विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

भोजपुर में जीविका दीदियों की मौन क्रांति: 13 सालों में 3 लाख से अधिक परिवारों की बदली तकदीर

Published: Thu, 29 Oct 2026 04:01 PM (IST)

भोजपुर में जीविका दीदियां गरीबी उन्मूलन और महिला सशक्तिकरण की दिशा में मौन क्रांति ला रही हैं।

भोजपुर में जीविका दीदियों की मौन क्रांति: 13 सालों में 3 लाख से अधिक परिवारों की बदली तकदीर

भोजपुर में जीविका दीदियों की मौन क्रांति: 13 सालों में 3 लाख से अधिक परिवारों की बदली तकदीर

HighLights

  1. 30 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह गठित।

  2. लाखों महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा, आत्मनिर्भर बनाया।

  3. सरकारी योजनाओं को लागू करने में अहम भूमिका।

अरुण प्रसाद, आरा। कहते हैं, एक महिला को सशक्त कर दो तो पूरा परिवार सशक्त हो जाता है। भोजपुर में इस कहावत को सच कर दिखाया है जीविका दीदियों ने। गरीबी उन्मूलन और महिला सशक्तीकरण की दिशा में पिछले 13 साल से जारी इनकी मौन क्रांति के परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं।

भोजपुर जिले में गरीबी उन्मूलन के उद्देश्य से 2 अक्टूबर 2013 को जीविका के तहत स्वयं सहायता समूह के निर्माण की शुरुआत हुई थी। इन 13 वर्षों में जिले में कुल 30 हजार 826 समूह, 1599 ग्राम संगठन और 38 संकुल स्तरीय संघ गठित हो चुके हैं, जिनसे 3 लाख 28 हजार परिवार जुड़े हैं।

शहर में भी बढ़ा कुनबा, अब सरकार की योजनाओं की सारथी

शुरुआत में सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित जीविका अब शहरी क्षेत्रों में भी तेजी से पांव पसार रही है। शहरी क्षेत्रों में अब तक 1493 स्वयं सहायता समूह बनाए जा चुके हैं। आज स्थिति यह है कि जिले के सभी प्रखंडों में जीविका दीदियां सरकारी योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में सबसे अहम कड़ी बन गई हैं।

दीदी की रसोई से लेकर सिलाई कंपनी तकजिले में सदर अस्पताल, रजिस्ट्री ऑफिस, मानसिक अस्पताल, कोइलवर सहित 8 स्थानों पर "दीदी की रसोई" संचालित हो रही है, जहां गुणवत्तापूर्ण नाश्ता और भोजन मिल रहा है।

वहीं, विभिन्न सरकारी कार्यालय परिसरों की साफ-सफाई के लिए 19 "दीदी की सफाई घर" चल रहे हैं। छात्र-छात्राओं को पोशाक उपलब्ध कराने के लिए कोइलवर में एक सिलाई उत्पादक कंपनी और सभी प्रखंडों में 18 सिलाई केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां दीदियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।

6 लाख पौधे, 33 नर्सरी और करियर सेंटर

  • सतत जीविकोपार्जन योजना से जिले की 3737 अत्यंत गरीब महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं।
  • जल-जीवन-हरियाली के तहत पिछले 5 साल में दीदियों ने अपने घरों और सार्वजनिक स्थलों पर 6 लाख से अधिक पौधे लगाए हैं। इसके लिए जिले में 33 नर्सरी चलाई जा रही हैं।
  • ग्रामीण छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए 10 दीदी का अधिकार केंद्र और 7 सामुदायिक पुस्तकालय सह करियर विकास केंद्र नई तकनीक के साथ स्थापित किए गए हैं।

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से मिली नई उड़ान

मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत भोजपुर में लगभग 4 लाख महिलाओं को प्रथम किस्त के रूप में 10-10 हजार रुपये मिले हैं।

इस राशि से महिलाएं किराना दुकान, सिलाई सेंटर, श्रृंगार दुकान, अंडा दुकान, मुर्गी-बकरी पालन जैसे रोजगार शुरू कर आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।

बिहार सरकार की इस पहल से न केवल महिलाओं का सशक्तीकरण हो रहा है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

क्या कहते हैं अधिकारी?

जीविका से जुड़कर महिलाओं ने अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विभिन्न स्वरोजगार के माध्यम से उनमें आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता में वृद्धि हुई। अब वे अपने परिवार की आवश्यकताओं में पहले की तुलना में अधिक सहयोग कर पा रही हैं तथा बच्चों की शिक्षा और परिवार के भविष्य को लेकर अधिक आश्वस्त हैं। - मनीष कुमार, संचार-प्रबंधक, जीविका, भोजपुर

जीविका से जुड़ने एवं स्वरोजगार के विभिन्न अवसर मिलने के बाद महिलाओं के जीवन में आर्थिक एवं सामाजिक स्तर पर सकारात्मक परिवर्तन आया है और वह एक सफल महिला उद्यमी के रूप में उभरी हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि छोटे स्तर पर शुरू किया गया स्वरोजगार भी परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का माध्यम बन सकता है। - सुमन कुमार, जिला परियोजना प्रबंधक, जीविका, भोजपुर

यह भी पढ़ें- बिहार की जीविका दीदियों की सफलता को मिलेगा डिजिटल मंच, अब ऑनलाइन दिखेगी मेहनत और आत्मनिर्भरता की कहानी

यह भी पढ़ें- जीविका से मिला ₹100000 का लोन, पेवर ब्लॉक कारोबार से बिहार की पिंकी ने बदली परिवार की तस्वीर