जागरण संवाददाता, सुपौल । जिले में अब अमरूद की मिठास फिर से लौटेगी इसके लिए कृषि विभाग ने पहल करते हुए अमरूद की खेती को व्यावसायिक खेती का रूप देने का फैसला लिया है। कृषि विभाग ने जिले में अमरूद की खेती के लिए 40 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित करते हुए किसानों को इसके लिए प्रशिक्षण देना प्रारंभ कर दिया है। मुख्यमंत्री बागवानी मिशन योजना के तहत होने वाली अमरूद की खेती के लिए किसानों को अनुदान भी सरकार द्वारा दी जाएगी। विभाग का मानना है कि अधिक से अधिक किसानों को अमरुद खेती के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है ताकि निर्धारित लक्ष्य से अधिक खेतों में अमरूद की खेती कर किसान अपनी आय बढ़ा सकें।

कृषि और उद्यान विभाग ने की पहल

एक समय था जब हर घर के आंगन व दरवाजे के समीप भी अमरूद के पेड़ होते थे। गांव के बगीचों में भी आम के बाद अमरूद के पेड़ ही नजर आते थे लेकिन समय के साथ अमरूद बगीचों से गायब हो गए। इसके प्रति लोगों की रुचि कम होता देख कृषि और उद्यान विभाग ने इसकी खेती को बढ़ावा देने की पहल की है।

बोले अधिकारी

जिला उद्यान पदाधिकारी आकाश कुमार बताते हैं कि जिले में पहले चरण में 40 हेक्टेयर खेत में अमरूद की खेती करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सभी प्रखंडों के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रति हेक्टेयर में अमरूद के 11111 पौधे लगाए जाते हैं। प्रति पौधे की कीमत 30 रुपये है। किसानों को अनुदानित दर पर पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे। किसानों को पहले साल 90 फीसद पौधे बचने पर अनुदान दिया जाएगा। दूसरे साल भी अनुदान दिया जाएगा। अनुदान की राशि किसानों के बैंक खाते में भेजी जाएगी इसके साथ ही किसानों को उन्नत तरीके से अमरूद की खेती करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाना है।

बोले किसान

प्रशिक्षण प्राप्त बसंतपुर के किसान रघुनंदन ङ्क्षसह, मोहन ङ्क्षसह, भिखारी मेहता, छातापुर के जगदेव मेहता, अशोक कुमार, रामदेव दास ने बताया कि यह खेती इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो सकती है। इस इलाके में सदियों से ही बागवानी आधारित खेती है। किसानों के लिए समृद्धि का द्वार खोल सकती है। बताया कि जिले में कई ऐसे भूभाग भी हैं जहां की जमीन समतल नहीं होने के कारण उसमें अन्य उत्पादन करना संभव नहीं हो पाता है ऐसे खेतों में अमरूद किसानों के लिए लाभदायक खेती बन सकती है। इधर सरकार भी इस खेती को ले पहल की है ऐसे में अमरूद की खेती कर यहां के किसान खुशहाल हो सकते हैं।

बाजार की नहीं है दिक्कत

कृषि आधारित सुपौल जिले का बाजार भी अब अन्य प्रांतों से जुड़ गया है। ऐसे में बाहर के अमरूद की यहां काफी बिक्री होती है। इसे देख लगता है कि बाजार के लिए भी किसानों को ज्यादा परेशानी नहीं होगी।

 

Edited By: Amrendra kumar Tiwari

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