संवाद सहयोगी, मुंगेर। सदर अस्पताल में रोजाना निकलने वाले मेडिकल वेस्ट का निस्तारण नियमानुसार नहीं हो रहा है। कोरोना की तीसरी लहर के बीच अस्पताल में भर्ती मरीजों में नए संक्रमण का खतरा बढ़ गयाहै। खुलेआम मेडिकल वेस्ट को अस्पताल परिसर में फेंक कर जलाया जा रहा है। लेकिन इस पर अस्‍पताल प्रशासन की ओर से ध्‍यान नहीं दिया जा रहा है। 

- अस्पताल परिसर में ही मेडिकल में नष्ट हो रहा कूड़ा, मेडिकल वेस्ट का नहीं होता नियमानुसार निस्तारण

इमरजेंसी वार्ड, दवा काउंटर, टीकाकरण केंद्र के निकट मेडिकल फेंकने के लिए विभाग ने डस्टबिन रखा है। उठाव नहीं होने के कारण डस्टबिन भर जाने के बाद डस्टबिन से मेडिकल वेस्ट निकलकर परिसर में बिखर जाता है। निजी अस्पतालों की कौन कहे सदर अस्पताल में भी बायोवेस्ट के निस्तारण के निर्धारित प्रोटोकाल का पालन नहीं किया जाता है, बल्कि अस्पताल के सफाईकर्मी कचरा इक_ा होने पर उसमें आग लगाते हैं। इससे आसपास के लोगों व भर्ती मरीजों का दम भी घुटने लगता है।

मेडिकल कचरा जलाने से नुकसान

सदर अस्पताल के चिकित्सक डा. रौशन, डा. अजय ने बताया कि मेडिकल कचरा जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है। धुएं से अस्पताल में भर्ती मरीज और नवजात शिशुओं की सेहत को खतरा हो सकता है। आसपास रहने वाले लोगों में भी संक्रमण फैलने का खतरा अधिक रहता है।

साफ-सफाई पर विशेष ध्‍यान देने की मांग 

कोरोना काल में लोग संक्रमण को लेकर डरे-सहमे हैं। लोगों ने अस्‍पताल प्रशासन से साफ-सफाई को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की मांग की है। साथ ही मेडिकल कचरा का बेहतर तरीके से प्रबंधन करने के लिए कदम उठाए जाने की जरूरत है।  

-मेडिकल कचरा को किसी भी सूरत में जलाना नहीं चाहिए। इस संबंध में जानकारी नहीं है, ऐसा हो रहा है तो यह गलत है। इस पर हर हाल में रोक लगेगी। संबंधित जिम्मेदार से पूछताछ की जाएगी। -डा. हरेन्द्र कुमार आलोक , सिविल सर्जन।

 

Edited By: Abhishek Kumar