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Holi 2026 : फाल्गुन पूर्णिमा पर खास संयोग, धुरखेल से होली तक जानें तिथि-मुहूर्त; होलिका दहन में करें ये जरूरी कार्य

Published: Sat, 21 Feb 2026 05:59 AM (IST)

Holi 2026: फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन, खंडग्रस्त चंद्रग्रहण और धुरखेल का विशेष संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित भूपेश ...और पढ़ें

Holi 2026 : फाल्गुन पूर्णिमा पर धुरखेल और होलिका दहन, जानें कब जलेगी होलिका और कब खेली जाएगी होली

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जागरण संवाददाता, भागलपुर।  Holi 2026 : होली को लेकर शहर से गांव तक उत्साह चरम पर है। बाजारों में रंग, गुलाल, पिचकारी और अबीर की दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगी है। बाहर रहकर नौकरी या पढ़ाई करने वाले लोग भी अपने घरों की ओर लौट रहे हैं। चारों ओर उत्सवी माहौल दिख रहा है। इस वर्ष फाल्गुन पूर्णिमा का पर्व आस्था, ज्योतिष और परंपरा के विशेष संयोग के कारण और भी खास माना जा रहा है। होलिका दहन, सुतक और खंडग्रस्त चंद्रग्रहण एक ही दिन पड़ने से धार्मिक दृष्टि से इसकी महत्ता बढ़ गई है।

भागलपुर के बुढ़ानाथ मंदिर के ज्योतिषाचार्य पंडित भूपेश मिश्रा ने बताया कि इस वर्ष 3 मार्च, मंगलवार को पूर्णिमा अपराह्न 4:26 बजे तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय से 48 मिनट पूर्व होलिका दहन करना श्रेष्ठ माना गया है। हालांकि स्थानीय परंपरा के अनुसार शुभ मुहूर्त में रात्रि में भी होलिका दहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सूर्योदय के बाद कुल परंपरा के अनुसार कुलदेवता पर सिंदूर आरोपण, पातरि तथा अन्य विधि-विधानों का पालन किया जाएगा।

मिथिला पंचांग के अनुसार होलिकाभस्म धारण, जिसे धुरखेल कहा जाता है, का विशेष महत्व है। होलिका दहन के अगले दिन प्रातः भस्म लगाकर सचैल स्नान करने की परंपरा है। इसके बाद लोग रंग-गुलाल से होली खेलते हैं। इसी दिन सप्तडोरक बंधन, जिसे डोरा पर्व भी कहा जाता है, संपन्न होगा। यह पर्व रक्षा, सुख-समृद्धि और मंगलकामना का प्रतीक माना जाता है।

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि 3 मार्च को प्रातः 10 बजे तक पूर्णिमा से जुड़े सभी कृत्य संपन्न कर लेना उचित रहेगा। सायं 5:55 बजे से 6:46 बजे तक खंडग्रस्त चंद्रग्रहण रहेगा। यद्यपि ग्रहण का आरंभ भारत में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा, क्योंकि उस समय दिन रहेगा, किंतु ग्रहणयुक्त चंद्र का उदय होगा। ग्रहण का मोक्ष 6:48 बजे बताया गया है। ग्रहण का सुतक आठ घंटे पूर्व, यानी प्रातः 9:50 बजे से प्रभावी हो जाएगा। इस अवधि में मंदिरों के पट बंद रहेंगे और शुभ कार्य वर्जित माने जाएंगे।

हृषिकेश, महावीर, मिथिला तथा वैदिक पंचांगों के अनुसार रंगोत्सव 4 मार्च, बुधवार को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन पूर्णिमा के बाद चैत्र मास का प्रथम चरण आरंभ होता है, जो भारतीय नववर्ष की शुरुआत का संकेत देता है।

पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप की बहन होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान था। उसने भक्त प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठने का प्रयास किया, किंतु भगवान की कृपा से होलिका भस्म हो गई और प्रह्लाद सुरक्षित रहे। यह घटना बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक है।

इस प्रकार इस वर्ष की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था, ज्योतिषीय गणना और पारंपरिक मान्यताओं के अद्भुत संयोग का प्रतीक बनकर आई है। होलिका की अग्नि में अहंकार और नकारात्मकता की आहुति देकर तथा भस्म से मन की शुद्धि कर जब रंगों की फुहार उठेगी, तो वह जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संदेश भी देगी।

होलिका दहन पर इन बातों का रखें ध्यान

  • होलिका दहन सदैव शुभ मुहूर्त और प्रदोष काल में करें।

  • दहन स्थल पर साफ-सफाई और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।

  • अग्नि प्रज्वलित करते समय सूखी लकड़ी और गोबर के उपलों का ही प्रयोग करें।

  • पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक या रबर सामग्री न जलाएं।

  • दहन के बाद अग्नि की पूरी तरह शांति सुनिश्चित करें।

धार्मिक दृष्टि से फाल्गुन पूर्णिमा के बाद चैत्र मास का आरंभ होता है, जिसे भारतीय नववर्ष का प्रारंभिक संकेत भी माना जाता है। इस प्रकार Holi 2026 केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक समरसता का पर्व है। धुरखेल से लेकर रंगोत्सव तक यह त्योहार जीवन में उल्लास और नई ऊर्जा का संचार करता है।