विक्रमशिला-कटरिया न्यू रेल लाइन का दूसरा टेंडर जारी; 832 करोड़ से बनेंगे स्टेशन भवन, एप्रोच ट्रैक और 26 पुल
Vikramshila Katariya Rail Bridge अंग और कोसी-सीमांचल को जोड़ने वाली विक्रमशिला-कटरिया न्यू डबल रेल लाइन परियोजना के लिए 832 करोड़ ...और पढ़ें

Vikramshila Katariya Rail Bridge जमीन अधिग्रहण व प्रोजेक्ट डिटेल को आप समझ लें।
HighLights
विक्रमशिला-कटरिया न्यू डबल रेल लाइन का दूसरा टेंडर जारी।
832 करोड़ रुपये से स्टेशन भवन, एप्रोच ट्रैक और पुल बनेंगे।
अंग और कोसी-सीमांचल क्षेत्र को मिलेगी सीधी रेल कनेक्टिविटी।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Vikramshila Katariya Rail Bridge अंग और कोसी-सीमांचल क्षेत्र को सीधी रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित विक्रमशिला–कटरिया न्यू डबल रेल लाइन परियोजना को धरातल पर उतारने की दिशा में रेलवे ने एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। मुख्य गंगा रेल पुल के निर्माण के साथ-साथ परियोजना से जुड़े अन्य बुनियादी अधोसंरचना कार्यों के लिए 832 करोड़ रुपये की लागत का दूसरा टेंडर आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया गया है।
इस निविदा के तहत स्टेशन भवनों का निर्माण, उत्तर एवं दक्षिण दिशा में एप्रोच रेल लाइन, पिलर, छोटे-बड़े पुल और 'वाई' (Y) लेग जंक्शन यूनिट का निर्माण कराया जाएगा। इस रेलखंड को दक्षिण दिशा में विक्रमशिला और शिवनारायणपुर रेलवे स्टेशन से जोड़ा जाएगा, जबकि गंगा के उत्तरी छोर पर यह नवगछिया-कटरिया मुख्य रेललाइन से सीधा लिंक होगा।
पूरी रेल परियोजना में दो नए रेलवे स्टेशन—'बटेश्वर स्थान धाम' और 'कालूचक' बनाए जाएंगे। इसके अलावा मुसाफिरों की सहूलियत के लिए दो रेल ओवरब्रिज (आरओबी) और एक अंडरपास का निर्माण भी रेलवे करेगा। रेललाइन प्रारंभिक चरण में सिंगल ट्रैक की होगी, किंतु भविष्य में बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इसे डबल ट्रैक में तब्दील करने के लिए पर्याप्त भूमि व स्पेस छोड़ा जाएगा।
मुख्य ब्रिज के अलावा बनेंगे 26 मध्यम व छोटे पुल
परियोजना के तहत मुख्य गंगा रेल पुल के अतिरिक्त कुल 26 मध्यम और छोटे आकार के पुलों का जाल बिछाया जाएगा:
पहला और दूसरा पुल: स्टील ट्रस रेल ओवरब्रिज (आरओबी) डिजाइन में 102 मीटर स्पैन में तैयार होगा।
तीसरा से छठा पुल: आरसीसी स्पैन पर आधारित होगा, जिनका दायरा 3 से 6 मीटर के बीच रहेगा।
सातवां, नौवां व दसवां पुल: 18.3 मीटर के तीन स्पैन युक्त रेल अंडरब्रिज (आरयूबी) और आरसीसी स्पैन होंगे।
14वां, 15वां व 16वां पुल: 14वें पुल में 30.5 मीटर के तीन आरसीसी गर्डर, 15वें में 32.086 मीटर के 122 स्टील गर्डर और 16वें में 30.5 मीटर के चार आरसीसी गर्डर लगेंगे। शेष 10 पुल भी आरसीसी डिजाइन के बनाए जाएंगे।
पूर्व मध्य रेलवे (ईसीआर) के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) सरस्वती चंद के अनुसार, गंगा पर बनने वाले मुख्य रेल पुल का निर्माण 'इरकॉन' (इंडियन रेलवे कंस्ट्रक्शन कंपनी लिमिटेड) द्वारा कराया जाएगा, जबकि स्टेशन और एप्रोच रूट सहित अन्य सभी सिविल कार्यों के लिए यह दूसरा टेंडर जारी किया गया है।
26 अक्टूबर को प्री-बिड बैठक होगी और 27 जनवरी 2027 को सुबह 11 बजे निविदा खोली जाएगी। वर्क ऑर्डर मिलने के बाद कार्यदायी एजेंसी को 1460 दिनों में काम पूरा करना होगा।
जमीन अधिग्रहण: भागलपुर के इन 16 मौजों की भूमि चिह्नित
रंगरा: 94.21 एकड़
मधोरामपुर: 51.3776 एकड़
तिनटंगा: 49.5425 एकड़
संगलबहिता: 40.7125 एकड़
नंदगोला: 32.33 एकड़
आजमाबाद: 23.3375 एकड़
परशुरामचक: 20.2675 एकड़
भवानीपुर (दो मौजे): 20.1575 एकड़ एवं 0.27 एकड़
सैदपुर: 19.785 एकड़
हवीवपुर: 19.1525 एकड़
सैलेन्द्रा: 14.4075 एकड़
बिशुनपुर: 12.001 एकड़
लौगाई: 11.8075 एकड़
नैनसिंह: 7.98 एकड़
सैलेन्द्रा इंग्लिश: 4.265 एकड़
(कुल रकबा: 421.6036 एकड़)
16 मौजों में 421 एकड़ जमीन का अधिग्रहण, 3 घंटे बचेगा समय
परियोजना के लिए भागलपुर जिले के 16 गांवों में कुल 421.6036 एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया युद्धस्तर पर चल रही है। चयनित भूमि में परती, धनहर, रास्ता और भीठ-दो प्रकार की जमीनें शामिल हैं। रेलवे द्वारा ड्रोन सर्वे के जरिए पूर्व में 18 मौजों में जमीन चिह्नित की गई थी।
कहलगांव बटेश्वर स्थान के पास बनने वाले इस मुख्य रेल पुल के शुरू होने से ट्रेनों को नवगछिया जाने के लिए लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, जिससे यात्रियों के कम से कम 3 घंटे बचेंगे। पीरपैंती-नवगछिया, भागलपुर-साहेबगंज और पटना-हावड़ा रेललाइन देवघर, दुमका और गोड्डा को जोड़ते हुए कुल पांच बड़े बाईपास रूट एक्टिव हो जाएंगे।
भागलपुर सांसद डॉ. निशिकांत दुबे के प्रयासों से गति पकड़ रही इस परियोजना को पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच 'मेगा रेल कॉरिडोर' के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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