खगडिय़ा [निर्भय]। माकपा नेता स्‍व. जगदीशचंद्र बसु उर्फ मुन्ना मुखिया की पुत्री आकांक्षा बसु ने अलौली प्रखंड के मघौना पंचायत से मुखिया पद पर जीत का परचम लहराया है। उन्होंने मात्र 21 वर्ष की उम्र में जीत हासिल की है। जो अबतक का खगडि़या जिले में रिकार्ड है। आकांक्षा को 4016 मत मिले। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी मीना देवी ने 1246 मत प्राप्त किया। आकांक्षा 2770 वोटों जीतकर मुखिया बन गई हैं। 

आकांक्षा बसु के पिता स्‍व. जगदीशचंद्र बसु उर्फ मुन्ना मुखिया वर्ष 2000 से 2005 तक मेघौना पंचायत के मुखिया रहे। उनकी हत्या पहले लाकडाउन के दौरान 11 अप्रैल 2020 को अपराधियों ने गोली मारकर कर दी थी। उनकी हत्या तब की गई थी, जब वे कोरोना को लेकर एक जागरूकता कार्यक्रम से वापस लौट रहे थे।

अपराधियों ने उन्हें मेघौना पंचायत की कोकराहा के पास गोली मारी थी। जगदीशचंद्र बसु अपराधियों के खिलाफ लगातार संघर्ष करते रहे। मुखिया पद से विजयी परचम लहराने के बाद आकांक्षा बसु ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे। पिताजी की शहादत बेकार नहीं जाएगी। गरीबों के हक-हकूक को लेकर लड़ाई जारी रहेगी। आकांक्षा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा में सुधार को लेकर भी वे प्रयास करेंगे। मेघौना जैसे क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवा बदहाल है, जिसमें सुधार की जरूरत है।

आकांक्षा ने त‍िलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक की है। उनकी जीत पर माकपा विधायक दल के नेता अजय कुमार, माकपा के खगडिय़ा जिला सचिव संजय कुमार ने बधाई दी है। कहा है कि जगदीशचंद्र बसु के अधूरे सपनों को आकांक्षा बसु पूरा करने का काम करेंगी।

पिता की हत्या बाद राजनीति में आईं आकांक्षा

आकांक्षा बसु तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से भौतिकी में स्नातक करने के बाद आगे की पढ़ाई को लेकर दिल्ली चली गईं थी। वहां वह प्रतियोगी परीक्षाओं तैयारी कर रहीं थी। आकांक्षा के पिता जगदीशचंद्र बसु की 11 अप्रैल 2020 को जब अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी, उसी समय उन्होंने अपने पिता के अधूरे सपनों को पूरे करने का संकल्प लिया। उन्होंने मेघौना पंचायत से मुखिया पद पर चुनाव लडऩे का ऐलान किया। आकांक्षा की शादी अभी नहीं हुई है।

Edited By: Dilip Kumar Shukla