संस, सहरसा। इस वर्ष बाढ़ व अतिवृष्टि से धान की फसल की बड़ी बर्बादी हुई। जिले में 67 हजार हेक्टेयर मे धान की खेती हुई, जिसमें 45 हजार हेक्टेयर में फसल बर्बादी के लिए क्षतिपूर्ति का दावा किया गया है। इन कारणों से जिले में धान खरीद का लक्ष्य घटाया गया। पैक्सों द्वारा लगातार की गई मांग पर लक्ष्य में कुछ बढोत्तरी की गई, परंतु इसका लाभ अधिकांश बाढ़ प्रभावित पंचायतों को दिया गया है,जहां से बड़ी संख्या में क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन पड़ा है। क्षतिपूर्ति और धान बेचने वालों की सूची जांच से पैक्सों के रैकेट का भी खुलासा हो सकता है।

क्षतिपूर्ति मांगनेवाले प्रखंडों पर ही हुई विशेष कृपा

जिले में महिषी, नवहट्टा, सिमरीबख्तियारपुर व सलखुआ प्रखंड बाढ़ प्रभावित है। इस इलाके में ही मुख्यरूप से बड़ी संख्या में क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन कृषि विभाग को प्राप्त हुआ। हालांकि अतिवृष्टि के कारण अन्य प्रखंडों में भी आवेदन पड़ा। पहले तो जिले की रकवा से अधिक का क्षति आवेदन दिया गया। बाद में जांच के बाद बाढ़ में 38 हजार और अतिवृष्टि में सात हजार हैक्टेयर में क्षति मानते हुए आवंटन की मांग की गई। अर्थात जिले में मात्र 22 हजार हैक्टेयर में धान बच सका। बावजूद इसके जिला धान खरीद के लिए पूर्व में 38 हजार 142 एमटी लक्ष्य में दस हजार चार सौ 61 एमटी की जो बढ़ोतरी हुई, उसकी अधिकांश मात्रा बाढ़ प्रभावित प्रखंडों को दे दी गई है।

जांच में हो सकता है रैकेट का खुलासा

बाढ़ प्रभावित महिषी प्रखंड में 699 एमटी, नवहट्टा में 399 एमटी, सिमरीबख्तियारपुर में 710 एमटी और सलखुआ में 385 एमटी लक्ष्य बढ़ाया गया है। जबकि कई दूसरे प्रखंड में कम लक्ष्य रहने के कारण किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा है। ऐसे में एक ही किसानों के नाम पर दोहरा लाभ लिए जाने की संभावना प्रबल हो गई है। जांच में इस रैकेट का खुलासा हो सकता है।

गत वर्ष की खरीद और इस वर्ष जिन प्रखंडों को पूर्व में कम लक्ष्य दिया गया था, उसे ध्यान में रखते हुए लक्ष्य बढ़ाया गया है। अगर किसी प्रखंड में आवश्यकता महसूस होगी तो उसपर विचार किया जाएगा।

शिवशंकर कुमार, डीसीओ, सहरसा।

Edited By: Abhishek Kumar