आरा में CBI के ट्रैप में डाक विभाग का रिश्वतखोरी का खेल, डाक सहायक गिरफ्तार; निरीक्षक फरार
आरा में सीबीआई ने डाक विभाग के रिश्वतखोरी के खेल का भंडाफोड़ किया है। डाक सहायक पुरुषोत्तम कुमार को 10 ...और पढ़ें

रिश्वत लेते ही दबोचा गया डाक सहायक
HighLights
सीबीआई ने आरा डाक विभाग में रिश्वतखोरी का भंडाफोड़ किया।
डाक सहायक पुरुषोत्तम कुमार 10 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार।
उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार रिश्वत मामले में फरार है।
जागरण संवाददाता, आरा(भोजपुर)। भ्रष्टाचार के खिलाफ पटना सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई (एसीबी) ने डाक विभाग के उपमंडलीय कार्यालय, आरा में कार्रवाई की है। तीन माह से लंबित शाखा डाकपाल (बीपीएम) संदीप कुमार का वेतन जारी करने के एवज में 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार और अरवल उपमंडलीय कार्यालय के डाक सहायक पुरुषोत्तम कुमार के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गई है।
कार्रवाई के दौरान रविवार रात आरा प्रधान डाकघर के आवासीय परिसर से 10 हजार रुपये रिश्वत लेते डाक सहायक पुरुषोत्तम कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया।
रिश्वत लेते ही दबोचा गया डाक सहायक, निरीक्षक की तलाश तेज
गिरफ्तार डाक सहायक पुरुषोत्तम कुमार चांदी थाना क्षेत्र के भगवतपुर-तापा जलपुरा गांव का रहने वाला बताया गया है। वह पहले आरा उपमंडलीय कार्यालय में पर्यवेक्षक यानी ओवरसियर के पद पर तैनात था।
वर्तमान में अरवल उपमंडलीय कार्यालय में डाक सहायक के पद पर कार्यरत था। दो दिन पहले ही पदोन्नति के बाद उसका स्थानांतरण हुआ था।
मामले में आरोपित उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार की गिरफ्तारी के लिए सीबीआई टीम ने रविवार रात पटना में भी छापेमारी की।
बेऊर के पास पहुंची सीबीआई टीम, लेकिन हाथ नहीं लगा आरोपित
उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार की तलाश में टीम पटना के बेऊर जेल के समीप स्थित एक आवासीय कालोनी में पहुंची, लेकिन वह वहां नहीं मिला।
उसकी गिरफ्तारी के लिए आगे भी कार्रवाई जारी है। इधर, गिरफ्तार डाक सहायक को पूछताछ और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के लिए पटना ले जाया गया। सोमवार को उसे सीबीआई की विशेष अदालत, पटना में प्रस्तुत किए जाने की प्रक्रिया की गई।
एक जुलाई को डाकपाल ने संभाला था पद, तीन माह से अटका था वेतन
सीबीआई इकाई के अनुसार शिकायतकर्ता संदीप कुमार ने एक जुलाई 2026 को छोटकी सासाराम स्थित उप डाकघर में शाखा डाकपाल के पद पर योगदान किया था।
योगदान के बाद से उनका तीन माह का वेतन लंबित था। आरोप है कि वेतन जारी कराने के लिए दोनों आरोपित कर्मियों की ओर से उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। शिकायत में सेवा से हटाने अथवा वेतन स्थायी रूप से रोक देने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
26 सितंबर को कार्यालय बुलाकर मांगे गए थे 10 हजार
शिकायत के अनुसार 26 सितंबर को संदीप कुमार को आरा नार्थ उपमंडलीय कार्यालय बुलाया गया था। वहां उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार ने कथित रूप से 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग दोहराई।
आरोप है कि रिश्वत देने पर ही 30 सितंबर को लंबित वेतन जारी करने का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद शिकायतकर्ता ने पटना सीबीआई की एसीबी इकाई में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के बाद सीबीआई ने बिछाया जाल, सामने आए इलेक्ट्रानिक साक्ष्य
सीबीआई की एसीबी इकाई के अनुसार मामले में चार अक्टूबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज की गई। इसके बाद कार्रवाई करते हुए डाक सहायक को रिश्वत की रकम लेते गिरफ्तार किया गया।
टीम को मामले से जुड़े इलेक्ट्रानिक साक्ष्य भी मिले हैं। अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि रिश्वत मांगने और सरकारी कार्य के एवज में अवैध राशि लेने में दोनों आरोपितों की क्या भूमिका थी।
सीबीआई खंगालेगी रिश्वत मांगने से लेकर वेतन रोकने तक की पूरी कड़ी
मामले में भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। सीबीआई अब शिकायत, इलेक्ट्रानिक साक्ष्य और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है।
साथ ही फरार बताए जा रहे उपमंडलीय निरीक्षक गौरव कुमार की गिरफ्तारी के लिए भी टीम की कार्रवाई जारी है।
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