भागलपुर [जेएनएन]। भागलपुर पूर्व रेलवे का तीसरा और मंडल का पहला कमाऊ स्टेशन है। इसके बाद भी पिछले आठ सालों में यहां से ट्रेनों की संख्या नहीं बढ़ी। अलबत्ता कटौती जरूर की गई। वजह जो भी हो। हकीकत यह है कि भागलपुर स्टेशन उपेक्षा का शिकार है। पांच सालों में यात्रियों की संख्या में तीन गुना इजाफा हुआ लेकिन इस हिसाब से सुविधाएं नहीं बढ़ीं। अभी भी महानगरों के लिए यहां से गिने-चुने ट्रेन हैं। पहले यहां से मंडल कार्यालय खोले जाने के प्रस्ताव रद हुआ और अब ट्रेनें भी हटने लगीं।

भागलपुर से दिल्ली के लिए महज विक्रमशिला

भागलपुर से देश की राजधानी के लिए रोजाना एक ही ट्रेन है। विक्रमशिला एक्सप्रेस ही ऐसी ट्रेन है जो प्रतिदिन चलती है। हालांकि मालदा टाउन से फरक्का एक्सप्रेस का परिचालन होता है। पर, समय ज्यादा लगने के कारण यात्री इससे परहेज करते हैं। ब्रह्मपुत्र मेल डिब्रूगढ़ से चलने की वजह से हमेशा हाउसफुल रहती है। गरीब रथ एक्सप्रेस सप्ताह में तीन दिन चलती है। एक ही रैक से परिचालन होने के कारण यह ट्रेन एक ही दिन समय पर चलती है। भागलपुर-नई दिल्ली साप्ताहिक एक्सप्रेस का रूट बदल दिया गया है। मालदा-नई दिल्ली सप्ताह में दो दिन, मालदा-आनंद विहार साप्ताहिक चलती है।

दक्षिण भारत और जम्मूतवी के लिए साप्ताहिक ट्रेन

यहां के युवा चेन्नई, विशाखापतनम, भुवनेश्वर में पढ़ाई करते हैं। भागलपुर से बेंगलुरु के लिए महज एक ट्रेन है वह भी सप्ताह में एक दिन चलती है। इस कारण यात्रियों को परेशान होना पड़ता है। वहीं, जम्मूतवी के लिए भी एक ही ट्रेन है। माता वैष्णो देवी जाने वाले लोगों को किऊल और पटना जाकर ट्रेन पकडऩी पड़ती है।

मुंबई के लिए सप्ताह में तीन दिन ट्रेन

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के लिए भागलपुर से सप्ताह में एक तीन दिन ही ट्रेन है। जबकि इस रूट पर यात्रियों की भीड़ ज्यादा है। यही हाल राजस्थान का है। राजस्थान के लिए एक ट्रेन साप्ताहिक है। गुजरात के लिए सप्ताह में दो दिन भागलपुर-सूरत एक्सप्रेस है।

यात्रियों के दबाव के आगे सुविधाएं नहीं

वर्तमान में करीब 90 हजार के आसपास यात्री प्रतिदिन आवागमन करते है। वहीं तीन साल पहले यह संख्या 70 से 75 हजार थी। जंक्शन पर तीन सालों में यात्रियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। जिस तरह से यात्री बढ़े हैं, ट्रेनें नहीं बढ़ सकीं।

42 ट्रेनें चलती है रोज

भागलपुर-किऊल रेल सेक्शन पर अप-डाउन में सुपरफास्ट, एक्सप्रेस, मेल और पैसेंजर मिलाकर 42 ट्रेनें चलती हैं। इनमें से कुछ गाडिय़ां साप्ताहिक और त्रि-साप्ताहिक है। यहां से लंबी दूरी तक जाने वाली सभी गाडिय़ां सालों पर फुल रहती है। इसी तरह भागलपुर-बांका-हंसडीहा सेक्शन पर सात जोड़ी ट्रेनें पर प्रतिदिन चलती हैं। दिल्ली, यूपी, झारखंड, बेंगलुरु, मुंबई की तरफ जाने वाली ट्रेनों का जनरल कोच की हालत और खराब है। जनरल कोच में सीट से दोगुने से भी ज्यादा यात्री सफर करते हैं, लेकिन इसे देखने वाला कोई नहीं है।

विक्रमशिला, साप्ताहिक, एलटीटी से हटा लिए गए कोच

भागलपुर से आनंद विहार टर्मिनल के बीच चलने वाली विक्रमशिला एक्सप्रेस मालदा मंडल की प्रमुख ट्रेन है। यह गाड़ी साल भर फुल रहती है। इस ट्रेन का पुराने रैक आइएफसी कोच के साथ परिचालन होता था। तब इसमें जनरल क्लास की चार बोगियां रहती थीं। 2016 जुलाई से में इसमें एलएचबी कोच जोडऩे के बाद जनरल कोचों की संख्या घटाकर दो कर दी गईं। मजदूर तबके और रोजगार करने वाले लोगों के लिए यह पसंदीदा ट्रेन है। दो कोच में रोज 212 सीट पर 600 से 700 लोग सफर करते हैं।

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