भागलपुर [रजनीश]। डरेंगे नहीं, हम इससे भी लड़ लेंगे..। किसी भी आफत की स्थिति में अपने देश का यह हौसला यूं ही नहीं है और इसे ताकत देते हैं अपने वे लोग, जो कहीं भी किसी भी रूप में मिल जाएंगे। मिथुन उन्हीं में एक हैं, जिन्हें इस समय परिवार से कहीं अधिक फिक्र देश के लोगों की है।

रेलवे ने जैसे ही कोरोना के खतरे को लेकर अलर्ट किया, सफाईकर्मी मिथुन ने अपनी जवाबदेही किसी के कहे बिना खुद ही बढ़ा ली। ड्यूटी का घंटा भले आठ हो, पर उनके लिए नहीं। वे इस समय घड़ी नहीं देख रहे। बारह घंटा हो या चौदह घंटा, कोई फर्क नहीं पड़ता है। सुबह खाना खाकर घर से निकलते हैं और सीधा स्टेशन। घर में पत्नी और एक बच्चा है, पर अभी उनके लिए वक्त नहीं।

मिथुन प्लेटफॉर्म पर राइडोज मशीन से सफाई करते हैं। तीन पहिये वाली इस मशीन में 50 लीटर का बॉक्स है, जिसमें पानी, केमिकल और सैनिटाइजर का मिश्रण डालकर सफाई करते हैं। वे इसे खुद चलाते हैं। आठ घंटे से ज्यादा की ड्यूटी..। मिथुन हल्की मुस्कान के साथ बीच में ही बोल उठते हैं-‘अपना ही लोग ट्रेन से आता-जाता है न..।’ इस समय तो सबको चिंता करनी होगी। जितनी सफाई होगी, खतरा उतना कम होगा। वे खुद भी मास्क लगाए हुए हैं और यात्रियों को भी एक-दूसरे से दूरी बनाकर रहने की सलाह देते हैं। स्टेशन और ट्रेन में गंदगी नहीं फैलाने की अपील करते हैं। सफाई के प्रति उनका यह जुनून देख अन्य कर्मी भी प्रेरित हैं। सफाई पर्यवेक्षक विष्णु भी मिथुन की तारीफ करते हैं। वे बताते हैं कि पहले तीन शिफ्ट में सफाई होती थी। अभी हर दो घंटे में सफाई की जा रही है। रेलवे यार्ड में बुधवार को भी ट्रेनों में सैनिटाइजर का छिड़काव किया गया।

सफाई के लिए उपलब्ध संसाधन

-01 राइडोज मशीन

-02 स्क्रबर मशीन

-01 मिनी स्क्रबर

-50 लीटर पानी-केमिकल राइडोज मशीन में भरा जाता है

-150 मीटर दायरे में 50 लीटर से होती है सफाई

-10 लीटर वाली मशीन से 25 मीटर होती है सफाई

-40 सफाई कर्मी

-03 शिफ्ट में दो-दो घंटों पर हो रहा सफाई

Posted By: Dilip Shukla

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