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बिहार: गंगा की लहरों में टूटी मां की उम्मीद, नाव में जन्मे बच्चे ने 20 मिनट में तोड़ा दम

Published: Sat, 10 Oct 2026 02:56 PM (IST)

भागलपुर में गंगा नदी में एसडीआरएफ की नाव पर एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन चिकित्सा सहायता में ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

HighLights

  1. गंगा नदी में नाव पर हुआ प्रसव।

  2. चिकित्सा सहायता न मिलने से नवजात की मौत।

  3. परिजनों ने डॉक्टरों की देरी पर उठाया सवाल।

जागरण संवाददाता, भागलपुर। गंगा की लहरों पर एक मां ने बेटे को जन्म दिया, लेकिन उसकी खुशियां महज 15 से 20 मिनट में मातम में बदल गईं। प्रसव पीड़ा से कराह रही संगीता कुमारी को बेहतर इलाज के लिए मायागंज अस्पताल लाया जा रहा था।

शुक्रवार सुबह एसडीआरएफ की नाव पर ही उसने बेटे को जन्म दिया। स्वजन का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद भागलपुर घाट पर समय से चिकित्सक और नर्स नहीं पहुंचे। जन्म के कुछ ही देर बाद नवजात की मौत हो गई। जिस घर में किलकारी गूंजने की उम्मीद थी, वहां मातम छा गया।

इस्माइलपुर प्रखंड के जय मंगल टोला निवासी ज्योतिष कुमार की 24 वर्षीय पत्नी संगीता को चमकी की बीमारी भी थी। उसके ससुर भोला मंडल ने बताया कि गुरुवार रात प्रसव पीड़ा शुरू हुई।

शुक्रवार सुबह करीब 9:30 बजे एसडीआरएफ के इंस्पेक्टर कुमार नीलू की मदद से उसे जाह्नवी चौक घाट से भागलपुर लाने की व्यवस्था की गई।

करीब 20 मिनट में नाव बियाडा घाट पहुंची। इस दौरान संगीता की हालत बिगड़ती जा रही थी और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत थी।

एसडीआरएफ के इंस्पेक्टर ने बताया कि महिला की गंभीर स्थिति की सूचना तत्काल हवलदार, आपदा मित्र और जिला नियंत्रण कक्ष को दी गई थी।

एंबुलेंस, चिकित्सक और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया था। इसी दौरान एसडीआरएफ की बोट पर ही प्रसव हो गया।

स्वजन के अनुसार, सुबह करीब 9:50 बजे संगीता ने बेटे को जन्म दिया। करीब 15 से 20 मिनट बाद नवजात की मौत हो गई।

महिला के ससुर का कहना था कि यदि चिकित्सक और नर्स समय पर पहुंच जाते, तो शायद बच्चे की जान बच सकती थी। पहले से एक बेटी की मां संगीता और उसके परिवार के लिए यह बड़ा सदमा है।

घाट पर प्रसव के लिए विशेष व्यवस्था नहीं

बियाडा घाट शिविर में तैनात चिकित्सक डॉ. अजीम ने बताया कि वहां प्रसव के लिए विशेष व्यवस्था नहीं है और महिला चिकित्सक भी तैनात नहीं हैं। शिविर में सर्दी, खांसी और दर्द जैसी सामान्य बीमारियों की दवाएं उपलब्ध हैं।

उन्होंने बताया कि सूचना मिलने पर एक नर्स महिला को देखने गई थी, लेकिन तब तक नवजात की मौत हो चुकी थी। एसडीआरएफ इंस्पेक्टर के अनुसार, नाव से घाट तक लाने के दौरान महिला दर्द से बेचैन थी।

कुछ एएनएम भी मदद के लिए आगे आईं, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। घटना के बाद घाट पर लोगों की भीड़ जुट गई। बाद में संगीता को एंबुलेंस से मायागंज अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है।

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