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7 घंटे में खुला पहला बेली ब्रिज; विक्रमशिला सेतु पर GREF का बड़ा एक्शन, 10 दिन में 4 ब्रिज हटाने के बाद कटेगा स्पैन

Published: Thu, 01 Oct 2026 02:42 PM (IST)

Vikramshila Setu Bhagalpur: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर जीर्णोद्धार का महा-अभियान शुरू हो गया है, जिसमें 30 सितंबर की आधी ...और पढ़ें

HighLights

  1. विक्रमशिला सेतु पर जीर्णोद्धार कार्य का महा-अभियान शुरू।

  2. GREF ने 7 घंटे में 60 फीट का पहला बेली ब्रिज हटाया।

  3. अगले 10 दिनों में सभी चार बेली ब्रिज हटाए जाएंगे।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। Vikramshila Setu Bhagalpur: विक्रमशिला सेतु पर हाउसिंग कॉलोनी मोड़ के समीप बैरिकेडिंग कर 30 सितंबर (बुधवार) की आधी रात 12 बजे आवागमन पूरी तरह बंद किए जाने के बाद, 1 अक्टूबर (गुरुवार) की अलसुबह से ही सेतु के जीर्णोद्धार का महा-अभियान धरातल पर उतर गया।

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की प्रतिष्ठित तकनीकी विंग 'जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स' (जीआरईएफ) ने सुबह 5 बजे से नवगछिया छोर की ओर से पहला बेली ब्रिज हटाने की कार्रवाई शुरू की।

कैप्टन सूरज लड और असिस्टेंट इंजीनियर प्रनोदित मजूमदार की प्रत्यक्ष निगरानी में 40 सदस्यीय विशेष तकनीकी दल ने मात्र सात घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद 60 फीट लंबे पहले बेली ब्रिज को सफलतापूर्वक खोलकर अलग कर दिया। इसके साथ ही टीम अब दूसरे बेली ब्रिज को खोलने की तैयारी में जुट गई है।

अभियंताओं के अनुसार, 60 फीट लंबे बेली ब्रिज को हटाने में कम समय इसलिए लगा क्योंकि इसमें सिंगल पैनल लगा हुआ था। हालांकि, आगे की राह काफी जटिल और समय लेने वाली है।

Vikramshila Setu Repair First Bailey Bridge Removed in 7 Hours (1)

10 दिन में हटेंगे चारों ब्रिज, 170 फीट वाले में लगेगा सबसे ज्यादा वक्त

जीआरईएफ टीम के मुताबिक, 60 फीट के बाद अब क्रमशः 90 फीट और 100 फीट वाले बेली ब्रिज को खोला जाएगा। इन दोनों में तीन-तीन पैनल लगे हैं, जिसके कारण एक-एक ब्रिज को डिस्मेंटल करने में कम से कम दो-दो दिन का समय लगेगा। सबसे अंत में क्षतिग्रस्त हिस्से पर बने 170 फीट लंबे मुख्य बेली ब्रिज को हटाया जाएगा। इस 170 फीट लंबे ब्रिज में ऊपर और नीचे डबल-डबल पैनल लगे हैं और इसे नीचे से भी खोलने की तकनीकी मजबूरी है। इसमें अकेले तीन से चार दिन का वक्त लगेगा।

बेली ब्रिज डिस्मेंटलिंग व पुनर्स्थापन: टाइमलाइन व तकनीकी तथ्य

  • हटाए जाने वाले चारों बेली ब्रिज:

    1. 60 फीट (हटाया गया): सिंगल पैनल युक्त, 7 घंटे में सफलतापूर्वक खोला गया।

    2. 90 फीट व 100 फीट: ट्रिपल (तीन) पैनल युक्त, प्रत्येक को खोलने में लगेंगे न्यूनतम 2-2 दिन।

