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विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में चमके सऊदी के प्रोफेसर अजमल अली, बिहार में ट्यूशन पढ़ाकर TMBU से की थी PhD

Published: Fri, 23 Oct 2026 09:44 AM (IST)

Prof. Ajmal Ali Top Scientist in Stanford-Elsevier Rankings : तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) से पीएचडी करने वाले प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद ...और पढ़ें

Prof. Ajmal Ali Top Scientist in Stanford-Elsevier Rankings : भागलपुर का भी नाम क‍िया रोशन।

Prof. Ajmal Ali Top Scientist in Stanford-Elsevier Rankings : भागलपुर का भी नाम क‍िया रोशन।

HighLights

  1. प्रो. अजमल अली लगातार चौथे वर्ष शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में।

  2. टीएमबीयू से पीएचडी, भागलपुर में ट्यूशन पढ़ाकर की पढ़ाई।

  3. वर्तमान में सऊदी अरब में प्रोफेसर, पौधों पर कर रहे शोध।

ड‍िज‍िटल डेस्‍क, भागलपुर। Prof. Ajmal Ali Top Scientist in Stanford-Elsevier Rankings : तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) की शैक्षणिक और शोध की उर्वर भूमि ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय फलक पर अपनी प्रतिष्ठा का परचम लहराया है।

टीएमबीयू के वनस्पति विज्ञान (बॉटनी) विभाग से पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने वाले प्रख्यात वनस्पति वैज्ञानिक प्रो. डॉ. मोहम्मद अजमल अली का नाम लगातार चौथे वर्ष दुनिया के प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर रैंकिंग 2026 में शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की वैश्विक सूची में शामिल किया गया है।

मूल रूप से संताल परगना के पाकुड़ निवासी लेकिन भागलपुर की अकादमिक दुनिया में तपकर तैयार हुए प्रो. अजमल अली की यह ऐतिहासिक उपलब्धि टीएमबीयू के शिक्षकों, शोधार्थियों और पूरे अंग क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण बनकर सामने आई है।

भागलपुर में ट्यूशन पढ़ाकर जुटाते थे किताबों का खर्च

प्रो. अजमल अली का यहां तक का सफर सहज नहीं रहा, बल्कि यह अभावों पर दृढ़ संकल्प की विजय की दास्तान है। शिक्षक पिता मोहम्मद अब्बास के सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच जब वे उच्च शिक्षा के लिए भागलपुर पहुंचे, तो उनके सामने आर्थिक तंगी सबसे बड़ी बाधा थी।

टीएमबीयू से स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई के दौरान उन्होंने कभी अपनी तंगहाली को सपनों के आड़े नहीं आने दिया। वे भागलपुर में स्कूली बच्चों को निजी ट्यूशन पढ़ाते थे और उससे मिलने वाले सीमित पैसों से अपनी फीस, शोध और किताबों का खर्च पूरा करते थे। वर्ष 2006 में उन्होंने टीएमबीयू के वनस्पति विज्ञान विभाग से कठिन परिश्रम के दम पर अपनी पीएचडी पूरी की।

टीएमबीयू से दक्षिण कोरिया और फिर रियाद तक का सफर

भागलपुर से पीएचडी की डिग्री हासिल करने के बाद उनके अंतरराष्ट्रीय शोध के द्वार खुल गए। उन्हें दक्षिण कोरिया के डेजान स्थित प्रतिष्ठित कोरिया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ बायोसाइंस एंड बायोटेक्नोलॉजी (केआरआईबीबी) में पोस्टडॉक्टरल अनुसंधान का अवसर मिला। वहां आधुनिक प्रयोगशालाओं में अत्याधुनिक तकनीकों पर काम करने के बाद उनके वैज्ञानिक अनुभव को नया विस्तार मिला।

इसके बाद वर्ष 2010 में वे सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग सऊद विश्वविद्यालय से जुड़ गए। वर्तमान में प्रो. अली इस अंतरराष्ट्रीय विवि के कॉलेज ऑफ साइंस अंतर्गत वनस्पति विज्ञान एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग में बतौर प्रोफेसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं और दर्जनों अंतरराष्ट्रीय शोध परियोजनाओं का नेतृत्व कर रहे हैं।

पौधों के जीनोमिक्स और सूखा सहनशीलता पर अहम शोध

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर द्वारा उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, प्रो. अजमल अली को प्लांट बायोलॉजी और बॉटनी के क्षेत्र में दुनिया भर में 2,332वीं रैंक मिली है, जबकि उनकी ऑल-ओवर ग्लोबल रैंक 1,35,468 दर्ज की गई है। उनका मुख्य अनुसंधान पौधों की पहचान, वर्गीकरण, आनुवंशिक विविधता और विकासात्मक संबंधों पर केंद्रित है।

वे डीएनए अनुक्रमण, जीनोमिक्स और आणविक वर्गिकी जैसी आधुनिक तकनीकों के जरिए यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि मरुस्थलीय और शुष्क जलवायु वाले पौधे अत्यधिक तापमान और सूखे की मार को कैसे सह लेते हैं। उनका यह कार्य जलवायु परिवर्तन के मौजूदा दौर में फसलों के संरक्षण के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

भागलपुर के शोधार्थियों के लिए बने प्रेरणास्रोत

प्रो. अजमल अली का कहना है कि विपरीत परिस्थितियां किसी भी विद्यार्थी की अंतिम सीमा तय नहीं कर सकतीं। यदि मन में सीखने की सच्ची लगन और कठोर परिश्रम का जज्बा हो, तो सीमित संसाधनों के बीच भी वैश्विक मुकाम हासिल किया जा सकता है।

टीएमबीयू के वनस्पति विज्ञान विभाग के शिक्षकों और शोध छात्रों ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि प्रो. अजमल की यह अंतरराष्ट्रीय ख्याति भागलपुर के युवाओं को शोध और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए नई ऊर्जा देगी।

 

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