संस,जानकीनगर (पूर्णिया) : करीब डेढ़ दर्जन भूमिहीन अनुसूचित जाति परिवारों के लिए न तो आज तक जमीन की व्यवस्था की जा सकी है न आवास का। फलत: वे लोग वर्षों से राजकीय अनुसूचित जाति अंबेडकर आवासीय उच्च विद्यालय जानकीनगर परिसर में चारदिवारी से सटे अपना आशियाना बनाकर रहने को विवश हैं। पीडि़तों ने बताया कि वे लोग विद्यालय की चहारदीवारी में अभिशप्त जीवन जीने को विवश हैं। जानकारी दी गई कि वर्षों पूर्व तत्कालीन अनुमंडल प्रशासन बनमनखी के प्रयास से उनलोगों को जमीन का पर्चा आवंटित किया गया परंतु आवंटित भू-खंड जमजमाव वाला क्षेत्र होने के कारण वह बसने योग्य नहीं था।

विद्यालय में पठन-पाठन होता है प्रभावित

उक्त विद्यालय की स्थापना वर्ष 1952 में हुई थी। स्थापना काल से ही यहां करीब डेढ़ दर्जन अनुसूचित जाति परिवार के लोग अपने बच्चों के साथ रह रहे हैं। कालान्तर में इनमें से कुछ लोग दूसरे दूसरे जगह पर जाकर बस गए। पर अब भी करीब एक दर्जन परिवार यहां रह रहे हैं। इससे विद्यालय में पठन-पाठन भी प्रभावित होता है। पढ़ाई लिखाई कर रहे छात्रों का कहना है कि विद्यालय की जमीन पर अतिक्रमण बरकरार है। फलस्वरूप स्वस्थ वातावरण एवं पढ़ाई लिखाई का उपयुक्त माहौल हम छात्रों को नहीं मिल रहा है।

कुछ दिन पूर्व इस विद्यालय में पहुंचे बनमनखी के विधायक कृष्ण कुमार ऋषि, अनुमंडल पदाधिकारी नवनील कुमार, एसडीपीओ कृपाशंकर आजाद एवं अंचलाधिकारी ने वस्तुस्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने विद्यालय के पीछे की खाली पड़ी जमीन पर उन लोगों को बसाने का निर्णय लिया तथा उसकी पैमाईश कर उसे चिन्हित भी किया। लेकिन दुर्भाग्यजनक है कि उक्त जमीन पर भी टोले के ही कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया। विद्यालय के पीछे की बस्ती के लोगों का कहना था कि वह उनलोगों की है। जरूरतमंदों का कहना है कि प्रशासन को क्रय नीति के तहत जमीन खरीद कर उनलोगों को बसाने के अधिकार सरकार ने दिया है बावजूद उन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

क्या बोले पदाधिकारी

अंचलाधिकारी अर्जुन कुमार विश्वास ने बताया कि विद्यालय परिसर में बसे अतिक्रमणकारियों को नोटिस भेजा गया है। इन लोगों के बसने के लिए चार-चार डिसमिल जमीन भी आबंटित कर दी गई है। उन्होंने कहा कि काफी लंबे समय से यहां रह रहे अनुसूचित जाति परिवारों के सदस्यों के पुनर्वास की समस्या का समाधान कर लिया गया है। अब वे लोग विद्यालय की जमीन खाली कर देंगे।

Edited By: Shivam Bajpai