संवाद सूत्र, बाराहाट, (बांका): बांका से गुजरने वाले 198 किलोमीटर लंबे एनएच-333 ए, पंजवारा में चीर नदी पर बने जर्जर टू लेन पुल को ध्वस्त कर होने वाले फोर लेन पुल का निर्माण अब तक री-टेंडर के पेंच में फंसा है। जबकि 31 करोड की लागत से बनने वाले इस पुल का निर्माण कार्य अक्टूबर 2021 में ही शुरू होना था। पर डिजिटल हस्ताक्षर के पेंच में मामला री-टेंडर में आकर फंस गया। जिसके बाद मार्च 2022 में इसका निर्माण कार्य शुरू कराये जाने की योजना थी। जो अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। जबकि जनवरी 2024 में इस हाईटेक पुल को चालू किये जाने की योजना है। ये पुल बिहार को झारखंड व बंगाल से जोडने वाला महत्वपूर्ण पुल है।

60 साल पूर्व बना ये पुल अब वाहनों का दवाब झेलने की स्थिति में नहीं है। फिर भी इस पुल से होकर हर दिन भागलपुर, बांका, धोरैया, गोडडा, सहित बंगाल व झारखंड के छोटे-बडे करीब दो हजार वाहन गुजरते हैं। ज्ञात हो कि पंजवारा पुल का निर्माण होने से बांका व भागलपुर एवं झारखंड के गोड्डा के बीच यातायात सुलभ होगा। एजेंसी को 24 माह में ही पंजवारा उच्च स्तरीय पुल का निर्माण कार्य पूरा करना होगा।

इपीसी मोड में होगा पुल का निर्माण

पंजवारा उच्च स्तरीय पुल का निर्माण इंजीनियरिंग प्राक्यूरमेंट कंस्ट्रक्शन इपीसी मोड में होगा। एनएच विभाग के मुताबिक पुल बनाने वाली एजेंसी को ही इंजीनियरिंग डिजाइनिंग और कंस्ट्रक्शन कार्य करना होगा। भागलपुर और गोडडा के बीच एनएच 333 ए पर पंजवार में फोरलेन पुल का निर्माण होगा। ज्ञात हो कि बिहार को झारखंड से जोडने वाले पंजवारा पुल का निर्माण 1963 में हुआ था। अब जिसकी एक्सपाइरी डेट भी खत्म हो गई है।

पंजवारा से होकर गुजरेगी टू लेन सड़क

198 किलोमीटर लंबी सड़क सडक शेखपुरा, बरबीघा, सिकंदराबाद, जमुई, झाझा, बांका व पंजवारा होते हुए झारखंड के गोड्डा से गुजरेगी। इसमें बांका के 57 टोला, चांदन के 58 गांव, कटोरिया के 60 गांव, बाराहाट के 51 एवं धोरैया के तीन गांव की जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इधर, एनएन के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि पंजवारा में चालीस करोड की प्राकल्लन राशि थी ,लेकिन अब 31 करोड की लागत से बनने वाले उच्च स्तरीय पुल के टेंडर की प्रक्रिया जारी है। जिसके पूरा होने के बाद संबंधित कार्य एजेंसी को वर्क आर्डर जारी किया जायेगा।

Edited By: Shivam Bajpai