विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

भागलपुर: राघोपुर तटबंध कटा तो मचेगी तबाही, गांवों के बीचोंबीच बहने लगेगी गंगा; हजारों परिवार परेशान

Published: Thu, 03 Sep 2026 02:23 PM (IST)

राघोपुर में गंगा का कटाव घरों और खेतों को निगल रहा है, जिससे हजारों परिवार विस्थापित हो रहे हैं। तटबंध ...और पढ़ें

राघोपुर तटबंध को ठीक करते मजदूर। जागरण

राघोपुर तटबंध को ठीक करते मजदूर। जागरण

दीपनारायण सिंह दीपक, खरीक (भागलपुर)। राघोपुर में गंगा का कटाव अब सिर्फ जमीन नहीं निगल रहा, बल्कि लोगों के आशियाने और वर्षों की मेहनत भी अपने साथ बहा रहा है। तटबंध पर लगातार बने दबाव के बीच बिहपुर, खरीक और नवगछिया की बड़ी आबादी की नजर इसकी सुरक्षा पर टिकी है।

ग्रामीणों को आशंका है कि तटबंध गंगा के दबाव में कटा तो धारा गांवों के बीचोंबीच पहुंच सकती है और हजारों परिवारों के सामने बाढ़, विस्थापन और जीवन बचाने की चुनौती खड़ी हो जाएगी।

दूसरी ओर, कटाव की जद में आए परिवार घर खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर निकल रहे हैं। कोई ट्रैक्टर, कोई नाव तो कोई ठेला पर जरूरी सामान लादकर सुरक्षित ठिकाने की तलाश में है।

79629614

जिस घर को बनाने में बीत गई जिंदगी, उसे छोड़ना पड़ रहा

कटाव की जद में आए परिवारों के लिए सबसे मुश्किल घड़ी वह है, जब उन्हें अपने ही घर से जरूरी सामान निकालकर जाना पड़ रहा है। किसी ने ईंट-ईंट जोड़कर घर बनाया था तो किसी ने वर्षों की कमाई से पक्का आशियाना खड़ा किया था। अब वही घर गंगा की तेज धार के सामने असुरक्षित हो गया है।

कहीं दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं तो कहीं कटाव आंगन तक पहुंच गया है। खतरे को देखते हुए परिवार ट्रैक्टर, नाव और ठेला पर सामान लादकर सुरक्षित स्थानों की ओर निकल रहे हैं।

जिस चौखट से कभी बेटियों की विदाई हुई थी, जिस आंगन में बच्चों की किलकारियां गूंजी थीं, आज उसी चौखट को छोड़ते समय लोगों के कदम भारी हैं।

79629875

सामान बचा रहे हैं, यादें कैसे बचाएंगे?

एक कटाव पीड़ित सामान समेटते हुए कहते हैं, "हमने सपने में भी नहीं सोचा था कि जिस घर में पूरी जिंदगी गुजारने की उम्मीद थी, एक दिन उसी घर को छोड़कर सड़क पर जाने की मजबूरी होगी।"

दूसरे ग्रामीण की आंखें नम हो जाती हैं। कहते हैं, "घर चला जाएगा तो नया घर कहीं बना लेंगे, लेकिन इस घर से जुड़ी यादें कहां से लाएंगे? इसी आंगन में हमारा बचपन बीता, बच्चों ने खेला और परिवार की कई पीढ़ियां रहीं।"

ग्रामीणों के लिए नुकसान सिर्फ मकान तक सीमित नहीं है। घर के साथ खेत, मवेशियों की जगह, अनाज, जरूरी सामान और वर्षों की मेहनत से जुटाई गई पूंजी भी खतरे में है।

79627723

जिस आंगन में होती थी छठ पूजा, वहां अब गंगा की नजर

ग्रामीण बताते हैं कि जिस आंगन में हर वर्ष छठ पूजा होती थी, त्योहारों पर घर सजता था और रिश्तेदार जुटते थे, आज उसी जगह गंगा की धारा पहुंचने का खतरा है। कल तक जिस जमीन पर किसान फसल उगाकर परिवार का पेट पालते थे, आज वही जमीन धीरे-धीरे गंगा में समाती जा रही है।

खेतों को अपनी आंखों के सामने कटते देख किसानों के सामने सवाल है कि जमीन ही नहीं बचेगी तो परिवार का भविष्य कैसे बचेगा।

बच्चों को लेकर घर से निकलते समय टूट जा रहे माता-पिता

सबसे दर्दनाक दृश्य तब दिखाई देता है, जब परिवार अपना घर खाली कर बच्चों को लेकर निकलता है। बच्चे बार-बार पीछे मुड़कर अपने घर को देखते हैं। जिस घर को वे अपना संसार समझते थे, उसे छोड़ना उनके लिए भी आसान नहीं है।

एक महिला कहती हैं, "बच्चों को क्या बताएं कि अब यह घर हमारा नहीं रहेगा। कल तक यही हमारा संसार था, आज इसे छोड़कर जाने की मजबूरी है।"

गंगा सिर्फ जमीन नहीं, पीढ़ियों की पहचान निगल रही

राघोपुर के ग्रामीणों का कहना है कि पहले खेत कटे, फिर रास्ते और अब घरों की बारी आ गई है। कटाव इसी तरह जारी रहा तो आने वाले दिनों में गांव का भूगोल ही बदल सकता है।

तटबंध के दूसरी ओर बसे परिवारों की चिंता और बढ़ गई है। लोगों की नजर लगातार तटबंध और गंगा की धार पर है। गंगा की हर तेज लहर के साथ लोगों की धड़कनें बढ़ जाती हैं।

तटबंध बचा तो गांव बचेंगे, नहीं तो बदल जाएगा पूरा इलाका

ग्रामीणों के लिए राघोपुर तटबंध सिर्फ मिट्टी का बांध नहीं, बल्कि बड़ी आबादी की सुरक्षा की आखिरी दीवार है। इसके कमजोर पड़ने या टूटने की स्थिति में गंगा की धारा आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ सकती है। अब लोगों की आंखों में एक ही सवाल है- क्या तटबंध को समय रहते पूरी तरह सुरक्षित किया जा सकेगा?

आज राघोपुर में सिर्फ घर नहीं टूट रहे, बल्कि पीढ़ियों की जमा पूंजी और यादें भी खतरे में हैं। तटबंध बचा तो आशियाने, खेत और गांव बचेंगे। तटबंध टूटा तो सिर्फ पानी नहीं आएगा, बल्कि बड़ी आबादी के सामने जिंदगी बचाने की जद्दोजहद शुरू हो जाएगी।

यह भी पढ़ें- Bihar Weather Update : भागलपुर में मानसून मेहरबान, हफ्तेभर में 178.8 मिमी बारिश से 5 डिग्री लुढ़का पारा

यह भी पढ़ें- नीचे उफनती गंगा, ऊपर से मूसलाधार बारिश: भागलपुर में खतरे के निशान से महज 26 सेमी दूर जलस्तर; सड़कों पर 3 फीट पानी