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भागलपुर के विक्रमशिला सेतु की बढ़ जाएगी 25 साल उम्र, घटाया जा रहा है 50 टन लोड; मुंबई की कंपनी कर रही कार्बन प्लेटिंग

Published: Mon, 05 Oct 2026 09:11 AM (IST)

Vikramshila Setu Bhagalpur Repair: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु की मरम्मत का बड़ा अभियान शुरू हो गया है, जिसमें 45-50 टन ...और पढ़ें

Vikramshila Setu Bhagalpur Repair: भागलपुर में गंगा पर बने सेतु की हो रही है मम्‍मत‍ि।

Vikramshila Setu Bhagalpur Repair: भागलपुर में गंगा पर बने सेतु की हो रही है मम्‍मत‍ि।

HighLights

  1. सेतु का 45-50 टन भार कम किया जा रहा है।

  2. मुंबई की टीम कार्बन प्लेटिंग से पुल मजबूत कर रही।

  3. विक्रमशिला सेतु की आयु 25 साल तक बढ़ेगी।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर और उत्तर बिहार की लाइफलाइन माने जाने वाले ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त व कमजोर हिस्से को सुरक्षित रूप से पुनर्स्थापित करने के लिए तकनीकी स्तर पर बड़ा ऑपरेशन शुरू हो गया है। सेतु के जर्जर ढांचे पर दबाव कम करने के लिए कटर मशीनों के जरिए रेलिंग को काटा जा रहा है और वर्षों से चढ़ी भारी-भरकम बिटुमिनस (अलकतरा) सड़क की परतों को खोदकर हटाया जा रहा है। रविवार को लगातार तीसरे दिन भी नवगछिया की ओर सड़क व रेलिंग कटिंग का काम तेजी से जारी रहा।

अभियंताओं के अनुसार, रेलिंग और सड़क की अतिरिक्त परतों को हटाने से सेतु का लगभग 45 से 50 टन लोड हल्का हो जाएगा। चूंकि पुल पहले से अत्यधिक जर्जर और क्षतिग्रस्त स्थिति में है, इसलिए पुनर्स्थापन कार्य के दौरान वाइब्रेशन और दबाव से मुख्य स्ट्रक्चर को कोई नुकसान न पहुंचे, इसी मकसद से सबसे पहले लोड घटाया जा रहा है।

3 बेली ब्रिज हटे, मंगलवार से हटेगा क्षतिग्रस्त हिस्से वाला पुल

राहत की बात यह है कि सेतु पर आवागमन सुचारू रखने के लिए पूर्व में लगाए गए चार बेली ब्रिजों में से तीन को पूरी तरह खोलकर हटा दिया गया है। इन तीनों को हटाने में टीम को महज 7 से 8 घंटे का समय लगा। वहीं, सेतु के जिस हिस्से पर स्लैब गिरा था, वहां लगे चौथे बेली ब्रिज को मंगलवार से हटाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इस संवेदनशील बेली ब्रिज को सावधानीपूर्वक हटाने में 20 से 25 घंटे (लगभग दो दिन) का वक्त लग सकता है।

पिलर 1 से 4 तक संकट, मुंबई की टीम कर रही कार्बन प्लेटिंग

पुल निर्माण निगम के अनुसार, पिलर संख्या 1 से 4 तक सेतु का ढांचा बेहद कमजोर हो चुका है। इसलिए इस हिस्से में रिक्रू-फिटिंग (रेट्रोफिटिंग) और स्ट्रेंथनिंग का विशेष कार्य युद्धस्तर पर कराया जा रहा है। इसके लिए मुंबई की एक विशेषज्ञ एजेंसी को तैनात किया गया है। एजेंसी के तकनीकी विशेषज्ञ पिलर से जुड़े नीचे के स्लैब वाले हिस्से में ग्राइंडिंग कर कार्बन फाइबर, कार्बन लेमिनेट और उच्च क्षमता वाली कार्बन प्लेट्स लगा रहे हैं। इससे पुल का लोड संतुलित तरीके से डिवाइड होगा और ढांचा मजबूत बनेगा। कार्बन प्लेटिंग की इस आधुनिक तकनीक से विक्रमशिला सेतु की आयु करीब 25 साल तक बढ़ सकती है।

विक्रमशिला सेतु रेस्टोरेशन: तकनीकी फैक्टशीट

  • लोड घटाने का लक्ष्य: 45 से 50 टन (रेलिंग व सड़क की बिटुमिनस परत हटाकर)।

  • अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्र: पिलर संख्या 1 से 4 तक (नीचे के स्लैब में रेट्रोफिटिंग व स्ट्रेंथनिंग)।

  • तकनीकी समाधान: मुंबई की फर्म द्वारा ग्राइंडिंग कर कार्बन फाइबर, कार्बन लेमिनेट व कार्बन प्लेटिंग।

  • बेली ब्रिज स्थिति: 3 बेली ब्रिज हटाए गए (7-8 घंटे में), क्षतिग्रस्त स्थल का चौथा बेली ब्रिज मंगलवार से हटेगा (20-25 घंटे अनुमानित)।

  • स्ट्रक्चरल समस्या: 6 स्पैन की बेयरिंग बैठ चुकी है; एक तरफ एक्सपेंशन ज्वाइंट अत्यधिक चौड़ा तो दूसरी तरफ सट गया।

  • आगे की रूपरेखा: हेली कटर से 4 स्पैन कटेंगे-नई बेयरिंग व स्टील गर्डर-डेक स्लैब ढलाई (28 दिन क्योरिंग)-160 टन क्षमता पर लोड टेस्टिंग।

  • उम्र विस्तार: सफल सुदृढ़ीकरण के बाद सेतु की लाइफ करीब 25 साल बढ़ सकती है।

6 स्पैन की बेयरिंग धंसी, एक्सपेंशन ज्वाइंट सटने से खतरा

जांच में यह भी सामने आया है कि सेतु के छह स्पैन की बेयरिंग पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर बैठ गई है। इसका दुष्प्रभाव यह हुआ है कि एक छोर पर एक्सपेंशन ज्वाइंट का गैप काफी ज्यादा बढ़ गया है, तो दूसरी तरफ गैप बिल्कुल खत्म होकर ज्वाइंट आपस में सट गए हैं, जो पुल की सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है।

रेलिंग व सड़क कटिंग और बेली ब्रिज हटने के बाद विशेषज्ञ हेली कटर मशीन से चार स्पैन को काटने का काम शुरू करेंगे। इसके बाद नई बेयरिंग डालकर स्टील गर्डर सेट किया जाएगा। गर्डर सेट होने के बाद नए डेक स्लैब की ढलाई होगी, जिसे पूरी मजबूती हासिल करने में करीब 28 दिन का समय लगेगा। मरम्मत का पूरा काम संपन्न होने के बाद विक्रमशिला सेतु पर 160 टन क्षमता के अनुसार आधुनिक लोड टेस्टिंग कराई जाएगी, जिसके आधार पर भविष्य में भारी वाहनों के परिचालन का निर्धारण होगा।

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"विक्रमशिला सेतु के कमजोर हिस्से से लोड हल्का करने के लिए वर्तमान में रेलिंग काटने और सड़क की ऊपरी परत को खोदकर हटाने का कार्य चल रहा है। सभी बेली ब्रिज हटाने और लोड कम होने के बाद हेली कटर से स्लैब काटने का काम शुरू किया जाएगा।"

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— शशि भूषण सिंह, वरीय परियोजना अभियंता, बिहार राज्य पुल निर्माण निगम (खगड़िया प्रमंडल)