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बिहार के 115 साल पुराने मंदिर में चोरी, अष्टधातु की मूर्तियों के साथ CCTV की हार्ड डिस्क भी ले गए चोर

Published: Sun, 12 Jul 2026 09:46 PM (IST)

भोजपुर के पीरो स्थित ऐतिहासिक राम-जानकी मंदिर से शनिवार रात राम, सीता और लक्ष्मण की अष्टधातु की बहुमूल्य प्रतिमाएं चोरी हो गईं। चोर सीसीटीवी की हार्ड डिस्क भी ले गए।

अष्टधातु की मूर्तियां। फोटो जागरण

अष्टधातु की मूर्तियां। फोटो जागरण

HighLights

  1. भोजपुर के पीरो मंदिर से राम-जानकी प्रतिमाएं चोरी।

  2. चोर सीसीटीवी हार्ड डिस्क भी साथ ले गए।

  3. ग्रामीणों ने मंदिर सुरक्षा और गिरफ्तारी की मांग की।

संवाद सहयोगी, पीरो (आरा)। भोजपुर जिले के अगिआंव बाजार थाना क्षेत्र के लहठान पंचायत स्थित पीटरो गांव के ऐतिहासिक राम-जानकी मंदिर से शनिवार की देर रात अज्ञात चोर भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की बहुमूल्य प्रतिमाएं चोरी कर फरार हो गए।

चोर जाते-जाते मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे की हार्ड डिस्क भी अपने साथ ले गए, जिससे घटना के साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई जा रही है।

चोरी गई मूर्तियां अष्टधातु की बताई जा रही है। घटना के बाद पूरे गांव में आक्रोश का माहौल है। जानकारी के अनुसार वर्ष 1911 में स्थापित यह मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है।

सोमवार रात करीब नौ बजे मंदिर के महंत रामसूरत सिंह प्रतिदिन की तरह पूजा-अर्चना के बाद मंदिर बंद कर घर चले गए थे।

रविवार तड़के करीब तीन बजे पुजारी पूजा करने पहुंचे तो गर्भगृह का बाहरी कुंडी खुला मिला। अंदर जाने पर देखा कि चोरों ने पहले कटर से दरवाजा काटने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहने पर लोहे की रॉड से दरवाजा उखाड़ दिया। इसके बाद भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण की प्रतिमाओं के साथ सीसीटीवी की हार्ड डिस्क भी चोरी कर ली।

पीरो सर्किल इंस्पेक्टर राजीव रंजन ने घटनास्थल पर पहुंचकर जांच की। पीरो के प्रभारी इंस्पेक्टर स्नेह सेतु ने बताया कि पुलिस सभी तकनीकी साक्ष्य जुटाने में लगी है। एफएसएल की टीम घटनास्थल से आवश्यक साक्ष्य और नमूने एकत्र कर चुकी है।

मामले की वैज्ञानिक एवं तकनीकी जांच जारी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

पूर्व में भी मंदिर को निशाना बना चुके है चोर

यह पहली बार नहीं है जब इस मंदिर को निशाना बनाया गया है। इससे पहले 14 मई 2013 को भी मंदिर से प्रतिमाएं चोरी हुई थीं। उस दौरान चोरी का विरोध करने पर तत्कालीन महंत शिवबचन दास की हत्या कर दी गई थी।

घटना के तीन दिन बाद 17 मई 2013 को जमनीपुर बेना गांव के बधार में भूसे के ढेर से प्रतिमाएं बरामद हुई थीं। पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए हत्या और प्रतिमा चोरी में शामिल आरोपितों को गिरफ्तार किया था। बाद में वर्ष 2019 में तत्कालीन मुखिया ओमप्रकाश सिंह ने न्यायालय से प्रतिमाओं को रिलीज कराकर वैदिक रीति-रिवाज से पुनः प्राण-प्रतिष्ठा कराई थी।

वहीं,वर्ष 2025 में भी चोर प्रतिमाएं चुराकर भाग रहे थे, लेकिन पास में क्रिकेट खेल रहे बच्चों की नजर पड़ने पर पकड़े जाने के डर से प्रतिमाएं छोड़कर फरार हो गए थे।

इधर, घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रतिमाओं की शीघ्र बरामदगी, अपराधियों की गिरफ्तारी तथा मंदिर की स्थायी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

महंत हत्याकांड में हुई थी सजा

महंत शिवबचन दास हत्याकांड में छह पर नामजद आरोपित बनाया गया था। इनमें शौकत अंसारी, सुरेश पासवान, बड़क पासवान और बिनायक पाठक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

वर्तमान में वे उच्च न्यायालय से जमानत पर हैं। सत्यनारायण पासवान और शिवजी यादव की गिरफ्तारी घटना के करीब दो वर्ष बाद हुई थी, जबकि बाद में शिवजी यादव की मृत्यु हो गई थी।

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