संवाद सूत्र, चौथम (खगडिय़ा)। बिहार के ख‍गडि़या के जिलाधिकारी अचानक विद्यालय पहुंच गए। गए तो थे वे मतदान केंद्रों का निरीक्षण करने, लेकिन विद्यालय में बच्‍चों को देखकर वे स्‍कूल में प्रवेश कर गए। उन्‍होंने बच्‍चों से खूब बात की। बच्‍चों ने भी जिलाधिकारी से अनेक प्रश्‍न पूछे। हालांकि डीएम के पहुंचने पर विद्यालय के शिक्षक काफी परेशान दिखे। अचानक डीएम आलोक रंजन घोष बुधवार को 'गुरुजी' की भूमिका में नजर आए।

दरअसल वे कोसी-बागमती दियारा के मतदान केंद्रों का जायजा लेने पहुंचे थे। चौथम प्रखंड के 13 पंचायतों में 10वें चरण का मतदान आठ दिसंबर को है। इसमें कोसी-बागमती दियारा की चार पंचायतें रोहियार, सरसवा, ठुठी मोहनपुर और बुच्चा भी शामिल है।

दियारा के मतदान केंद्रों का जायजा लेने के दौरान डीएम आलोक रंजन घोष मध्य विद्यालय रोहियार मुसहरी पहुंचे। यहां उन्होंने छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद किया। शिक्षक आश्चर्य चकित थे और विद्यार्थी अपने बीच डीएम को पाकर हर्षित। उन्होंने सपनों में भी नहीं सोचा था कि इस दुर्गम क्षेत्र में आकर 'डीएम अंकल' उनसे मुखातिब होंगे। उनसे पहाड़ा व कविता सुनाने को कहेंगे। डीएम ने विद्यार्थियों से पहाड़ा भी सुना। कविताएं भी। बातचीत की। विद्यालय से मिलने वाली सु‍विधाओं के बारे में पूछा। उन्‍होंने बच्‍चों को साफ कपड़े में स्‍कूल आने को कहा। साथ ही खुद की सफाई पर भी ध्‍यान देने कहा। उन्‍होंने स्‍वस्‍थ रहने के लिए कई टिप्‍स दिए। शिक्षकों के बारे में जानकारी ली। पढ़-लिखकर बड़ा आदमी बनने की सलाह दी। विद्यार्थियों ने भी 'डीएम अंकल' की बातों को गौर से सुना। बुधवार को जब वे विद्यालय से घरों को लौटे तो खासे हर्षित-प्रफुल्लित थे। 

बच्‍चों ने पूछा कैसे डीएम बनने के‍ लिए आपने क्‍या किया

बच्‍चों ने जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष से पूछा किया आपने डीएम बनने के लिए क्‍या किया। इस प्रश्‍न को सुनकर जिलाधिकारी से कहा कि एकाग्रचित होकर पढ़ाई करें। अभी बहुत समय है, बाद में सब समझ में आ जाएगा। पूरी पुस्‍तक का समग्रता के अध्‍ययन करो। 

जिलाधिकारी ने शिक्षकों से भी बात

जिलाधिकारी आलोक रंजन घोष ने शिक्षकों से बात-चीत की। बच्चों को कैसे पढ़ाएं, इसकी जानकारी दी। पाठन को लेकर कई टिप्स भी दिए। समय पर विद्यालय आने को कहा। साथ ही गुणवत्‍तापूर्ण तरीके से कैसे बच्‍चों को पढ़ाएं इसके लिए लगातार प्रशिक्षण  देने और लेने की सलाह दी। शिक्षकों को कहा कि खुद पढ़कर आएं। रोज पढ़ाई करें। 

Edited By: Dilip Kumar Shukla