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गंगा में विक्रमशिला सेतु का हिस्सा गिरने से जलीय जीवों पर संकट, डॉल्फिन की हो रही विशेष चिंता

Published: Tue, 05 May 2026 01:02 PM (IST)

विक्रमशिला सेतु का हिस्सा गंगा नदी में गिरने से जलीय जीवों, खासकर डॉल्फिन पर गंभीर पर्यावरणीय प्रभाव की आशंका है। ...और पढ़ें

विक्रमशिला सेतु का हिस्सा गंगा में गिरने से डॉल्फिन पर खतरा, वन विभाग करेगा प्रभाव का आकलन

विक्रमशिला सेतु का हिस्सा गंगा में गिरने से डॉल्फिन पर खतरा, वन विभाग करेगा प्रभाव का आकलन

जागरण संवाददाता, भागलपुर। विक्रमशिला सेतु का करीब 34 मीटर हिस्सा ध्वस्त होकर गंगा नदी में समा जाने के बाद जलीय जीवों, विशेषकर डाल्फिन पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह क्षेत्र विक्रमशिला गंगेटिक डॉल्फिन अभयारण्य का हिस्सा होने के कारण पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है।

वन विभाग ने शुरू किया निरीक्षण

घटना के बाद वन विभाग तुरंत हरकत में आ गया है। डीएफओ आशुतोष राज के नेतृत्व में टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि भारी मात्रा में कंक्रीट और सीमेंट का मलबा सीधे गंगा नदी में गिरा है, जिससे जलधारा और तल में बदलाव की आशंका है।

जलीय पारिस्थितिकी पर असर की आशंका

प्रारंभिक आकलन में यह संकेत मिले हैं कि नदी में जमा मलबा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गंगा में रहने वाली गंगा डॉल्फिन जैसे संवेदनशील जीवों के आवास पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

जांच टीम करेगी विस्तृत अध्ययन

डीएफओ ने बताया कि घटना के प्रभावों का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए एक विशेष जांच टीम गठित की जाएगी। यह टीम नदी के अंदर मलबे के फैलाव, उसकी गहराई और जलीय जीवों पर पड़ने वाले प्रभाव का विस्तृत अध्ययन करेगी।

शोर और कंपन का प्रभाव भी जांच में

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुल गिरने के दौरान हुई तेज आवाज और कंपन का डाल्फिन पर क्या प्रभाव पड़ा, इसका भी आकलन किया जाएगा। डॉल्फिन ध्वनि के प्रति अत्यंत संवेदनशील होती हैं, ऐसे में अचानक हुए तेज शोर से उनके व्यवहार और आवास पर असर की संभावना जताई जा रही है।

रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई

जांच टीम अपनी रिपोर्ट जिला मुख्यालय को सौंपेगी, जिसे आगे विभागीय स्तर पर भेजा जाएगा। इसके बाद आवश्यक संरक्षण और सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे, ताकि गंगा के जलीय जीवन पर पड़े संभावित नुकसान को कम किया जा सके।