चेंबरों पर बिछा दिया था डामर, खुले राज! विक्रमशिला सेतु के तीनों कंक्रीट गर्डर हटे, स्टील गर्डर की लॉन्चिंग की तैयारी
Bhagalpur Vikramshila Setu Repair Work: विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन का काम निर्णायक चरण में है, जहां कमजोर स्लैब और कंक्रीट ...और पढ़ें

Bhagalpur Vikramshila Setu Repair Work: विक्रमशिला सेतु के तीनों कंक्रीट गर्डर हटे, अगले हफ्ते स्टील गर्डर की होगी लॉन्चिंग; 67 एक्सपेंशन ज्वाइंट भी बदले जा रहे
HighLights
सेतु के क्षतिग्रस्त कंक्रीट गर्डर हटाए गए, स्टील गर्डर तैयार।
67 नए एक्सपेंशन ज्वाइंट और चेंबर बदले जा रहे हैं।
पुराने रखरखाव में लापरवाही, सेतु की उम्र बढ़ाने का लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Bhagalpur Vikramshila Setu Repair Work: उत्तर और दक्षिण बिहार की जीवनरेखा माने जाने वाले विक्रमशिला सेतु के कायाकल्प और पुनर्स्थापन का काम निर्णायक चरण में पहुंच गया है। सेतु के स्पैन संख्या 36 के तीनों कमजोर और क्षतिग्रस्त स्लैबों को ध्वस्त करने के बाद शनिवार को भारी कंक्रीट गर्डर को भी काटकर हटाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
इसके साथ ही अब भारी-भरकम स्टील गर्डर की लॉन्चिंग का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। पुनर्स्थापन का जिम्मा संभाल रही निर्माण एजेंसी 'एसपी सिंगला' ने बरारी स्थित अपने कास्टिंग यार्ड में स्टील गर्डर की असेंबलिंग का काम लगभग पूरा कर लिया है। आगामी सप्ताह से इन स्टील गर्डरों को हाइड्रोलिक क्रेन की मदद से सेतु पर स्थापित करने की बहुप्रतीक्षित प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
भोपाल और कोलकाता से आ रहे 67 नए एक्सपेंशन ज्वाइंट
कंक्रीट गर्डर हटाने के समानांतर ही विक्रमशिला सेतु के सभी 67 एक्सपेंशन ज्वाइंट और इंस्पेक्शन चेंबर (पुल के बीच स्थित तकनीकी ढक्कन) को नए सिरे से बदलने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया गया है। वर्षों से अनियंत्रित ओवरलोड ट्रकों के परिचालन और नियमित मेंटेनेंस के अभाव में ये एक्सपेंशन ज्वाइंट गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके थे।
हालात इतने बदतर थे कि कई स्थानों पर इनके बीच का गैप बढ़कर छह से सात इंच तक हो गया था, जिससे गुजरने वाले वाहनों के पहियों को तेज झटके लगते थे और हादसों का खतरा बना रहता था।
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अनुसार, सभी पुराने ज्वाइंट्स को काटकर हटाया जा रहा है। इनकी जगह भोपाल और कोलकाता की विशेषज्ञ तकनीकी इकाइयों से उच्च गुणवत्ता वाले नए एक्सपेंशन ज्वाइंट्स मंगाए जा रहे हैं, जिन्हें साइट पर फेब्रिकेशन के बाद पूरी सटीकता से फिट किया जाएगा।
पैचवर्क में ढक दिए गए थे चेंबर, अलकतरे के नीचे दबी मिली लापरवाही
पुनर्स्थापन कार्य के दौरान सेतु के पुराने रखरखाव की गंभीर लापरवाही भी खुलकर सामने आई है। लंबे समय से नियमित मेंटेनेंस न होने के कारण सेतु के मुख्य इंस्पेक्शन चेंबर क्षतिग्रस्त हो गए थे। हैरत की बात यह है कि पूर्व में जब भी सेतु की सड़क पर डामर बिछाया गया या गड्ढे भरने के लिए पैचवर्क किया गया, तकनीकी कर्मियों ने चेंबरों को सहेजने के बजाय उनके ऊपर ही डामर और गिट्टी की परत बिछा दी।
डामर, पत्थरों और ओवरलोड वाहनों के भीषण दबाव के कारण चेंबरों के लोहे और कंक्रीट के ढक्कन अंदर की ओर धंस गए थे। 01 अक्टूबर को जब सेतु पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर मरम्मत शुरू की गई, तो हर चेंबर के नीचे अलकतरे (तारकोल) की मोटी परत जमी मिली।
कमियों को दूर कर बढ़ाई जाएगी सेतु की उम्र: निगम सचिव
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के योजना व प्रशासनिक सचिव शशि भूषण सिंह ने बताया कि सेतु का पुनर्स्थापन केवल तात्कालिक मरम्मत नहीं, बल्कि इसके दीर्घकालिक जीवन (Life Span) को बढ़ाने की व्यापक योजना है। जब एक बार काम शुरू हुआ है, तो सेतु की हर तकनीकी खामी और विकृति को पूरी तरह दूर किया जाएगा।
इंस्पेक्शन चेंबर सेतु के आंतरिक स्वास्थ्य और केबल्स की समय-समय पर जांच के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए इन्हें पूरी इंजीनियरिंग गाइडलाइन के तहत नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। इसके साथ ही, भविष्य में नियमित अंतराल पर सेतु के मेंटेनेंस के लिए एक ठोस SOP भी लागू की जाएगी।
