गांव के स्कूल से पढ़ाई, NEET में सफलता; आरा की दो बहनों ने डॉक्टर बनकर रचा इतिहास
शाहपुर के दिलमनपुर गांव की ज्योति और चांदनी पांडे ने सीमित संसाधनों के बावजूद NEET में सफलता हासिल कर डॉक्टर ...और पढ़ें

सीमित संसाधनों के बीच हासिल की बड़ी सफलता
HighLights
ज्योति पांडे ने एमडी मेडिसिन की डिग्री हासिल की।
चांदनी पांडे एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर रही हैं।
सीमित संसाधनों में NEET परीक्षा में सफलता पाई।
दिलीप कुमार ओझा, शाहपुर (भोजपुर)। ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ीं दो बहनों ने अपनी मेहनत और मजबूत इरादे से ऐसा मुकाम हासिल किया है, जो पूरे गांव के लिए गर्व की बात है। शाहपुर प्रखंड के सुदूर दियारा क्षेत्र के छोटे से गांव दिलमनपुर की रहने वाली ज्योति पांडे और चांदनी पांडे ने मेडिकल क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है।
दोनों बहनों ने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव के ही विद्यालयों से की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने NEET जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल की और डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया। उनकी उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे इलाके में खुशी का माहौल है।
गांव के स्कूल से पढ़ाई, फिर मेडिकल की राह
दिलमनपुर निवासी धनंजय पांडे और मंजू देवी की बड़ी बेटी ज्योति पांडे ने गांव के माहौल में रहते हुए अपनी पढ़ाई शुरू की। मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने वर्ष 2018 में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की।
NEET में उनकी रैंक 38411 रही थी। इसके बाद उन्होंने मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया। लगातार मेहनत करते हुए उन्होंने वर्ष 2025 में एमडी मेडिसिन की पढ़ाई पूरी कर ली।
ज्योति ने हासिल की एमडी मेडिसिन की डिग्री
ज्योति पांडे ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, हरदोई से एमडी मेडिसिन की डिग्री हासिल की है। ग्रामीण क्षेत्र से निकलकर विशेषज्ञ चिकित्सक बनने तक का उनका सफर आसान नहीं था।
लेकिन परिवार के सहयोग और अपने लक्ष्य के प्रति समर्पण ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आज उनकी उपलब्धि परिवार के लिए गौरव का विषय है। ज्योति की सफलता ने गांव की दूसरी बेटियों के सामने भी एक नई मिसाल पेश की है।
छोटी बहन चांदनी भी डॉक्टर बनने के करीब
बड़ी बहन ज्योति के बाद छोटी बहन चांदनी पांडे ने भी मेडिकल क्षेत्र में कदम रखा। चांदनी ने वर्ष 2022 में NEET परीक्षा में 41223 रैंक हासिल की।
इसके बाद उन्हें एमबीबीएस में प्रवेश मिला। वह अब अपनी मेडिकल पढ़ाई पूरी करने के अंतिम चरण में हैं। बताया गया है कि करीब पांच महीने के भीतर वह एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर लेंगी।
सीमित संसाधनों के बीच हासिल की बड़ी सफलता
दोनों बहनों की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने अपनी शिक्षा की शुरुआत ग्रामीण परिवेश और गांव के विद्यालयों से की। बड़े शहरों की सुविधाओं के बिना भी उन्होंने अपने लक्ष्य को लेकर कोई समझौता नहीं किया। पढ़ाई के दौरान मेहनत, लगन और परिवार के प्रोत्साहन को उन्होंने अपनी ताकत बनाया। यही वजह है कि दोनों बहनें आज मेडिकल क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना रही हैं।
गांव की बेटियों के लिए बनीं प्रेरणा
ज्योति और चांदनी की सफलता से दिलमनपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों के लोग भी गौरवान्वित हैं। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाली बेटियों के लिए दोनों बहनों की उपलब्धि एक बड़ी प्रेरणा बन गई है।
उनकी कहानी यह बताती है कि सफलता के लिए केवल बड़े शहर और महंगे संसाधन ही जरूरी नहीं हैं। अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रहे तो गांव से निकलकर भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं।
माता-पिता का सपना हुआ साकार
बेटियों की सफलता से माता-पिता धनंजय पांडे और मंजू देवी बेहद खुश हैं। उन्होंने अपनी बेटियों की पढ़ाई के दौरान उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
आज एक बेटी एमडी मेडिसिन की डिग्री हासिल कर डॉक्टर बन चुकी है, जबकि दूसरी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के करीब है। दोनों की उपलब्धि ने परिवार के सपने को साकार करने के साथ पूरे गांव का मान भी बढ़ाया है।
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