अररिया [आशुतोष कुमार निराला]। Jammu Kashmir Target Killing: रात के 10 बजे ही थे कि कश्मीर से खबर आई कि वहां आतंकवादी हमले में अररिया जिले के दो मजदूर मारे गए हैं और एक घायल है। घायल चुनचुन ऋषिदेव मिर्जापुर रानीगंज के वार्ड नंबर 15 का रहने वाला है। जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर रानीगंज। घायल की गांव की ओर की बढ़ते हुए अंधेरा और गहराता जा रहा था। मातमी चित्कार गूंज उठी थी कि मृतक योगेंद्र के ससुराल पर उसकी सास ने जो कहा, वो कश्मीर के हालातों को बयां करने लगा। उनका कहना था कि अभी-अभी पोतों से बात हुई है। महेश और सुरेश, दोनों वहीं थे, जब आतंकवादी गोलियां बरसा रहे थे किसी तरह बचते हुए उन्होंने अपने आप को कमरे में कैद कर लिया...

करीब पौने 11 बजे हम घायल के गांव में पहुंचते हैं। अमूमन 10 बजे रात तक सो जाने वाला यह गांव पूरी तरह से जाग रहा है। यहां देर शाम में ही घटना की खबर आ चुकी है। हर ओर मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। घायल चुनचुन के घर पर कई लोग जुटे हुए हैं। हर कोई आशंकित है कि कहीं उनके अपने के साथ वहां कश्मीर में कोई अनहोनी न हो जाए।

चुनचुन के घर पर उनके पिता तेजू ऋषिदेव और पूरा परिवार हताशा की मुद्रा में जमीन पर बैठे हुए हैं। चुनचुन की पत्नी की हिचकियां सन्नाटे को चीरती है। काफी दिलासा देने के बाद वह कहती है कि मेरे पति नौ महीने से जम्मू में हैं। यहां से एक ठीकेदार उन्हेें वहां ले गया। कई महीने से हम ठीकेदार को फोन करते रहे हैं कि मेरे पति को वापस ले आए।

ठीकेदार हर बार जल्द वापस लाने का आश्वसान देता है और आज उनको गोली लगने की खबर आ गई। चुनचुन के पिता तभी हताश भाव में कहते हैं कि पता नहीं वह कैसा है... लौटेगा भी या नहीं...! यह बोलते हुए वह भर्रा जाते हैं और पूरा परिवार रोने लगता है।

इस मोहल्ले में रोशनी की कमी है। आवासीय व्यवस्था को देखकर प्रतीत होता है कि यहां गरीबी विकाराल है। ग्रामीण बताते हैं कि यहां हर घर से एक-दो लोग कश्मीर काम करने गए हुए हैं। उमेश ऋषिदेव, गौतम आदि कहते हैं कि ठीकेदार से गांव वालों को वहां मजदूरी के लिए ले गया है। सभी लोग मकान निर्माण में लेबर-मिस्त्री का काम करते हैं।

अब तक तो सब ठीक ही चल रहा था लेकिन अब वहां कश्मीर से आ रही खबर ने हमारी नींद-चैन ही उड़ा दी है। आज यहां शाम में किसी के घर में चूल्हा तक नहीं जला है। किसी ने खाना तक नहीं खाया है। ग्रामीण यह समझ नहीं पा रहे कि अब उन्हें क्या करना चाहिए। आपस में बातचीत के बाद वे पंचायत समिति सदस्य आशीष भगत के पास जाते हैं कि कोई रास्ता दिखाएं क्योंकि 'अंधेराÓ और गहरा रहा है। यहां देर रात तक प्रशासन की ओर से कोई नहीं आया है।

बेहोश होकर गिर रही योगेंद्र ऋषिदेव की मां

कश्मीर में मारे गए दो युवकों में एक योगेंद्र ऋषिदेव का ससुराल भी इसी गांव में है। यहां भी उनके स्वजन के चीत्कार से माहौल गमगीन है। सास कुमिया देवी, ससुर तागो ऋषिदेव किंकर्तव्यविमूढ़ बने हुए हैं। योगेंद्र का घर यहां से करीब पांच किमी दूर बनगामा पंचायत के खैरूगंज में है। हम तागो ऋषिदेव को लेकर खैरूगंज पहुंचते हैं। गांव के करीब पहुंचते ही कई लोगों के क्रंदन की आवाज सुनाई देने लगती है।

यह आवाज योगेंद्र के घर से आ रही है। करीब-करीब पूरे गांव के ही लोग यहां जुटे हुए हैं। योगेंद्र की मां बरनी देवी बार-बार बेहोश होकर गिर जा रही है। उसके दांत पर दांत चढ़ जा रहा है। ऐसा होते ही आसपास के लोग कहने लगते हैं- दांती छोड़ाव नय त एकरो कुछ हो जैते...! होश में आने पर गांव वाले उसे संभालने की कोशिश करते हैं पर वह रोते-छाती पीटते हुए फिर बेहोश हो जाती है। गांव वाले उसे उसके घर से गांव में ही बेटी के घर ले जाते हैं ताकि वहां अधिक केयर हो सके। 

Edited By: Abhishek Kumar