बेली ब्रिज हटते ही होगी सेतु के स्ट्रक्चर की जांच; हेली कटर से कटेंगे स्लैब, 3 माह बंद रहेगा भागलपुर का विक्रमशिला पुल
Vikramshila Setu Repair Work Bhagalpur: भागलपुर के विक्रमशिला सेतु पर 30 सितंबर की मध्यरात्रि से परिचालन पूरी तरह बंद होने ...और पढ़ें

भागलपुर का विक्रमशिला पुल का जीर्णोद्धार हो रहा है।
HighLights
30 सितंबर मध्यरात्रि से विक्रमशिला सेतु पर परिचालन पूरी तरह बंद।
बीआरओ 1 अक्टूबर से बेली ब्रिज हटाने का कार्य करेगा शुरू।
हेली कटर से स्लैब कटेंगे, दिसंबर तक पुल का पुनर्स्थापन होगा।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। Vikramshila Setu Repair Work Bhagalpur: पूर्वी बिहार को उत्तरी बिहार और सीमांचल से जोड़ने वाले सामरिक महत्व के विक्रमशिला सेतु पर 30 सितंबर की मध्यरात्रि से परिचालन पूरी तरह बंद होने के बाद पुनर्स्थापन कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया जाएगा। कार्ययोजना के तहत एक अक्टूबर से बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) की 80 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम चारों बेली ब्रिज को हटाने का काम हाथ में लेगी। इस कार्य को एक सप्ताह के भीतर पूरा करने की समयसीमा तय की गई है।
बेली ब्रिज हटाए जाने के तुरंत बाद सबसे अहम चरण सेतु के मूल ढांचे (स्ट्रक्चर) की तकनीकी जांच का होगा। एजेंसी और बीआरओ के विशेषज्ञ इंजीनियर पुल के पायों, बेयरिंग और कंक्रीट फ्रेम की मजबूती का परीक्षण करेंगे, ताकि पुनर्स्थापन कार्य के दौरान और भविष्य में किसी प्रकार का संरचनात्मक खतरा न रहे।
हेली कटर से कटेंगे चार स्पैन, 10 दिन में साफ होगा मलबा
स्ट्रक्चर की जांच में सुरक्षा मानकों की पुष्टि होते ही सेतु के चार स्पैन और क्षतिग्रस्त स्लैब को हटाने का काम शुरू होगा। पारंपरिक ड्रिलिंग या हथौड़ों से तोड़ने के बजाय आधुनिक 'हेली कटर मशीन' का उपयोग किया जाएगा, ताकि सेतु के शेष सुरक्षित हिस्से पर कोई कंपन (वाइब्रेशन) न पहुंचे।
सेतु पुनर्स्थापन तकनीकी कार्ययोजना
फेज 1 (1 से 7 अक्टूबर): बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) द्वारा चारों बेली ब्रिज को सुरक्षित रूप से डिसमेंटल करना।
फेज 2 (तत्काल बाद): सेतु के पिलर, बेयरिंग और मुख्य स्ट्रक्चरल फ्रेमवर्क की गहन तकनीकी व भार वहन क्षमता जांच।
फेज 3 (अगले 10 दिन): हेली कटर मशीन से क्षतिग्रस्त 4 स्पैन व कंक्रीट स्लैब की स्लाइसिंग (कटाई) और 200/120 टन क्रेन से मलबा हटाना।
फेज 4: निर्धारित स्ट्रक्चरल डिजाइन के तहत नए प्री-फैब्रिकेटेड स्टील गर्डर और नए डेक स्लैब की स्थापना।
फेज 5: अंतिम चरण में उच्च गुणवत्ता वाली पीसीसी कंक्रीट ढलाई और 31 दिसंबर तक कार्य पूर्ण करना।
हेली कटर के जरिए स्लैब और स्पैन को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाएगा। इन कटे हुए भारी कंक्रीट टुकड़ों को गंगा से सुरक्षित बाहर निकालने और साइट खाली करने में लगभग 10 दिन का समय लगेगा।
एसपी सिंगला ने जुटाए संसाधन
समानांतर फोरलेन पुल का निर्माण कर रही एजेंसी एसपी सिंगला को ही इस पुनर्स्थापन का दायित्व सौंपा गया है। कंपनी ने बरारी स्थित यार्ड में 200 टन और 120 टन क्षमता की दो विशालकाय हाइड्रोलिक क्रेनें तैनात कर दी हैं। कटे हुए स्लैब के हटने के बाद नए डिजाइन के अनुसार उच्च क्षमता वाले स्टील गर्डर बिछाए जाएंगे, जिसके ऊपर आधुनिक डेक स्लैब रखे जाएंगे। इसके उपरांत अंतिम परत के रूप में पीसीसी कंक्रीट ढलाई की जाएगी।
स्टील गर्डर से लैस होगा पुल
कंपनी ने पटना और गुवाहाटी के बड़े पुलों पर पुनर्स्थापन का अनुभव रखने वाले तकनीकी जानकारों की अलग टीम बनाई है, जो 31 दिसंबर तक इस पूरे प्रोजेक्ट को गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए काम करेगी।
बाबूपुर घाट से चार पहिया या उससे बड़े वाहनों को गंगा पार कराने की सेवा भी उपलब्ध कराई जाएगी। डीएम अलंकृता पांडेय ने अधिकारियों के साथ बैठक कर वैकल्पिक व्यवस्था और पुनर्स्थापन कार्य से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से समीक्षा करने का निर्देश दिया है।
- नवल किशोर यादव, जिला ट्रेजरी अधिकारी
