संवाद सहयोगी, नवगछिया। पुत्र की चिता की आग अभी ठंडी नहीं हुई थी कि नाव डूबने से पिता की भी मौत हो गई। रंगरा चौक प्रखंड के सहोड़ा गांव के कोसी नदी के उस पार नाव हादसे से महेश्वरी यादव का पूरा परिवार ही उजड़ गया। महेश्वरी यादव शव मिलने की सूचना पाकर घर में कोहराम मच गया। महिलाओं की विलाप से पूरा मोहल्ला दहल रहा था। महेश्वरी यादव की पत्नी कविता देवी ने रोते हुए बताई कि पुत्र की चिता की आग भी ठंडी नहीं हुई थी कि पिता की भी नाव डूबने से मौत हो गई।

दो माह के पूर्व पुत्र रमेश यादव की रंगरा चौक ओपी क्षेत्र के भवानीपुर टावर चौक पर मोटरसाइकिल दुर्घटना में वाहन के द्वारा टक्कर मारने से रमेश की मौत हो गई थी। रमेश का मोटरसाइकिल अभी रंगरा ओपी में ही हैं। इकलौते पुत्र की मौत से पिता टूट से गए थे। लेकिन पेट पालने के लिए काम तो करना ही पड़ता हैं। महेश्वरी यादव के पास पांच भैंस थी। भैंस को उस पार में ही रखते थे। भैंस का चारा खरीदकर खिलाते थे। भैंस के दूध से परिवार का पालन करते थे। शुक्रवार की सुबह भैंस का दूध लेकर घर वापस नाव से आ रहे थे कि नाव डूब गई। जिसमें तीन लोग लातपा हो गए। लापता व्यक्ति में महेश्वरी यादव भी थे। उसका शव एसडीआरएफ तिनघड़िया के पास बरामद किया हैं।

वहीं लापता अवधेश यादव के पुत्र सुमित कुमार यादव भी हैं। सुमित कुमार यादव बनारसी लाल सर्राफ वाणिज्य महाविद्यालय से स्नातक की पढा़ई पूरी कर लिया था। वह बिहार पुलिस की बहाली की तैयारी कर रहा था। बिहार पुलिस की परीक्षा दे चुका था। शारीरिक परीक्षा की तैयारी भागलपुर में रहकर करना चाहता था। इसके लिए वह अपना भागलपुर में डेरा भी ले लिया था। मां का रोते रोते हालत काफी खराब हैं। सुमित दो भाइयों में छोटा था। वह पूरे घर का लाडला था। मां लालमनी देवी अपने छोटे बेटे का इंतजार कर रही हैं। वह सूनी आंखों से बार बार घर के दरवाजे की देखती हैं। कोई आता हैं तो लगता हैं उसका बेटा ही आ गया। बड़ा भाई नीरज कुमार, बहन निक्की कुमारी, शिवानी कुमारी का रो रो कर बुरा हाल हैं।

पिता सदानंद यादव प्राइवेट नाव से अपने पुत्र को कोसी नदी में खोज रहे हैं। सुमित कुमार का दो बीघा जमीन उस पार हैं। दो भैस हैं। पिता दैहारी का काम करते हैं। कोसी नदी के उस पार दूध इक_ा कर घर लाते हैं। घर में दूध का पनीर बनाते थे। पनीर को बजार में बेच देते थे।

छेदी यादव के सामने ही उसका भाई मेदी यादव कोसी नदी में बह गया। छेदी यादव ने भाई को बचाने के लिए नाव का पतवार भी फेंका था। लेकिन वह पतवार नहीं पकर सका। कोसी नदी के तेज लहरों में बह गया। वह अपनी आंखों से भाई को बहते हुए देख कर भी नहीं बचा पाया था। जो नाव दुर्घटना हुई उस नाव छेदी व मोदी यादव दोनो था। नाव का नाविक मेदी यादव था। नाव डूबने से छेदी यादव तो किसी तरह बच गया। लेकिन मेदी यादव बच नहीं पाया। दोनो भाइयों ने कोसी नदी के उस पार से दूध लाने के लिए नाव रखा था। दोनों भाई दूध लेकर आ रहे थे कि तेज हवा के कारण नाव डूब गई। छेदी यादव किसी तरह बच गया। लेकिन मेदी यादव डूब गया।

Edited By: Shivam Bajpai