    3. 170 फीट (क्षतिग्रस्त हिस्से वाला): ऊपर-नीचे डबल पैनल युक्त; नीचे से भी खुलेगा, हटाने में लगेंगे 3 से 4 दिन।

  • कार्यबल (Manpower): जीआरईएफ के 65 सदस्यीय दल में 25 कैजुअल पेड लेबर (CPL) शामिल।

  • आगे की तकनीकी प्रक्रिया:

    • स्टेप 1: चारों बेली ब्रिज हटाना (लक्ष्य: 10 दिन)।

    • स्टेप 2: हेली कटर से 4 स्पैन की कटिंग (लक्ष्य: 10 दिन)।

    • स्टेप 3: नई बेयरिंग बैठाना और स्टील गर्डर की असेंबलिंग।

    • स्टेप 4: नए डेक स्लैब की ढलाई (क्यूरिंग व सेट होने में 21 दिन)।

  • चुनौतियां: 6 स्पैन की बेयरिंग पूरी तरह बैठ चुकी है; गंगा का बढ़ता जलस्तर और आगे ठंड व कोहरे के कारण काम 3 महीने से बढ़कर 4 महीने तक खिंचने की संभावना।

कुल 65 सदस्यीय दल (जिसमें 25 कैजुअल पेड लेबर शामिल हैं) सभी चारों बेली ब्रिज को चरणबद्ध तरीके से हटाने में जुटा है। अधिकारियों ने बताया कि यदि सभी बेली ब्रिज एक साथ खोल दिए जाते, तो क्रेन, मशीनरी और मलबा ढोने वाले वाहनों का कार्यस्थल तक पहुंचना नामुमकिन हो जाता।

हेली कटर से कटेंगे चार स्पैन

चारों बेली ब्रिज को पूरी तरह हटाने के बाद पुल के मूल ढांचे की गहन तकनीकी जांच की जाएगी। इसके तुरंत बाद 'हेली कटर' मशीनों के जरिए चार स्पैन को काटने का जटिल काम शुरू होगा, जिसे 10 दिनों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके बाद नई बेयरिंग डालकर स्टील गर्डर सेट किए जाएंगे और अंत में डेक स्लैब की कंक्रीट ढलाई होगी, जिसे मजबूत होकर पूरी तरह सेट होने में कम से कम 21 दिनों का समय लगेगा।

पटना-गुवाहाटी के विशेषज्ञ पहुंचे

इस अति-विशिष्ट कार्य के लिए पटना के गांधी सेतु और गुवाहाटी में गंगा-ब्रह्मपुत्र के पुलों पर कार्य कर चुके अनुभवी इंजीनियरों की विशेष टीम को भागलपुर में तैनात किया गया है। भारी क्रेन, हाइवा और पोकलेन मशीनों के भारी-भरकम वजन को संभालने के लिए सेतु के नीचे चार स्थानों पर लोहे का अतिरिक्त स्ट्रक्चरल सपोर्ट दिया जा रहा है। तीन सपोर्ट तैयार हो चुके हैं और चौथा एक-दो दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।

Vikramshila Setu Repair First Bailey Bridge Removed in 7 Hours (2)

6 स्पैन की बेयरिंग डैमेज

स्थल पर तैनात तकनीकी कर्मियों ने बताया कि जांच में पाया गया है कि छह स्पैन की बेयरिंग पूरी तरह डैमेज होकर बैठ चुकी है। वहीं, गंगा के बढ़ते जलस्तर ने भी काम की गति के सामने चुनौती खड़ी की है।

कोहरा बढ़ा सकता है मियाद

कर्मियों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक स्तर पर भले ही 3 महीने का लक्ष्य तय किया गया हो, लेकिन जमीनी स्तर पर यह काम 4 महीने तक भी खिंच सकता है। आने वाले दिनों में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के कारण रात के समय वेल्डिंग और कटिंग का सूक्ष्म कार्य करना बेहद कठिन हो जाएगा।

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