भागलपुर : गंगा में मलबा गिरा तो खैर नहीं, विक्रमशिला सेतु की मरम्मत पर NGT की कड़ी नजर, धीमी गति से कट रहे स्लैब
Vikramshila Setu Repair Work Bhagalpur: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर मरम्मत कार्य डॉल्फिन अभयारण्य के कड़े पर्यावरणीय नियमों के कारण ...और पढ़ें

Vikramshila Setu Repair Work Bhagalpur: भागलपुर में विकमिशल पुल की मरम्मती
HighLights
विक्रमशिला सेतु मरम्मत कार्य डॉल्फिन अभयारण्य नियमों से धीमा।
गंगा में मलबा गिरने पर NGT की सख्त रोक।
आधुनिक धीमी मशीनों से जलीय जीवों की सुरक्षा सुनिश्चित।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Vikramshila Setu Repair Work Bhagalpur: उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले लाइफलाइन विक्रमशिला सेतु पर आवागमन बंद हुए 12 दिन बीत चुके हैं, लेकिन मरम्मत कार्य की रफ्तार उम्मीद से काफी धीमी नजर आ रही है। इस अवधि में निर्माण एजेंसी द्वारा अब तक केवल एक ही कमजोर स्लैब को काटकर हटाया जा सका है।
दूसरे स्लैब को हटाने का काम जारी है, जहां पिछले चार दिनों में आधा स्लैब भी नहीं कट सका है। इसे पूरी तरह हटाने में अभी कम से कम चार दिन और लगेंगे। इसके बाद ही तीसरे कमजोर स्लैब को काटने की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
विक्रमशिला सेतु मरम्मत: एक नजर में
पुल बंद रहने की अवधि: 12 दिन पूरे।
कार्य की प्रगति: 1 स्लैब हटा, दूसरे पर कार्य जारी; तीनों कमजोर स्लैब हटाने में 20 से 25 दिन लगने का अनुमान।
संवेदनशील दायरा: अजगैवीनाथ धाम (सुल्तानगंज) से कहलगांव तक (60 किमी लंबा डॉल्फिन अभयारण्य)।
निगरानी एजेंसियां: इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) एवं एनजीटी (NGT)।
प्रयुक्त तकनीक: हाइड्रोलिक शियर जॉ, डायमंड वायर सॉ और डस्ट सप्रेशन सिस्टम (विस्फोट पूरी तरह प्रतिबंधित)।
समीक्षा: बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के एमडी जितेंद्र कुमार द्वारा उच्चस्तरीय बैठक में मंथन।
कार्य की इस मौजूदा गति को देखते हुए तीनों स्लैब को पूरी तरह ध्वस्त कर हटाने में ही 20 से 25 दिनों का समय लग सकता है। जबकि कार्ययोजना के तहत निर्धारित समयावधि में ही काम पूरा करना अनिवार्य है। इस संबंध में जब योजना एवं प्रशासन के सचिव शशि भूषण सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
डॉल्फिन अभयारण्य के सख्त नियम
काम की धीमी रफ्तार के पीछे सबसे बड़ी वजह कड़े पर्यावरणीय नियम हैं। दरअसल, अजगैवीनाथ धाम (सुल्तानगंज) से लेकर कहलगांव तक गंगा का 60 किलोमीटर का क्षेत्र 'विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य' के रूप में अधिसूचित है। राष्ट्रीय जलीय जीव गांगेय डॉल्फिन के संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) द्वारा अत्यधिक सतर्कता बरती जा रही है।
गंगा में मलबा गिरने पर रोक
एजेंसी को सख्त निर्देश है कि स्लैब काटने के दौरान कंक्रीट, सीमेंट या लोहे का एक छोटा टुकड़ा भी गंगा की जलधारा में नहीं गिरना चाहिए, ताकि जलीय जीवों के प्राकृतिक वास को कोई नुकसान न पहुंचे।
आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल
एनजीटी के अधिकारियों ने लगातार सात दिनों तक सेतु पर रहकर स्थलीय निरीक्षण किया और अपनी विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट पुल निर्माण निगम को सौंपी है। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुल निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक (MD) जितेंद्र कुमार की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित कर आ रही तकनीकी व पर्यावरणीय बाधाओं पर मंथन किया गया।
रात में काम नियंत्रित
अभयारण्य क्षेत्र होने के कारण पुल पर किसी भी तरह के भारी कंपन या विस्फोटकों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित है। एजेंसी द्वारा हाइड्रोलिक शियर जॉ, डायमंड वायर सॉ और डस्ट सप्रेशन सिस्टम जैसी अत्याधुनिक और धीमी मशीनों से स्लैब को टुकड़ों में काटा जा रहा है। ध्वनि और प्रकाश प्रदूषण से जलीय जीवों को बचाने के लिए रात के समय काम को काफी नियंत्रित तरीके से करना पड़ रहा है, जिससे तय समय-सीमा में कार्य पूरा करना बड़ी चुनौती बन गया है।
