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भोजपुर में मानसून की विदाई: जून-अगस्त में कमी, सितंबर में राहत की बारिश से फसलों को फायदा

Published: Fri, 16 Oct 2026 04:03 PM (GMT+05:30)

भोजपुर से मानसून 15 अक्टूबर को विदा हो गया, जिसने इस साल वर्षा के उतार-चढ़ाव देखे। जून से अगस्त तक ...और पढ़ें

भोजपुर में मानसून की विदाई: जून-अगस्त में कमी, सितंबर में राहत की बारिश से फसलों को फायदा (AI Generated Image)

भोजपुर में मानसून की विदाई: जून-अगस्त में कमी, सितंबर में राहत की बारिश से फसलों को फायदा (AI Generated Image)

HighLights

  1. भोजपुर से 15 अक्टूबर को मानसून की आधिकारिक विदाई हुई।

  2. जून-अगस्त में कम वर्षा से खरीफ फसलों को नुकसान हुआ।

  3. सितंबर में हुई अच्छी बारिश ने किसानों को राहत पहुंचाई।

जागरण संवाददाता, आरा। खेती-बाड़ी और जीवन के लिए हर साल उम्मीद लेकर आने वाला मानसून गुरुवार को विदा हो गया। वैज्ञानिकों ने 15 अक्टूबर को मानसून के आधिकारिक विदाई की पुष्टि कर दी। इस साल जिले में मानसून के दौरान वर्षा का उतार-चढ़ाव जारी रहा।

जून से अगस्त तक सामान्य से काफी कम वर्षा होने के कारण किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, सितंबर में वर्षा ने कुछ हद तक राहत दी। इस महीने सामान्य से 18.66 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई।

मौसम विभाग के वर्षा संबंधी आंकड़ों के अनुसार, जून से अगस्त तक बारिश में कमी ने खरीफ फसलों की खेती को प्रभावित किया। जिले में जून महीने में सामान्य 108.70 मिलीमीटर के मुकाबले महज 41.44 मिलीमीटर बारिश हुई। यह सामान्य से 61.87 प्रतिशत कम थी।

जुलाई में भी स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। इस महीने सामान्य 334.60 मिलीमीटर की तुलना में 157.54 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 52.92 प्रतिशत कम रही।

अगस्त में सामान्य 258.90 मिलीमीटर के मुकाबले 133.95 मिलीमीटर बारिश हुई। इस तरह अगस्त में भी सामान्य से 48.26 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई।

सितंबर में वर्षा ने धान को दी राहत

लगातार तीन महीने जून, जुलाई व अगस्त माह में कम वर्षा के बाद सितंबर में मौसम का मिजाज बदला। इस महीने सामान्य 207.20 मिलीमीटर के मुकाबले 245.86 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। यह सामान्य से 18.66 प्रतिशत अधिक रही। सितंबर की बारिश से किसानों को कुछ राहत मिली।

वहीं, अक्टूबर में भी वर्षा दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में अब तक 29.66 मिलीमीटर वर्षा हुई है। जून से अगस्त तक वर्षा, ताकी कमी के कारण धान की खेती प्रभावित हुई थी। ऐसे में सितंबर की बारिश से फसलों को राहत मिलने की उम्मीद जगी।

कृषि वैज्ञानिक डॉ. पीके द्विवेदी ने कहा कि शुरुआती मानसून में हुई बारिश की कमी की भरपाई के लिए बाद के महीनों में पर्याप्त वर्षा होना जरूरी था। मानसून ने सितंबर में अपना काम बखूबी किया।

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