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आरा की साउथ बिहार एक्सप्रेस समेत 11 ट्रेनें निगरानी में, 40 घंटे से अधिक सफर पर रेलवे सख्त

Published: Wed, 07 Oct 2026 03:19 PM (GMT+05:30)

रेलवे ने 40 घंटे से अधिक यात्रा अवधि वाली 11 लंबी दूरी की ट्रेनों में स्वच्छता और यात्री सुविधाओं की ...और पढ़ें

11 ट्रेनों के प्रदर्शन की होगी नियमित समीक्षा

11 ट्रेनों के प्रदर्शन की होगी नियमित समीक्षा

जागरण संवाददाता, आरा(भोजपुर)। लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए रेलवे ने निगरानी व्यवस्था सख्त करने का निर्णय लिया है। रेलवे बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को 40 घंटे से अधिक यात्रा अवधि वाली ट्रेनों में स्वच्छता, रखरखाव और यात्री सुविधाओं की विशेष निगरानी का निर्देश दिया है।

इसके तहत 11 लंबी दूरी की ट्रेनों को विशेष निगरानी के लिए चिह्नित किया गया है। इन ट्रेनों के प्रदर्शन की संबंधित मंडल के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) स्तर पर नियमित समीक्षा की जाएगी।

आरा से जुड़ी साउथ बिहार एक्सप्रेस समेत लंबी दूरी की ट्रेनें निगरानी में

रेलवे के निर्देश के तहत लंबी दूरी की ट्रेनों में सफाई, शौचालय, कोच रखरखाव और कचरा निस्तारण की व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जाएगी। यात्रा के दौरान यात्रियों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए अधिकारियों को सतर्क रहने को कहा गया है।

विशेष निगरानी के लिए चिह्नित ट्रेनों में 01665/66 रानी कमलापति- अगरतला एक्सप्रेस, 19483/84 अहमदाबाद-सहरसा एक्सप्रेस, 13201/02 राजगीर-लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस, 11401/02 पुणे-सुपौल एक्सप्रेस शामिल हैं।

11 ट्रेनों के प्रदर्शन की होगी नियमित समीक्षा

सूची में 22365/66 दानापुर-एसएमवीटी बेंगलुरु सुपरफास्ट एक्सप्रेस और 12203/04 अमृतसर-सहरसा गरीब रथ एक्सप्रेस भी शामिल हैं। रेलवे बोर्ड के निर्देश के बाद संबंधित मंडल के DRM इन ट्रेनों की स्थिति और प्रदर्शन की निगरानी करेंगे।

यात्रियों से मिलने वाली शिकायतों के त्वरित निपटारे पर भी जोर दिया गया है। चिह्नित ट्रेनों के प्राथमिक अनुरक्षण की जिम्मेदारी संभालने वाले ओनिंग डिपो को भी लगातार ट्रेन की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

मेंटेनेंस सुपरवाइजर और CDO रखेंगे ट्रेन पर नजर

मेंटेनेंस सुपरवाइजर और कोचिंग डिपो अधिकारी (CDO) ट्रेन की स्थिति की निगरानी करेंगे। यात्रा के दौरान तकनीकी, स्वच्छता या यात्री सुविधा से जुड़ी कमियां सामने आने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें दूर किया जाएगा।

रेलवे का फोकस केवल प्राथमिक अनुरक्षण डिपो में सफाई कराने तक सीमित नहीं रहेगा। पूरी यात्रा के दौरान कोचों की स्वच्छता और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की स्थिति पर नजर रखी जाएगी।

बायो-टॉयलेट की भी होगी गहन जांच

रेलवे ने ट्रेनों में बायो-टॉयलेट की स्थिति की जांच पर भी विशेष जोर दिया है। प्राथमिक अनुरक्षण डिपो के अलावा रास्ते में चिह्नित स्टेशनों पर भी बायो-टॉयलेट की जांच की जाएगी।

शौचालय जाम होने, बंद होने या अत्यधिक गंदगी जैसी समस्याओं को तत्काल दूर करने का प्रयास किया जाएगा। लंबे सफर में शौचालयों की कार्यशीलता और सफाई बनाए रखना रेलवे की प्राथमिकताओं में शामिल है।

हर दो घंटे में होगा कचरा संग्रह

ओबीएचएस (ऑन बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विस) के तहत ट्रेन के सभी कोचों में हर दो घंटे पर कचरा संग्रह किया जाएगा। इसमें जनरल और जनरल सेकेंड क्लास कोच भी शामिल रहेंगे।

यात्रियों द्वारा फेंके गए कचरे को निर्धारित अंतराल पर एकत्र कर संबंधित कचरा निस्तारण या सीटीएस प्वाइंट तक पहुंचाया जाएगा। इससे लंबी दूरी की यात्रा के दौरान कोचों में कचरा जमा होने की समस्या कम करने में मदद मिलेगी।

हर सप्ताह होगी स्वच्छता और शिकायतों की समीक्षा

हाजीपुर स्थित जोनल रेलवे स्तर के अधिकारी प्रत्येक सप्ताह इन चिह्नित ट्रेनों की स्वच्छता, रखरखाव, यात्री शिकायतों और उनके निपटारे की समीक्षा करेंगे।

रेलवे का उद्देश्य लंबी दूरी की ट्रेनों में पूरे सफर के दौरान स्वच्छता और यात्री सुविधाओं की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करना है। यात्रा की लंबी अवधि और यात्रियों की संख्या को देखते हुए यह व्यवस्था यात्री सुविधाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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