विक्रमशिला सेतु बहाली को मिली रफ्तार! 21 दिन में काटे गए तीनों कमजोर स्लैब, नवगछिया छोर पर गर्डर लांचिंग का काम तेज
Vikramshila Setu Repair Bhagalpur: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य में तेजी आई है। 21 दिनों में तीनों कमजोर ...और पढ़ें

Vikramshila Setu Repair Bhagalpur: विक्रमशिला सेतु के तीनों कमजोर स्लैब काटकर हटाए गए; नवगछिया की ओर स्टील गर्डर लांचिंग तेज
HighLights
विक्रमशिला सेतु के तीनों कमजोर स्लैब 21 दिन में हटाए गए।
नवगछिया छोर से स्टील गर्डर लॉन्चिंग का कार्य युद्धस्तर पर जारी।
क्षतिग्रस्त हिस्से में नए गर्डर लगाने को बार्ज और क्रेन तैयार।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Vikramshila Setu Repair Bhagalpur: भागलपुर को उत्तर बिहार से जोड़ने वाले सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा करने के लिए निर्माण कार्य में अभूतपूर्व तेजी आई है। सेतु के सभी तीन कमजोर स्पैन और स्लैब को सुरक्षित तरीके से काटकर हटाने का बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य महज 21 दिनों में पूरा कर लिया गया है।
स्लैब हटाने की प्रक्रिया संपन्न होते ही अब स्टील गर्डर लांचिंग की दिशा में युद्धस्तर पर पहल शुरू कर दी गई है। नवगछिया छोर की ओर स्टील गर्डर लांचिंग का कार्य शुरू हो चुका है, जिसके आगामी दो दिनों में पूरा होने की प्रबल उम्मीद है।
एजेंसियों की संख्या बढ़ाकर चार की गई, 21 दिन में हटे स्लैब
परियोजना से जुड़े अभियंताओं के अनुसार, सेतु के पहले कमजोर स्लैब को काटकर हटाने में करीब 10 दिन का लंबा समय लग गया था। तकनीकी जटिलताओं और समयसीमा के दबाव को देखते हुए कार्य की गति बढ़ाने के लिए कार्यदायी एजेंसियों की संख्या दो से बढ़ाकर चार कर दी गई।
अतिरिक्त तकनीकी मानवबल और अत्याधुनिक कटिंग मशीनों के मैदान में उतरते ही कार्य की रफ्तार दोगुनी हो गई। नतीजतन, शेष दो कमजोर स्लैबों को रिकॉर्ड समय में काटकर पूरी तरह हटा दिया गया और तीनों स्लैबों की कटाई 21 दिनों में सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई।
क्षतिग्रस्त हिस्से में गर्डर लांचिंग की तैयारी, 2 बार्ज तैयार
उल्लेखनीय है कि बीते 3 मई की रात सेतु का एक स्लैब ध्वस्त होकर सीधे गंगा नदी में समा गया था। अब उस क्षतिग्रस्त हिस्से में नए सिरे से स्टील गर्डर लांच करने की अंतिम रूपरेखा तैयार कर ली गई है।
इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए गंगा की धारा में दो विशालकाय फ्लोटिंग बार्ज (तैरते हुए प्लेटफॉर्म) पूरी तरह तैयार कर उतारे जा चुके हैं। बरारी स्थित तकनीकी यार्ड में स्टील गर्डर के अलग-अलग हिस्सों को तेजी से असेंबल (जोड़ने) का कार्य चल रहा है, ताकि उन्हें सीधे बार्ज के जरिए मौके पर पहुंचाया जा सके।
200 टन भार उठाने में सक्षम हैं क्रेन, सेतु पर भी भारी मशीनें मुस्तैद
गंगा में उतारे गए बार्ज पर दो अत्यंत शक्तिशाली आधुनिक क्रेन फिट की गई हैं। तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, ये दोनों क्रेन मिलकर लगभग 200 टन तक का भारी-भरकम वजन आसानी से उठाने में सक्षम हैं। इसके अतिरिक्त सेतु के ऊपरी तल पर भी भारी-भरकम क्रेन और हाइड्रा मशीनों को तैनात किया गया है।
स्टील गर्डर की सटीक लांचिंग और फिटिंग सुनिश्चित करने के लिए दो विशेषज्ञ एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों का दावा है कि जिस तीव्र गति से कार्य चल रहा है, उससे तय समयसीमा के भीतर सेतु पर परिचालन बहाल करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
