश यादव ने उन्हें शॉल और बुके देकर सम्मानित किया था।

सुशांत की याद में छलका था दर्द

कोईलवर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान नाना पाटेकर ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत को भी याद किया था। उन्होंने कहा था कि सुशांत बेहद प्यारा बच्चा था और उसके जाने से उन्हें गहरा दुख हुआ है।

उन्होंने सुशांत को अपने बेटे के समान बताया था। नाना की बातों में एक वरिष्ठ कलाकार का अपने युवा साथी के लिए स्नेह और अपनापन साफ झलक रहा था।

संवाद आज भी लोगों की जुबान पर जवानों के बीच नाना पाटेकर ने अपनी चर्चित फिल्म क्रांतिवीर के संवाद भी सुनाए थे। उनके संवादों ने जवानों में जोश भर दिया था।

'ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून... बता इसमें मुसलमान का कौन सा, हिंदू का कौन सा...' जैसे संवादों से उन्होंने सामाजिक एकता का संदेश दिया था।

'आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने..' और 'सौ में से अस्सी बेईमान, फिर भी मेरा भारत महान...' जैसे संवाद भी उनकी पहचान बन चुके हैं।

ताड़ी पीने की जताई थी इच्छा

कोईलवर के रमेश सिंह कहते हैं कि बातचीत के दौरान उन्होंने बिहार की मिट्टी और यहां की देसी परंपराओं में भी अपनी दिलचस्पी दिखाई थी।

बिहार की प्रचलित ताड़ी और नीरा का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे पीने की इच्छा जताई थी। उनकी यह सहज और बेबाक बात वहां मौजूद लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई थी।

यह भी पढ़ें- पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए 13 साल की उम्र में किया काम, जानें कितने पढ़े-लिखे थे नाना पाटेकर