आरा। एक- दो वर्षों का नहीं, बल्कि 15 साल का लेखा जोखा है, जब भोजपुर का संपूर्ण भाग मई में गंभीर जल संकट में फंस जाता था। चाहे शहर हो या देहात सभी जगह लोग पानी के लिए भटकते रहते थे। चापाकल और कुआं जबाब दे देते थे। पशु- पक्षी तक अपनी प्यास को बुझाने के लिए आहर, पोखर और तलाबों में पानी के लिए भटकते फिरते थे। लेकिन आज परिस्थतियां इसके उलट है। चापाकल का लेयर मेंटेंन है। पानी बरसात के दिनों की तरह निकल रहा है, कुआं भी भरा हुआ है। आहर, पोखर और तालाब में पानी सामान्य दिनों की तरह दिख रहा है। यह सब कोरोन काल में हुआ है। लोग एक तरफ कोरोना से जुझ रहे हैं तो दूसरी तरफ प्रकृति ने साथ देकर पानी के गंभीर संकट से उबारा है। भोजपुर के इतिहास में पिछले 15 वर्षों से अप्रैल से पेय जल संकट शुरू हो जाता था और मई आते- आते गंभीर हो जाता था। भू-गर्भीय जल स्तर 10 से 15 फीट नीचे चला जाता था, लेकिन कोरोना काल में जल स्तर में कोई गिरावट दर्ज नहीं की गई है। कुआं से लेकर चापाकल के साथ-साथ आहर- पोखर, ताल- और तलैया का पानी इस वर्ष नहीं सुखा है। इन जगहों पर पानी भरा हुआ है। पशु-पक्षी से लेकर जानवरों तक को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। इन्हें सभी जगहों पर प्यास बुझाने के लिए पानी मिल रहा। भोजपुर में वर्ष 2019 की तुलना में इस वर्ष मई में सामान्यत: भूगर्भीय जल स्तर तीन फीट बढ़ा हुआ है, जिसके कारण कहीं भी पेयजल संकट की नौबत नहीं आई है।

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बाक्स

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भोजपुर में जलस्तर मई माह में

प्रखंड जलस्तर जलस्तर

2020 2019

अगिआंव 23'-04इंच 20'-02इंच;

आरा 26'-08 इंच; 21'-07 इंच;

संदेश 29'-04 इंच; 21'-06इंच;

शाहपुर 20'-03इंच; 21'-03इंच;;

पीरो 13'-04इंच; 12'-10इंच;

कोईलवर 29'-10इंच; 25'-08इंच;

जगदीशपुर 17'-07इंच;; 16'-09इंच;

बड़हरा 27'-04इंच; 22'-05इंच;;

बिहिया 22'-05इंच; 20'-05इंच;;

गड़हनी 17'-00इंच; 18'-03इंच;;

चरपोखरी 18'-08इंच; 16'-08इंच;;

तरारी 18'-05इंच; 20'-05इंच;

उदवंतनगर 27'-07इंच; 21'-01इंच;

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बाक्स

----------- भोजपुर में इस वर्ष कहीं भी पेयजल संकट नहीं है। लोग स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग की टीम गांव-गांव में पहुंचकर आंशिक रूप से खराब पड़े चापाकलों को दुरुस्त कर रही है। जिले में अब तक 2000 चापाकलों को ठीक कर चालू कर दिया गया है। शहर से लेकर देहात तक कहीं भी भू-गर्भीय जलस्तर नहीं खिसका है। वर्ष 2019 की तुलना में भोजपुर में सामान्यत: तीन फीट जल स्तर बढ़ा है। जिसके कारण जिले के किसी भी क्षेत्र में पेयजल संकट की स्थिति नहीं है।

रामचंद्र,

कार्यपालक अभियंता

लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण,

प्रमंडल आरा।

Posted By: Jagran

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