विक्रमशिला सेतु की मरम्मत का काम 24 घंटे जारी, तय समय में आवागमन शुरू करने की प्लानिंग
भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर मरम्मत कार्य तेजी से जारी है, जहां क्षतिग्रस्त स्लैबों को हटाने और निर्माण सामग्री जुटाने ...और पढ़ें

विक्रमशिला सेतु की मरम्मत का सामान। फाइल फोटो
HighLights
क्षतिग्रस्त स्लैबों को हटाने का काम जारी है।
बेयरिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट भी बदले जाएंगे।
पुनर्स्थापन कार्य 24 घंटे, तीन पालियों में चल रहा है।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के पुनर्स्थापन कार्य को गति देने के लिए सेतु पर निर्माण सामग्री जुटाई जा रही है। तीन क्षतिग्रस्त स्लैबों को तोड़कर हटाने का काम जारी है। इनमें एक स्लैब को तोड़ने का काम लगभग पूरा हो चुका है।
तीन मई की रात क्षतिग्रस्त हुआ एक स्लैब पहले ही गंगा में गिर गया था। अब शेष स्लैबों को हटाने के बाद स्टील गर्डर लगाने और नए स्लैब की ढलाई का काम किया जाएगा।
पुल निर्माण निगम के अधिकारी तय समय पर काम पूरा कर सेतु पर आवागमन बहाल करने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए सेतु के विभिन्न हिस्सों में एक साथ काम कराने की तैयारी है।
क्षतिग्रस्त स्लैब और रेलिंग हटाने का काम जारी
सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से के पीछे का एक स्लैब खिसका हुआ प्रतीत हो रहा है और उसमें दरार भी आ गई है। हादसे में रेलिंग को भी नुकसान पहुंचा था। क्षतिग्रस्त हिस्से के साथ रेलिंग को काटकर हटाया जा रहा है।
खराब हो चुके एक्सपेंशन ज्वाइंट को हटाने की प्रक्रिया भी चल रही है। अधिकारियों के अनुसार, स्लैब हटाने का काम पूरा होने के बाद ही सुपर स्ट्रक्चर का पुनर्निर्माण किया जाएगा।
बेयरिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट भी बदले जाएंगे
सूत्रों के अनुसार, सेतु के बेयरिंग कोट की सफाई की जा रही है। एक पिलर के स्लैब में चार बेयरिंग कोट लगाए जाने हैं। इन्हें बदलने के लिए स्लैब को 10 से 12 इंच तक उठाया जाएगा।
सभी स्थानों पर बेयरिंग कोट और एक्सपेंशन ज्वाइंट बदलने में एक माह से अधिक समय लग सकता है। इसके बाद स्टील गर्डर सेट किए जाएंगे और स्लैब की ढलाई होगी। क्षतिग्रस्त स्लैबों को काटकर हटाने में करीब 15 दिन लगने की संभावना जताई जा रही है।
24 घंटे अलग-अलग पालियों में चल रहा काम
पुनर्स्थापन कार्य तय समय पर पूरा करने के लिए 24 घंटे काम कराया जा रहा है। अलग-अलग टीमों को पालियों में तैनात किया गया है। योजना है कि ठंड का असर बढ़ने से पहले अधिक से अधिक काम पूरा कर लिया जाए।
हालांकि, घना कोहरा छाने पर दृश्यता कम होने से काम प्रभावित हो सकता है, खासकर रात के समय परेशानी बढ़ने की आशंका है।
सूत्रों के अनुसार, पुनर्स्थापन कार्य पूरा करने की निर्धारित तिथि 31 दिसंबर है। हालांकि, मकर संक्रांति से पहले सेतु पर आवागमन बहाल होने की संभावना कम जताई जा रही है।
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